अल-बकरा · 39/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ ۝٣٩
Wallazeena kafaroo wa kaz zabooo bi aayaatinaa ulaaa`ika Ashaabun Naari hum feehaa khaalidoon
📖 हिंदी अर्थ
और न वह रंजीदा होगे और (ये भी याद रखो) जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो वही जहन्नुमी हैं और हमेशा दोज़ख़ में पड़े रहेगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَفَرُوا: इनकार किया, छुपाया, या अविश्वास किया।
  • كَذَّبُوا: झुठलाया, झूठा कहा।
  • بِآيَاتِنَا: हमारी निशानियों (आयतों) को, जिनमें क़ुरआन और अल्लाह की एकता की दलीलें शामिल हैं।
  • أَصْحَابُ النَّارِ: आग (जहन्नम) के साथी, यानी उसमें रहने वाले।
  • خَالِدُونَ: हमेशा रहने वाले, कभी न निकलने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जिन्होंने सच्चाई को जानते हुए भी उसे नकारा और उस पर ईमान नहीं लाए। ये वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की आयतों को — चाहे वे क़ुरआन की आयतें हों या अल्लाह की एकता और उसकी क़ुदरत की निशानियाँ — झुठलाया और उनका मज़ाक उड़ाया। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने फ़ैसला सुना दिया है कि वे जहन्नम की आग में डाले जाएँगे और उसी में हमेशा रहेंगे। वे न तो उस आग से कभी बाहर निकल सकेंगे और न ही उन्हें मौत आएगी कि उससे छुटकारा पा सकें। यह उनका स्थायी ठिकाना होगा, और यह उनके इनकार और झुठलाने का बदला है।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सचेत करती है कि अल्लाह की आयतों को झुठलाना और उनसे मुँह मोड़ना सबसे बड़ा नुक़सान है, जिसका अंजाम हमेशा की आग है।
  2. अल्लाह का इन्साफ़ पूर्ण है — जो लोग सच्चाई को जानकर भी उसे नकारें, उनके लिए सख्त सज़ा है, और यह अल्लाह की रहमत से महरूम होने की सबसे बड़ी मिसाल है।
  3. यह आयत हमें ईमान की अहमियत समझाती है — ईमान ही वह चीज़ है जो इंसान को हमेशा की आग से बचाता है, और इसके बिना कोई भी नेक अमल काम नहीं आएगा।
  4. हमें अल्लाह की आयतों पर ग़ौर करना चाहिए और उन्हें अपनी ज़िंदगी में अपनाना चाहिए, ताकि हम उन लोगों में से न हों जिनका ठिकाना जहन्नम है।
  5. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा खुला है — जो कोई भी अपने कुफ़्र और इनकार से तौबा कर ले, वह इस सज़ा से बच सकता है, क्योंकि अल्लाह ने आगे की आयतों में माफ़ी और रहमत का वादा भी किया है।


📜 आयत 37-41 — सूरा अल-बकरा

37فَتَلَقَّىٰ آدَمُ مِن رَّبِّهِ كَلِمَاتٍ فَتَابَ عَلَيْهِ ۚ إِنَّهُ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
फिर आदम ने अपने परवरदिगार से (माज़रत के चन्द अल्फाज़) सीखे पस खुदा ने उन अल्फाज़ की बरकत से आदम की तौबा कुबूल कर ली बेशक वह बड़ा माफ़ करने वाला मेहरबान है
38قُلْنَا اهْبِطُوا مِنْهَا جَمِيعًا ۖ فَإِمَّا يَأْتِيَنَّكُم مِّنِّي هُدًى فَمَن تَبِعَ هُدَايَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
(और जब आदम को) ये हुक्म दिया था कि यहाँ से उतर पड़ो (तो भी कह दिया था कि) अगर तुम्हारे पास मेरी तरफ़ से हिदायत आए तो (उसकी पैरवी करना क्योंकि) जो लोग मेरी हिदायत पर चलेंगे उन पर (क़यामत) में न कोई ख़ौफ होगा
39وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और न वह रंजीदा होगे और (ये भी याद रखो) जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो वही जहन्नुमी हैं और हमेशा दोज़ख़ में पड़े रहेगे
40يَا بَنِي إِسْرَائِيلَ اذْكُرُوا نِعْمَتِيَ الَّتِي أَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ وَأَوْفُوا بِعَهْدِي أُوفِ بِعَهْدِكُمْ وَإِيَّايَ فَارْهَبُونِ
ऐ बनी इसराईल (याक़ूब की औलाद) मेरे उन एहसानात को याद करो जो तुम पर पहले कर चुके हैं और तुम मेरे एहद व इक़रार (ईमान) को पूरा करो तो मैं तुम्हारे एहद (सवाब) को पूरा करूँगा, और मुझ ही से डरते रहो
41وَآمِنُوا بِمَا أَنزَلْتُ مُصَدِّقًا لِّمَا مَعَكُمْ وَلَا تَكُونُوا أَوَّلَ كَافِرٍ بِهِ ۖ وَلَا تَشْتَرُوا بِآيَاتِي ثَمَنًا قَلِيلًا وَإِيَّايَ فَاتَّقُونِ
और जो (कुरान) मैंने नाज़िल किया वह उस किताब (तौरेत) की (भी) तसदीक़ करता हूँ जो तुम्हारे पास है और तुम सबसे चले उसके इन्कार पर मौजूद न हो जाओ और मेरी आयतों के बदले थोड़ी क़ीमत (दुनयावी फायदा) न लो और मुझ ही से डरते रहो
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
39आयत

अनुवाद — अल-बकरा 39

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सूरा आयत 39/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.





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Monday, September 28, 2026

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