अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آمَنُوا: ईमान लाए, सच्चे दिल से विश्वास किया।
- الصَّالِحَاتِ: अच्छे कर्म, वे कार्य जो अल्लाह की शरीअत के अनुकूल हों।
- أَصْحَابُ الْجَنَّةِ: जन्नत वाले, जन्नत में रहने वाले।
- خَالِدُونَ: हमेशा रहने वाले, अमर रहने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का सुखद अंजाम बयान कर रहे हैं जो ईमान लाते हैं और नेक कर्म करते हैं। ईमान से मुराद अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) पर सच्चे दिल से विश्वास करना है, और साथ ही उन सभी बातों को मानना है जो अल्लाह ने अपने रसूलों के माध्यम से उतारी हैं। यह ईमान सिर्फ ज़ुबानी नहीं होना चाहिए, बल्कि दिल की गहराई से होना चाहिए, जो अच्छे कर्मों में प्रकट हो।
"नेक कर्म" (الصالحات) से मुराद वे सभी अच्छे कार्य हैं जो अल्लाह की शरीअत (क़ुरआन और सुन्नत) के अनुसार हों—जैसे नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज, सच्चाई, अमानतदारी, माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार, लोगों की मदद करना, और हर वह काम जो अल्लाह की रज़ा के लिए किया जाए। यहाँ "नेक कर्म" का ज़िक्र ईमान के साथ किया गया है, क्योंकि ईमान के बिना अच्छे कर्म अल्लाह के यहाँ स्वीकार नहीं होते, और ईमान के साथ अच्छे कर्म ही सच्चे ईमान की निशानी हैं।
ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने जन्नत का वादा किया है—वे जन्नत के "अस्हाब" (साथी) होंगे, यानी वे जन्नत में हमेशा रहेंगे। "ख़ुलूद" (हमेशा रहना) का मतलब है कि उनका ठिकाना जन्नत में स्थायी होगा, वहाँ से उन्हें कभी निकाला नहीं जाएगा, न ही वहाँ की नेमतें खत्म होंगी। यह अल्लाह का सच्चा वादा है, जो कभी टूटने वाला नहीं।
यह आयत पिछली आयत (जिसमें काफ़िरों का अंजाम बताया गया था) के बाद आई है, ताकि लोगों को डर और उम्मीद दोनों दिखाई जाएँ—डर अल्लाह के अज़ाब से, और उम्मीद उसकी रहमत से। इससे पता चलता है कि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा व्यापक है, और वह अपने ईमानदार बंदों को कभी निराश नहीं करता।
फ़ायदे (सबक):
- ईमान और अमल का ताल्लुक़: इस आयत से सीख मिलती है कि सिर्फ ईमान का दावा काफी नहीं है, बल्कि ईमान को अच्छे कर्मों से साबित करना ज़रूरी है। जिसका ईमान सच्चा होगा, उसके कर्म भी अच्छे होंगे।
- अल्लाह का वादा सच्चा है: अल्लाह ने जन्नत का जो वादा किया है, वह अटल है। इससे मोमिन के दिल में उम्मीद और सुकून पैदा होता है।
- जन्नत की हमेशा की ज़िंदगी: यह आयत हमें बताती है कि जन्नत की नेमतें खत्म नहीं होतीं, और वहाँ की ज़िंदगी हमेशा के लिए है। यह सोच इंसान को दुनिया की फ़ानी चीज़ों से बेनियाज़ कर देती है।
- अल्लाह की रहमत की खुशखबरी: यह आयत उन लोगों के लिए खुशखबरी है जो ईमान लाने के बाद नेक कर्म करते हैं—चाहे उनसे कुछ गलतियाँ भी हुई हों, अल्लाह की रहमत उन्हें घेर लेती है।
- अमल की नीयत: नेक कर्म वही हैं जो अल्लाह की शरीअत के अनुसार हों और सिर्फ उसी की रज़ा के लिए किए जाएँ। इससे इंसान को अपने हर काम को सही करने की तरफ रहनुमाई मिलती है।
📜 आयत 80-84 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 82
सूरा आयत 82/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 80–84. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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