अल-बकरा · 272/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
۞ لَّيْسَ عَلَيْكَ هُدَاهُمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَن يَشَاءُ ۗ وَمَا تُنفِقُوا مِنْ خَيْرٍ فَلِأَنفُسِكُمْ ۚ وَمَا تُنفِقُونَ إِلَّا ابْتِغَاءَ وَجْهِ اللَّهِ ۚ وَمَا تُنفِقُوا مِنْ خَيْرٍ يُوَفَّ إِلَيْكُمْ وَأَنتُمْ لَا تُظْلَمُونَ ۝٢٧٢
Laisa `alaika hudaahum wa laakinnal laaha yahdee mai yashaaa`; wa maa tunfiqoo min khairin fali anfusikum; wa maa tunfiqoona illab tighaaa`a wajhil laah; wa maa tunfiqoo min khairiny yuwaffa ilaikum wa antum laa tuzlamoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल उनका मंज़िले मक़सूद तक पहुंचाना तुम्हारा काम नहीं (तुम्हारा काम सिर्फ रास्ता दिखाना है) मगर हॉ ख़ुदा जिसको चाहे मंज़िले मक़सूद तक पहुंचा दे और (लोगों) तुम जो कुछ नेक काम में ख़र्च करोगे तो अपने लिए और तुम ख़ुदा की ख़ुशनूदी के सिवा और काम में ख़र्च करते ही नहीं हो (और जो कुछ तुम नेक काम में ख़र्च करोगे) (क़यामत में) तुमको भरपूर वापस मिलेगा और तुम्हारा हक़ न मारा जाएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • هُدَاهُمْ: उन्हें हिदायत देना और सत्य पर चलाना।
  • يَهْدِي: हिदायत देता है, मार्गदर्शन करता है।
  • تُنْفِقُوا: खर्च करो (अल्लाह की राह में)।
  • ابْتِغَاءَ وَجْهِ اللَّهِ: अल्लाह की प्रसन्नता और उसके दर्शन की चाहत।
  • يُوَفَّ إِلَيْكُمْ: तुम्हें पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा।
  • لَا تُظْلَمُونَ: तुम पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा, तुम्हारा हक कम नहीं किया जाएगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप पर उन लोगों को हिदायत देने की ज़िम्मेदारी नहीं है, क्योंकि हिदायत देना सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। आपका काम केवल सत्य का संदेश पहुँचाना और रास्ता दिखाना है। हिदायत तो अल्लाह ही देता है जिसे वह चाहता है, क्योंकि वही दिलों का मालिक है। इसलिए आप किसी को इसलिए खर्च देने से न रोकें कि वह अभी मुसलमान नहीं हुआ, बल्कि अल्लाह की राह में खर्च करते रहें, क्योंकि हिदायत का फ़ैसला अल्लाह के हाथ में है।

और जो भी अच्छाई (धन) तुम खर्च करते हो, उसका लाभ तुम्हारे ही लिए है। अल्लाह को तुम्हारे खर्च की कोई ज़रूरत नहीं, बल्कि यह तुम्हारे लिए ही भलाई और बरकत का ज़रिया है। सच्चे मोमिनों का तरीक़ा यही है कि वे केवल अल्लाह की रज़ा और उसकी प्रसन्नता के लिए खर्च करते हैं, न कि किसी दिखावे या दुनियावी मक़सद के लिए।

और जो भी तुम खर्च करोगे — चाहे वह कम हो या ज़्यादा — अल्लाह उसका पूरा-पूरा बदला तुम्हें देगा, और तुम्हारे साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा। तुम्हारे अच्छे कामों का सवाब कम नहीं किया जाएगा, बल्कि अल्लाह अपनी रहमत से उसे कई गुना बढ़ाकर देगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता।

ध्यान रखो कि खर्च करने का सबसे उत्तम तरीक़ा यह है कि वह सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए हो, दिल की सच्चाई और नीयत की पवित्रता के साथ। ऐसा खर्च ही क़ुबूल होता है और उसका अज्र अल्लाह के पास सुरक्षित रहता है। याद रखो, अल्लाह ने अपने प्यारे बंदों से वादा किया है कि वह उनके अच्छे कामों का बदला उन्हें पूरा-पूरा देगा, और उन पर कोई ज़ुल्म नहीं होगा। यही अल्लाह की रहमत और उसका इंसाफ़ है।



📜 आयत 270-274 — अल-बकरा

270وَمَا أَنفَقْتُم مِّن نَّفَقَةٍ أَوْ نَذَرْتُم مِّن نَّذْرٍ فَإِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُهُ ۗ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
और तुम जो कुछ भी ख़र्च करो या कोई मन्नत मानो ख़ुदा उसको ज़रूर जानता है और (ये भी याद रहे) कि ज़ालिमों का (जो) ख़ुदा का हक़ मार कर औरों की नज़्र करते हैं (क़यामत में) कोई मददगार न होगा
271إِن تُبْدُوا الصَّدَقَاتِ فَنِعِمَّا هِيَ ۖ وَإِن تُخْفُوهَا وَتُؤْتُوهَا الْفُقَرَاءَ فَهُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۚ وَيُكَفِّرُ عَنكُم مِّن سَيِّئَاتِكُمْ ۗ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
अगर ख़ैरात को ज़ाहिर में दो तो यह (ज़ाहिर करके देना) भी अच्छा है और अगर उसको छिपाओ और हाजतमन्दों को दो तो ये छिपा कर देना तुम्हारे हक़ में ज्यादा बेहतर है और ऐसे देने को ख़ुदा तुम्हारे गुनाहों का कफ्फ़ारा कर देगा और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है
272۞ لَّيْسَ عَلَيْكَ هُدَاهُمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَن يَشَاءُ ۗ وَمَا تُنفِقُوا مِنْ خَيْرٍ فَلِأَنفُسِكُمْ ۚ وَمَا تُنفِقُونَ إِلَّا ابْتِغَاءَ وَجْهِ اللَّهِ ۚ وَمَا تُنفِقُوا مِنْ خَيْرٍ يُوَفَّ إِلَيْكُمْ وَأَنتُمْ لَا تُظْلَمُونَ
ऐ रसूल उनका मंज़िले मक़सूद तक पहुंचाना तुम्हारा काम नहीं (तुम्हारा काम सिर्फ रास्ता दिखाना है) मगर हॉ ख़ुदा जिसको चाहे मंज़िले मक़सूद तक पहुंचा दे और (लोगों) तुम जो कुछ नेक काम में ख़र्च करोगे तो अपने लिए और तुम ख़ुदा की ख़ुशनूदी के सिवा और काम में ख़र्च करते ही नहीं हो (और जो कुछ तुम नेक काम में ख़र्च करोगे) (क़यामत में) तुमको भरपूर वापस मिलेगा और तुम्हारा हक़ न मारा जाएगा
273لِلْفُقَرَاءِ الَّذِينَ أُحْصِرُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ لَا يَسْتَطِيعُونَ ضَرْبًا فِي الْأَرْضِ يَحْسَبُهُمُ الْجَاهِلُ أَغْنِيَاءَ مِنَ التَّعَفُّفِ تَعْرِفُهُم بِسِيمَاهُمْ لَا يَسْأَلُونَ النَّاسَ إِلْحَافًا ۗ وَمَا تُنفِقُوا مِنْ خَيْرٍ فَإِنَّ اللَّهَ بِهِ عَلِيمٌ
(यह खैरात) ख़ास उन हाजतमन्दों के लिए है जो ख़ुदा की राह में घिर गये हो (और) रूए ज़मीन पर (जाना चाहें तो) चल नहीं सकते नावाक़िफ़ उनको सवाल न करने की वजह से अमीर समझते हैं (लेकिन) तू (ऐ मुख़ातिब अगर उनको देखे) तो उनकी सूरत से ताड़ जाये (कि ये मोहताज हैं अगरचे) लोगों से चिमट के सवाल नहीं करते और जो कुछ भी तुम नेक काम में ख़र्च करते हो ख़ुदा उसको ज़रूर जानता है
274الَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُم بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ سِرًّا وَعَلَانِيَةً فَلَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
जो लोग रात को या दिन को छिपा कर या दिखा कर (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करते हैं तो उनके लिए उनका अज्र व सवाब उनके परवरदिगार के पास है और (क़यामत में) न उन पर किसी क़िस्म का ख़ौफ़ होगा और न वह आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे
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अनुवाद — अल-बकरा 272

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सूरा आयत 272/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 270–274. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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