हाँ (सच तो यह है) कि जिसने बुराई हासिल की और उसके गुनाहों ने चारों तरफ से उसे घेर लिया है वही लोग तो दोज़ख़ी हैं और वही (तो) उसमें हमेशा रहेंगे
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
कَسَبَ سَيِّئَةً: अर्थात उसने बुराई अर्जित की, और यहाँ इससे आशय शिर्क (बड़ा पाप) है।
أَحَاطَتْ بِهِ خَطِيئَتُهُ: अर्थात उसकी गलती ने उसे चारों ओर से घेर लिया, यानी वह पाप उस पर पूरी तरह हावी हो गया और वह उसी पर मरा।
أَصْحَابُ النَّارِ: आग (नरक) के साथी, यानी उसमें रहने वाले।
خَالِدُونَ: हमेशा के लिए रहने वाले।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के झूठे दावे का उत्तर देती है जो कहते थे कि हमें आग छू भी नहीं सकती, या हमारी सजा कुछ दिनों तक ही सीमित रहेगी। अल्लाह तआला फ़रमाता है: हाँ, बात वैसी नहीं है जैसा तुम सोचते हो। जिसने भी बुराई कमाई और उसकी गलती ने उसे चारों ओर से घेर लिया—यानी उसका पाप इतना बढ़ गया कि उसने शिर्क किया और उसी हालत में उसकी मौत हुई—तो ऐसे लोग ही नरक के निवासी हैं, और वे उसमें हमेशा रहेंगे। यहाँ "सैय्यिया" (बुराई) से आशय शिर्क है, क्योंकि छोटे पापों पर अगर इंसान तौबा कर ले तो अल्लाह माफ़ कर देता है, लेकिन शिर्क की हालत में मरना ऐसा पाप है जो सारे अच्छे कामों को बर्बाद कर देता है और इंसान को हमेशा के लिए नरक में डाल देता है।
फ़ायदे (सीख):
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का फैसला बिल्कुल न्यायपूर्ण है—जो शिर्क पर मरा, उसे हमेशा की सज़ा मिलेगी, और जो तौबा करके मरा, उसके लिए माफ़ी है। यह अल्लाह की रहमत और अद्ल दोनों को दिखाता है।
इससे हमें यह चेतावनी मिलती है कि छोटे पापों को हल्का न समझें, क्योंकि बार-बार पाप करने से इंसान का दिल कठोर हो जाता है और वह बड़े पाप (शिर्क) तक पहुँच सकता है।
यह आयत हमें तौबा की जल्दी करने की तरगीब देती है—जब तक ज़िंदगी बाकी है, अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है, और जो सच्चे दिल से लौट आए, उसके लिए जन्नत है।
इससे मुसलमान को यह खुशखबरी मिलती है कि अल्लाह ने अपने रसूल के ज़रिए हमें शिर्क से बचने का रास्ता सिखाया है, और हमें हर पल उसकी इबादत और उसकी याद में जीने की तौफ़ीक़ दी है—यही सबसे बड़ी नेमत है।
पस वाए हो उन लोगों पर जो अपने हाथ से किताब लिखते हैं फिर (लोगों से कहते फिरते) हैं कि ये खुदा के यहाँ से (आई) है ताकि उसके ज़रिये से थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी फ़ायदा) हासिल करें पस अफसोस है उन पर कि उनके हाथों ने लिखा और फिर अफसोस है उनपर कि वह ऐसी कमाई करते हैं
और कहते हैं कि गिनती के चन्द दिनों के सिवा हमें आग छुएगी भी तो नहीं (ऐ रसूल) इन लोगों से कहो कि क्या तुमने खुदा से कोई इक़रार ले लिया है कि फिर वह किसी तरह अपने इक़रार के ख़िलाफ़ हरगिज़ न करेगा या बे समझे बूझे खुदा पर बोहताव जोड़ते हो
और (वह वक्त याद करो) जब हमने बनी ईसराइल से (जो तुम्हारे बुर्जुग़ थे) अहद व पैमान लिया था कि खुदा के सिवा किसी की इबादत न करना और माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों के साथ अच्छे सुलूक करना और लोगों के साथ अच्छी तरह (नरमी) से बातें करना और बराबर नमाज़ पढ़ना और ज़कात देना फिर तुममें से थोड़े आदिमियों के सिवा (सब के सब) फिर गए और तुम लोग हो ही इक़रार से मुँह फेरने वाले
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