अल-बकरा · 7/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
خَتَمَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَعَلَىٰ سَمْعِهِمْ ۖ وَعَلَىٰ أَبْصَارِهِمْ غِشَاوَةٌ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ ۝٧
Khatamal laahu `alaa quloobihim wa `alaa sam`i-him wa `alaaa absaarihim ghishaa watunw wa lahum `azaabun `azeem
📖 हिंदी अर्थ
उनके दिलों पर और उनके कानों पर (नज़र करके) खुदा ने तसदीक़ कर दी है (कि ये ईमान न लाएँगे) और उनकी ऑंखों पर परदा (पड़ा हुआ) है और उन्हीं के लिए (बहुत) बड़ा अज़ाब है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَتَمَ (ख़तमा): मुहर लगा दी, बंद कर दिया
  • قُلُوبِهِمْ (कुलूबिहिम): उनके दिल
  • سَمْعِهِمْ (सम्इहिम): उनकी सुनने की शक्ति
  • أَبْصَارِهِمْ (अब्सारिहिम): उनकी आँखें
  • غِشَاوَةٌ (ग़िशावतुन): पर्दा, ढक्कन
  • عَذَابٌ عَظِيمٌ (अज़ाबुन अज़ीम): बहुत बड़ा दर्दनाक अज़ाब

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) के दिलों पर मुहर लगा दी है, यानी उनके दिल बंद कर दिए गए हैं। वे किसी भी अच्छी बात को समझने की क्षमता खो चुके हैं। उनकी सुनने की शक्ति पर भी मुहर लग गई है, इसलिए वे सच्चाई को सुनकर भी उसे क़बूल नहीं करते और न ही उससे लाभ उठाते हैं। उनकी आँखों पर पर्दा डाल दिया गया है, जिससे वे सच्चाई को साफ़ देखकर भी नहीं देख पाते। यह सब उनके अपने कुफ़्र और हठधर्मिता का नतीजा है, क्योंकि सच्चाई उनके सामने स्पष्ट हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर उसे ठुकरा दिया। इसलिए अल्लाह ने उन्हें हिदायत की तौफ़ीक़ से महरूम कर दिया। आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब तैयार है, जो जहन्नम की आग में होगा।


दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि अल्लाह की रहमत और हिदायत का दरवाज़ा हमेशा खुला रहता है, जब तक इंसान खुद उसे ठुकरा न दे। जो लोग सच्चाई को जानकर भी उसका विरोध करते हैं और हठधर्मी पर अड़े रहते हैं, वे खुद अपने लिए अल्लाह की रहमत के दरवाज़े बंद कर लेते हैं। लेकिन जो भी सच्चे दिल से अल्लाह की ओर लौटता है, तौबा करता है और हिदायत की तलाश करता है, अल्लाह उसके दिल की मुहर हटा देता है और उसे रोशनी देता है। यह आयत हमें बताती है कि हमें अपने दिलों को साफ़ रखना चाहिए, सच्चाई को सुनने और देखने के लिए तैयार रहना चाहिए, और अल्लाह की हिदायत को कभी ठुकराना नहीं चाहिए। अल्लाह की रहमत असीम है, और वह हर उस बंदे को प्यार करता है जो उसकी ओर रुजू करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — अल-बकरा

5أُولَٰئِكَ عَلَىٰ هُدًى مِّن رَّبِّهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
यही लोग अपने परवरदिगार की हिदायत पर (आमिल) हैं और यही लोग अपनी दिली मुरादें पाएँगे
6إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا سَوَاءٌ عَلَيْهِمْ أَأَنذَرْتَهُمْ أَمْ لَمْ تُنذِرْهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख़तेयार किया उनके लिए बराबर है (ऐ रसूल) ख्वाह (चाहे) तुम उन्हें डराओ या न डराओ वह ईमान न लाएँगे
7خَتَمَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَعَلَىٰ سَمْعِهِمْ ۖ وَعَلَىٰ أَبْصَارِهِمْ غِشَاوَةٌ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
उनके दिलों पर और उनके कानों पर (नज़र करके) खुदा ने तसदीक़ कर दी है (कि ये ईमान न लाएँगे) और उनकी ऑंखों पर परदा (पड़ा हुआ) है और उन्हीं के लिए (बहुत) बड़ा अज़ाब है
8وَمِنَ النَّاسِ مَن يَقُولُ آمَنَّا بِاللَّهِ وَبِالْيَوْمِ الْآخِرِ وَمَا هُم بِمُؤْمِنِينَ
और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो (ज़बान से तो) कहते हैं कि हम खुदा पर और क़यामत पर ईमान लाए हालाँकि वह दिल से ईमान नहीं लाए
9يُخَادِعُونَ اللَّهَ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَمَا يَخْدَعُونَ إِلَّا أَنفُسَهُمْ وَمَا يَشْعُرُونَ
खुदा को और उन लोगों को जो ईमान लाए धोखा देते हैं हालाँकि वह अपने आपको धोखा देते हैं और कुछ शऊर नहीं रखते हैं
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अनुवाद — अल-बकरा 7

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Tuesday, August 18, 2026

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