Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَهَزَمُوهُم: उन्होंने उन्हें पराजित कर दिया।
- جَالُوت: जालूत, शत्रु सेना का विशालकाय और अत्याचारी सेनापति।
- الْمُلْكَ: राज्य, शासन।
- الْحِكْمَةَ: नबुव्वत (पैग़म्बरी) और सही फ़ैसले करने की समझ।
- دَفْعُ: रोकना, टालना।
- فَضْل: कृपा, उदारता।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने हुक्म और क़ुदरत से मोमिनीन के उस छोटे से गिरोह को जालूत की विशाल और ताकतवर फ़ौज पर ग़ालिब आने की तौफ़ीक़ दी। फिर अल्लाह के नबी दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने जालूत को मैदान-ए-जंग में ख़ुद अपने हाथों क़त्ल किया, जो उस वक़्त का सबसे बड़ा ज़ालिम और सरकश हुक्मरान था। इसके बाद अल्लाह ने दाऊद (अलैहिस्सलाम) को बनी इसराईल की बादशाही अता फ़रमाई और उन्हें नबुव्वत से भी नवाज़ा। अल्लाह ने उन्हें वो इल्म और हिकमत सिखाई जो उसने चाहा, जिसमें लोहे की ज़िरह बनाने का हुनर भी शामिल था, ताकि वो अपने हाथों की कमाई से खाएँ और लोगों की हिफ़ाज़त का ज़रिया भी बने।
फिर अल्लाह तआला ने एक बहुत बड़ी हिकमत बयान फ़रमाई: अगर अल्लाह अपनी रहमत से कुछ लोगों (मोमिनीन और नेक लोगों) के ज़रिए दूसरे लोगों (ज़ालिमों और मुशरिकों) की शरारत को न रोकता, तो ज़मीन पर फ़साद फैल जाता, ज़ुल्म और कुफ़्र का बोलबाला हो जाता और अच्छे लोग मिट जाते। लेकिन अल्लाह ने अपने फ़ज़्ल और कृपा से इस दुनिया को बचाए रखा है। यह अल्लाह की रहमत है कि वो ईमान वालों के ज़रिए बुराई का रास्ता रोकता है और दुनिया में नेकी और इंसाफ़ का निज़ाम क़ायम रखता है।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह पर भरोसा और सच्ची नीयत से जब कोई काम किया जाता है, तो अल्लाह तआला ताकत और तदबीर में बरकत देता है। दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने अकेले दम पर जालूत को हराया, लेकिन यह ताक़त अल्लाह की देन थी। यह भी सीख है कि अल्लाह जिसे चाहता है हिकमत और इल्म देता है, और यह सबसे बड़ी नेअमत है। हमें भी चाहिए कि अल्लाह की राह में जिहाद और नेकी के कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, क्योंकि अल्लाह नेक लोगों के ज़रिए दुनिया से फ़साद को दूर करता है। यह आयत हमें हौसला देती है कि अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ होती है, चाहे दुश्मन कितना भी ताकतवर क्यों न हो।
📜 आयत 249-253 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 251
सूरा अल-बकरा आयत 251 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर तो उन लोगों ने ख़ुदा के हुक्म से दुशमनों…सूरा आयत 251/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 249–253. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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