अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- كَفَرُوا: अल्लाह पर, उसके रसूल पर और उस पर ईमान लाने से इनकार किया जो अल्लाह ने उतारा है।
- سَوَاءٌ عَلَيْهِمْ: उनके लिए बराबर है, समान है।
- أَنذَرْتَهُمْ: उन्हें डराया, सचेत किया, अल्लाह के अज़ाब से ख़बरदार किया।
- لَا يُؤْمِنُونَ: वे ईमान नहीं लाएँगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने अल्लाह के दीन को ठुकरा दिया और उस पर ईमान लाने से इनकार कर दिया जो अल्लाह ने अपने रसूल (ﷺ) पर उतारा। ये वे लोग हैं जिन पर अल्लाह की ओर से शर्मिंदगी और दुर्भाग्य की बात पहले ही साबित हो चुकी है। उनके लिए आपका डराना और न डराना, दोनों बराबर है। चाहे आप उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराएँ और सचेत करें, या ऐसा न करें, वे किसी भी सूरत में ईमान नहीं लाएँगे। इसका कारण यह है कि उन्होंने अपने हठ और अहंकार के कारण सत्य को जानते हुए भी उसे ठुकरा दिया, और अपनी जिद पर अड़े रहे। उनके दिलों पर मुहर लग चुकी है और वे अपने बुरे रास्ते पर डटे हुए हैं। यह आयत उन लोगों के बारे में है जिनके लिए अल्लाह के इल्म में पहले से यह लिखा जा चुका है कि वे ईमान नहीं लाएँगे, क्योंकि उन्होंने सत्य का रास्ता छोड़कर गुमराही को अपना लिया है।
फ़ायदे (लाभ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि हिदायत देना और लोगों को सचेत करना नबी (ﷺ) और उनके उत्तराधिकारियों का काम है, लेकिन दिलों को बदलना और हिदायत देना केवल अल्लाह के हाथ में है। इसलिए हमें अपना फ़र्ज़ निभाते रहना चाहिए, भले ही लोग ईमान न लाएँ।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि जब इंसान सत्य को जानने के बाद भी उसे ठुकरा देता है और हठ पर अड़ जाता है, तो उसका दिल सख्त हो जाता है और वह हिदायत से महरूम हो जाता है। इसलिए हमें अपने दिलों को नरम रखना चाहिए और सत्य को कबूल करने में देर नहीं करनी चाहिए।
- इस आयत से हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है, और उसकी इच्छा के बिना कोई ईमान नहीं ला सकता। लेकिन यह हमें आलसी नहीं बनाता, बल्कि हमें अपनी कोशिश जारी रखने की तरग़ीब देता है, क्योंकि हमें यह नहीं पता कि कौन सच्चे दिल से तौबा करके ईमान ले आएगा।
- यह आयत हमें अल्लाह के दीन की सच्चाई पर भरोसा दिलाती है, क्योंकि अल्लाह ने अपने रसूल (ﷺ) को पहले ही बता दिया था कि कुछ लोग ईमान नहीं लाएँगे, और ऐसा ही हुआ। यह कुरआन के अल्लाही होने की एक और निशानी है।
📜 आयत 4-8 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 6
सूरा अल-बकरा आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख़तेयार किया उनके लिए बराबर…सूरा आयत 6/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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