अल-बकरा · 82/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ  ۝٨٢
Wallazeena aamanoo wa `amilus saalihaati ulaaa`ika Ashaabul Jannati hum feeha khaalidoon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग ईमानदार हैं और उन्होंने अच्छे काम किए हैं वही लोग जन्नती हैं कि हमेशा जन्नत में रहेंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آمَنُوا: ईमान लाए, सच्चे दिल से विश्वास किया।
  • الصَّالِحَاتِ: अच्छे कर्म, वे कार्य जो अल्लाह की शरीअत के अनुकूल हों।
  • أَصْحَابُ الْجَنَّةِ: जन्नत वाले, जन्नत में रहने वाले।
  • خَالِدُونَ: हमेशा रहने वाले, अमर रहने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का सुखद अंजाम बयान कर रहे हैं जो ईमान लाते हैं और नेक कर्म करते हैं। ईमान से मुराद अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) पर सच्चे दिल से विश्वास करना है, और साथ ही उन सभी बातों को मानना है जो अल्लाह ने अपने रसूलों के माध्यम से उतारी हैं। यह ईमान सिर्फ ज़ुबानी नहीं होना चाहिए, बल्कि दिल की गहराई से होना चाहिए, जो अच्छे कर्मों में प्रकट हो।

"नेक कर्म" (الصالحات) से मुराद वे सभी अच्छे कार्य हैं जो अल्लाह की शरीअत (क़ुरआन और सुन्नत) के अनुसार हों—जैसे नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज, सच्चाई, अमानतदारी, माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार, लोगों की मदद करना, और हर वह काम जो अल्लाह की रज़ा के लिए किया जाए। यहाँ "नेक कर्म" का ज़िक्र ईमान के साथ किया गया है, क्योंकि ईमान के बिना अच्छे कर्म अल्लाह के यहाँ स्वीकार नहीं होते, और ईमान के साथ अच्छे कर्म ही सच्चे ईमान की निशानी हैं।

ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने जन्नत का वादा किया है—वे जन्नत के "अस्हाब" (साथी) होंगे, यानी वे जन्नत में हमेशा रहेंगे। "ख़ुलूद" (हमेशा रहना) का मतलब है कि उनका ठिकाना जन्नत में स्थायी होगा, वहाँ से उन्हें कभी निकाला नहीं जाएगा, न ही वहाँ की नेमतें खत्म होंगी। यह अल्लाह का सच्चा वादा है, जो कभी टूटने वाला नहीं।

यह आयत पिछली आयत (जिसमें काफ़िरों का अंजाम बताया गया था) के बाद आई है, ताकि लोगों को डर और उम्मीद दोनों दिखाई जाएँ—डर अल्लाह के अज़ाब से, और उम्मीद उसकी रहमत से। इससे पता चलता है कि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा व्यापक है, और वह अपने ईमानदार बंदों को कभी निराश नहीं करता।

फ़ायदे (सबक):

  1. ईमान और अमल का ताल्लुक़: इस आयत से सीख मिलती है कि सिर्फ ईमान का दावा काफी नहीं है, बल्कि ईमान को अच्छे कर्मों से साबित करना ज़रूरी है। जिसका ईमान सच्चा होगा, उसके कर्म भी अच्छे होंगे।
  2. अल्लाह का वादा सच्चा है: अल्लाह ने जन्नत का जो वादा किया है, वह अटल है। इससे मोमिन के दिल में उम्मीद और सुकून पैदा होता है।
  3. जन्नत की हमेशा की ज़िंदगी: यह आयत हमें बताती है कि जन्नत की नेमतें खत्म नहीं होतीं, और वहाँ की ज़िंदगी हमेशा के लिए है। यह सोच इंसान को दुनिया की फ़ानी चीज़ों से बेनियाज़ कर देती है।
  4. अल्लाह की रहमत की खुशखबरी: यह आयत उन लोगों के लिए खुशखबरी है जो ईमान लाने के बाद नेक कर्म करते हैं—चाहे उनसे कुछ गलतियाँ भी हुई हों, अल्लाह की रहमत उन्हें घेर लेती है।
  5. अमल की नीयत: नेक कर्म वही हैं जो अल्लाह की शरीअत के अनुसार हों और सिर्फ उसी की रज़ा के लिए किए जाएँ। इससे इंसान को अपने हर काम को सही करने की तरफ रहनुमाई मिलती है।
🎧 सुनें

📜 आयत 80-84 — अल-बकरा

80وَقَالُواْ لَن تَمَسَّنَا ٱلنَّارُ إِلَّآ أَيَّامًا مَّعۡدُودَةًۚ قُلۡ أَتَّخَذۡتُمۡ عِندَ ٱللَّهِ عَهۡدًا فَلَن يُخۡلِفَ ٱللَّهُ عَهۡدَهُۥٓۖ أَمۡ تَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ 
और कहते हैं कि गिनती के चन्द दिनों के सिवा हमें आग छुएगी भी तो नहीं (ऐ रसूल) इन लोगों से कहो कि क्या तुमने खुदा से कोई इक़रार ले लिया है कि फिर वह किसी तरह अपने इक़रार के ख़िलाफ़ हरगिज़ न करेगा या बे समझे बूझे खुदा पर बोहताव जोड़ते हो
81بَلَىٰۚ مَن كَسَبَ سَيِّئَةً وَأَحَٰطَتۡ بِهِۦ خَطِيٓـَٔتُهُۥ فَأُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ 
हाँ (सच तो यह है) कि जिसने बुराई हासिल की और उसके गुनाहों ने चारों तरफ से उसे घेर लिया है वही लोग तो दोज़ख़ी हैं और वही (तो) उसमें हमेशा रहेंगे
82وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ 
और जो लोग ईमानदार हैं और उन्होंने अच्छे काम किए हैं वही लोग जन्नती हैं कि हमेशा जन्नत में रहेंगे
83وَإِذۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ لَا تَعۡبُدُونَ إِلَّا ٱللَّهَ وَبِٱلۡوَٰلِدَيۡنِ إِحۡسَانًا وَذِي ٱلۡقُرۡبَىٰ وَٱلۡيَتَٰمَىٰ وَٱلۡمَسَٰكِينِ وَقُولُواْ لِلنَّاسِ حُسۡنًا وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ ثُمَّ تَوَلَّيۡتُمۡ إِلَّا قَلِيلًا مِّنكُمۡ وَأَنتُم مُّعۡرِضُونَ 
और (वह वक्त याद करो) जब हमने बनी ईसराइल से (जो तुम्हारे बुर्जुग़ थे) अहद व पैमान लिया था कि खुदा के सिवा किसी की इबादत न करना और माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों के साथ अच्छे सुलूक करना और लोगों के साथ अच्छी तरह (नरमी) से बातें करना और बराबर नमाज़ पढ़ना और ज़कात देना फिर तुममें से थोड़े आदिमियों के सिवा (सब के सब) फिर गए और तुम लोग हो ही इक़रार से मुँह फेरने वाले
84وَإِذۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَكُمۡ لَا تَسۡفِكُونَ دِمَآءَكُمۡ وَلَا تُخۡرِجُونَ أَنفُسَكُم مِّن دِيَٰرِكُمۡ ثُمَّ أَقۡرَرۡتُمۡ وَأَنتُمۡ تَشۡهَدُونَ 
और (वह वक्त याद करो) जब हमने तुम (तुम्हारे बुर्ज़ुगों) से अहद लिया था कि आपस में खूरेज़ियाँ न करना और न अपने लोगों को शहर बदर करना तो तुम (तुम्हारे बुर्जुग़ों) ने इक़रार किया था और तुम भी उसकी गवाही देते हो
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
82आयत

अनुवाद — अल-बकरा 82

सूरा आयत 82/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 80–84. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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