अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَتَمَ (ख़तमा): मुहर लगा दी, बंद कर दिया
- قُلُوبِهِمْ (कुलूबिहिम): उनके दिल
- سَمْعِهِمْ (सम्इहिम): उनकी सुनने की शक्ति
- أَبْصَارِهِمْ (अब्सारिहिम): उनकी आँखें
- غِشَاوَةٌ (ग़िशावतुन): पर्दा, ढक्कन
- عَذَابٌ عَظِيمٌ (अज़ाबुन अज़ीम): बहुत बड़ा दर्दनाक अज़ाब
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) के दिलों पर मुहर लगा दी है, यानी उनके दिल बंद कर दिए गए हैं। वे किसी भी अच्छी बात को समझने की क्षमता खो चुके हैं। उनकी सुनने की शक्ति पर भी मुहर लग गई है, इसलिए वे सच्चाई को सुनकर भी उसे क़बूल नहीं करते और न ही उससे लाभ उठाते हैं। उनकी आँखों पर पर्दा डाल दिया गया है, जिससे वे सच्चाई को साफ़ देखकर भी नहीं देख पाते। यह सब उनके अपने कुफ़्र और हठधर्मिता का नतीजा है, क्योंकि सच्चाई उनके सामने स्पष्ट हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर उसे ठुकरा दिया। इसलिए अल्लाह ने उन्हें हिदायत की तौफ़ीक़ से महरूम कर दिया। आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब तैयार है, जो जहन्नम की आग में होगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि अल्लाह की रहमत और हिदायत का दरवाज़ा हमेशा खुला रहता है, जब तक इंसान खुद उसे ठुकरा न दे। जो लोग सच्चाई को जानकर भी उसका विरोध करते हैं और हठधर्मी पर अड़े रहते हैं, वे खुद अपने लिए अल्लाह की रहमत के दरवाज़े बंद कर लेते हैं। लेकिन जो भी सच्चे दिल से अल्लाह की ओर लौटता है, तौबा करता है और हिदायत की तलाश करता है, अल्लाह उसके दिल की मुहर हटा देता है और उसे रोशनी देता है। यह आयत हमें बताती है कि हमें अपने दिलों को साफ़ रखना चाहिए, सच्चाई को सुनने और देखने के लिए तैयार रहना चाहिए, और अल्लाह की हिदायत को कभी ठुकराना नहीं चाहिए। अल्लाह की रहमत असीम है, और वह हर उस बंदे को प्यार करता है जो उसकी ओर रुजू करता है।
📜 आयत 5-9 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 7
सूरा अल-बकरा आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनके दिलों पर और उनके कानों पर (नज़र करके) खुदा…सूरा आयत 7/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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