अल-बकरा · 251/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
فَهَزَمُوهُم بِإِذْنِ اللَّهِ وَقَتَلَ دَاوُودُ جَالُوتَ وَآتَاهُ اللَّهُ الْمُلْكَ وَالْحِكْمَةَ وَعَلَّمَهُ مِمَّا يَشَاءُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ اللَّهِ النَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لَّفَسَدَتِ الْأَرْضُ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ ذُو فَضْلٍ عَلَى الْعَالَمِينَ ۝٢٥١
Fahazamoohum bi iznillaahi wa qatala Daawoodu jaaloota wa aataahul laahulmulka Wal Hikmata wa `allamahoo mimmaa yashaaa`; wa law laa daf`ullaahin naasa ba`dahum biba`dil lafasadatil ardu wa laakinnal laaha zoo fadlin `alal`aalameen
📖 हिंदी अर्थ
फिर तो उन लोगों ने ख़ुदा के हुक्म से दुशमनों को शिकस्त दी और दाऊद ने जालूत को क़त्ल किया और ख़ुदा ने उनको सल्तनत व तदबीर तम्द्दुन अता की और इल्म व हुनर जो चाहा उन्हें गोया घोल के पिला दिया और अगर ख़ुदा बाज़ लोगों के ज़रिए से बाज़ का दफाए (शर) न करता तो तमाम रुए ज़मीन पर फ़साद फैल जाता मगर ख़ुदा तो सारे जहाँन के लोगों पर फज़ल व रहम करता है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَهَزَمُوهُم: उन्होंने उन्हें पराजित कर दिया।
  • جَالُوت: जालूत, शत्रु सेना का विशालकाय और अत्याचारी सेनापति।
  • الْمُلْكَ: राज्य, शासन।
  • الْحِكْمَةَ: नबुव्वत (पैग़म्बरी) और सही फ़ैसले करने की समझ।
  • دَفْعُ: रोकना, टालना।
  • فَضْل: कृपा, उदारता।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने हुक्म और क़ुदरत से मोमिनीन के उस छोटे से गिरोह को जालूत की विशाल और ताकतवर फ़ौज पर ग़ालिब आने की तौफ़ीक़ दी। फिर अल्लाह के नबी दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने जालूत को मैदान-ए-जंग में ख़ुद अपने हाथों क़त्ल किया, जो उस वक़्त का सबसे बड़ा ज़ालिम और सरकश हुक्मरान था। इसके बाद अल्लाह ने दाऊद (अलैहिस्सलाम) को बनी इसराईल की बादशाही अता फ़रमाई और उन्हें नबुव्वत से भी नवाज़ा। अल्लाह ने उन्हें वो इल्म और हिकमत सिखाई जो उसने चाहा, जिसमें लोहे की ज़िरह बनाने का हुनर भी शामिल था, ताकि वो अपने हाथों की कमाई से खाएँ और लोगों की हिफ़ाज़त का ज़रिया भी बने।

फिर अल्लाह तआला ने एक बहुत बड़ी हिकमत बयान फ़रमाई: अगर अल्लाह अपनी रहमत से कुछ लोगों (मोमिनीन और नेक लोगों) के ज़रिए दूसरे लोगों (ज़ालिमों और मुशरिकों) की शरारत को न रोकता, तो ज़मीन पर फ़साद फैल जाता, ज़ुल्म और कुफ़्र का बोलबाला हो जाता और अच्छे लोग मिट जाते। लेकिन अल्लाह ने अपने फ़ज़्ल और कृपा से इस दुनिया को बचाए रखा है। यह अल्लाह की रहमत है कि वो ईमान वालों के ज़रिए बुराई का रास्ता रोकता है और दुनिया में नेकी और इंसाफ़ का निज़ाम क़ायम रखता है।


दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह पर भरोसा और सच्ची नीयत से जब कोई काम किया जाता है, तो अल्लाह तआला ताकत और तदबीर में बरकत देता है। दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने अकेले दम पर जालूत को हराया, लेकिन यह ताक़त अल्लाह की देन थी। यह भी सीख है कि अल्लाह जिसे चाहता है हिकमत और इल्म देता है, और यह सबसे बड़ी नेअमत है। हमें भी चाहिए कि अल्लाह की राह में जिहाद और नेकी के कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, क्योंकि अल्लाह नेक लोगों के ज़रिए दुनिया से फ़साद को दूर करता है। यह आयत हमें हौसला देती है कि अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ होती है, चाहे दुश्मन कितना भी ताकतवर क्यों न हो।

🎧 सुनें

📜 आयत 249-253 — अल-बकरा

249فَلَمَّا فَصَلَ طَالُوتُ بِالْجُنُودِ قَالَ إِنَّ اللَّهَ مُبْتَلِيكُم بِنَهَرٍ فَمَن شَرِبَ مِنْهُ فَلَيْسَ مِنِّي وَمَن لَّمْ يَطْعَمْهُ فَإِنَّهُ مِنِّي إِلَّا مَنِ اغْتَرَفَ غُرْفَةً بِيَدِهِ ۚ فَشَرِبُوا مِنْهُ إِلَّا قَلِيلًا مِّنْهُمْ ۚ فَلَمَّا جَاوَزَهُ هُوَ وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ قَالُوا لَا طَاقَةَ لَنَا الْيَوْمَ بِجَالُوتَ وَجُنُودِهِ ۚ قَالَ الَّذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُم مُّلَاقُو اللَّهِ كَم مِّن فِئَةٍ قَلِيلَةٍ غَلَبَتْ فِئَةً كَثِيرَةً بِإِذْنِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ مَعَ الصَّابِرِينَ
फिर जब तालूत लशकर समैत (शहर ऐलिया से) रवाना हुआ तो अपने साथियों से कहा देखो आगे एक नहर मिलेगी इस से यक़ीनन ख़ुदा तुम्हारे सब्र की आज़माइश करेगा पस जो शख्स उस का पानी पीयेगा मुझे (कुछ वास्ता) नही रखता और जो उस को नही चखेगा वह बेशक मुझ से होगा मगर हाँ जो अपने हाथ से एक (आधा चुल्लू भर के पी) ले तो कुछ हर्ज नही पस उन लोगों ने न माना और चन्द आदमियों के सिवा सब ने उस का पानी पिया ख़ैर जब तालूत और जो मोमिनीन उन के साथ थे नहर से पास हो गए तो (ख़ास मोमिनों के सिवा) सब के सब कहने लगे कि हम में तो आज भी जालूत और उसकी फौज से लड़ने की सकत नहीं मगर वह लोग जिनको यक़ीन है कि एक दिन ख़ुदा को मुँह दिखाना है बेधड़क बोल उठे कि ऐसा बहुत हुआ कि ख़ुदा के हुक्म से छोटी जमाअत बड़ी जमाअत पर ग़ालिब आ गयी है और ख़ुदा सब्र करने वालों का साथी है
250وَلَمَّا بَرَزُوا لِجَالُوتَ وَجُنُودِهِ قَالُوا رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
(ग़रज़) जब ये लोग जालूत और उसकी फौज के मुक़ाबले को निकले तो दुआ की ऐ मेरे परवरदिगार हमें कामिल सब्र अता फरमा और मैदाने जंग में हमारे क़दम जमाए रख और हमें काफिरों पर फतेह इनायत कर
251فَهَزَمُوهُم بِإِذْنِ اللَّهِ وَقَتَلَ دَاوُودُ جَالُوتَ وَآتَاهُ اللَّهُ الْمُلْكَ وَالْحِكْمَةَ وَعَلَّمَهُ مِمَّا يَشَاءُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ اللَّهِ النَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لَّفَسَدَتِ الْأَرْضُ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ ذُو فَضْلٍ عَلَى الْعَالَمِينَ
फिर तो उन लोगों ने ख़ुदा के हुक्म से दुशमनों को शिकस्त दी और दाऊद ने जालूत को क़त्ल किया और ख़ुदा ने उनको सल्तनत व तदबीर तम्द्दुन अता की और इल्म व हुनर जो चाहा उन्हें गोया घोल के पिला दिया और अगर ख़ुदा बाज़ लोगों के ज़रिए से बाज़ का दफाए (शर) न करता तो तमाम रुए ज़मीन पर फ़साद फैल जाता मगर ख़ुदा तो सारे जहाँन के लोगों पर फज़ल व रहम करता है
252تِلْكَ آيَاتُ اللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّ ۚ وَإِنَّكَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ
ऐ रसूल ये ख़ुदा की सच्ची आयतें हैं जो हम तुम को ठीक ठीक पढ़के सुनाते हैं और बेशक तुम ज़रुर रसूलों में से हो
253۞ تِلْكَ الرُّسُلُ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۘ مِّنْهُم مَّن كَلَّمَ اللَّهُ ۖ وَرَفَعَ بَعْضَهُمْ دَرَجَاتٍ ۚ وَآتَيْنَا عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ الْبَيِّنَاتِ وَأَيَّدْنَاهُ بِرُوحِ الْقُدُسِ ۗ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ مَا اقْتَتَلَ الَّذِينَ مِن بَعْدِهِم مِّن بَعْدِ مَا جَاءَتْهُمُ الْبَيِّنَاتُ وَلَٰكِنِ اخْتَلَفُوا فَمِنْهُم مَّنْ آمَنَ وَمِنْهُم مَّن كَفَرَ ۚ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ مَا اقْتَتَلُوا وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُ
यह सब रसूल (जो हमने भेजे) उनमें से बाज़ को बाज़ पर फज़ीलत दी उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जिनसे ख़ुद ख़ुदा ने बात की उनमें से बाज़ के (और तरह पर) दर्जे बुलन्द किये और मरियम के बेटे ईसा को (कैसे कैसे रौशन मौजिज़े अता किये) और रूहुलकुदस (जिबरईल) के ज़रिये से उनकी मदद की और अगर ख़ुदा चाहता तो लोग इन (पैग़म्बरों) के बाद हुये वह अपने पास रौशन मौजिज़े आ चुकने पर आपस में न लड़ मरते मगर उनमें फूट पड़ गई पस उनमें से बाज़ तो ईमान लाये और बाज़ काफ़िर हो गये और अगर ख़ुदा चाहता तो यह लोग आपस में लड़ते मगर ख़ुदा वही करता है जो चाहता है
अल-बकराकुरान सूची
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251आयत

अनुवाद — अल-बकरा 251

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सूरा आयत 251/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 249–253. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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