Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- هُدَاهُمْ: उन्हें हिदायत देना और सत्य पर चलाना।
- يَهْدِي: हिदायत देता है, मार्गदर्शन करता है।
- تُنْفِقُوا: खर्च करो (अल्लाह की राह में)।
- ابْتِغَاءَ وَجْهِ اللَّهِ: अल्लाह की प्रसन्नता और उसके दर्शन की चाहत।
- يُوَفَّ إِلَيْكُمْ: तुम्हें पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा।
- لَا تُظْلَمُونَ: तुम पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा, तुम्हारा हक कम नहीं किया जाएगा।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप पर उन लोगों को हिदायत देने की ज़िम्मेदारी नहीं है, क्योंकि हिदायत देना सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। आपका काम केवल सत्य का संदेश पहुँचाना और रास्ता दिखाना है। हिदायत तो अल्लाह ही देता है जिसे वह चाहता है, क्योंकि वही दिलों का मालिक है। इसलिए आप किसी को इसलिए खर्च देने से न रोकें कि वह अभी मुसलमान नहीं हुआ, बल्कि अल्लाह की राह में खर्च करते रहें, क्योंकि हिदायत का फ़ैसला अल्लाह के हाथ में है।
और जो भी अच्छाई (धन) तुम खर्च करते हो, उसका लाभ तुम्हारे ही लिए है। अल्लाह को तुम्हारे खर्च की कोई ज़रूरत नहीं, बल्कि यह तुम्हारे लिए ही भलाई और बरकत का ज़रिया है। सच्चे मोमिनों का तरीक़ा यही है कि वे केवल अल्लाह की रज़ा और उसकी प्रसन्नता के लिए खर्च करते हैं, न कि किसी दिखावे या दुनियावी मक़सद के लिए।
और जो भी तुम खर्च करोगे — चाहे वह कम हो या ज़्यादा — अल्लाह उसका पूरा-पूरा बदला तुम्हें देगा, और तुम्हारे साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा। तुम्हारे अच्छे कामों का सवाब कम नहीं किया जाएगा, बल्कि अल्लाह अपनी रहमत से उसे कई गुना बढ़ाकर देगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता।
ध्यान रखो कि खर्च करने का सबसे उत्तम तरीक़ा यह है कि वह सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए हो, दिल की सच्चाई और नीयत की पवित्रता के साथ। ऐसा खर्च ही क़ुबूल होता है और उसका अज्र अल्लाह के पास सुरक्षित रहता है। याद रखो, अल्लाह ने अपने प्यारे बंदों से वादा किया है कि वह उनके अच्छे कामों का बदला उन्हें पूरा-पूरा देगा, और उन पर कोई ज़ुल्म नहीं होगा। यही अल्लाह की रहमत और उसका इंसाफ़ है।
📜 आयत 270-274 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 272
सूरा अल-बकरा आयत 272 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ रसूल उनका मंज़िले मक़सूद तक पहुंचाना तुम्हारा काम नहीं…सूरा आयत 272/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 270–274. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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