Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَفْقَهُوا: वे समझें, वे मेरी बात को अच्छी तरह से समझ लें।
- قَوْلِي: मेरी बात, मेरा कथन।
विस्तृत व्याख्या:
यह आयत हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की उस प्रार्थना का एक अंश है जो उन्होंने अल्लाह तआला से की थी जब उन्हें फ़िरऔन के पास जाकर उसे ईमान की दावत देने का आदेश मिला। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण था, क्योंकि फ़िरऔन अत्याचारी और घमंडी शासक था, और मूसा (अलैहिस्सलाम) को उसके सामने सच्चाई पेश करनी थी।
इस आयत में मूसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह से दुआ करते हैं कि "वे मेरी बात को समझें"। यह दुआ उन्होंने अपनी ज़बान की रुकावट (हकलाने) की वजह से की थी, क्योंकि वे चाहते थे कि उनका संदेश स्पष्ट और प्रभावी हो, ताकि लोग उसे अच्छी तरह से समझ सकें। उन्होंने पहले कहा था: "मेरे रब! मेरा सीना खोल दे, मेरा काम आसान कर दे, और मेरी ज़बान की ग्रंथि खोल दे" — और इसी सिलसिले में यह अर्ज़ की कि लोग मेरी बात को भली-भाँति समझ सकें।
यह दुआ हमें सिखाती है कि दावत और संदेश पहुँचाने में स्पष्टता और प्रभावशीलता कितनी महत्वपूर्ण है। एक इंसान चाहे कितना भी सच्चा और सही हो, अगर वह अपनी बात को स्पष्ट रूप से और समझदारी से पेश नहीं कर सकता, तो उसका असर कम हो जाता है। इसलिए हमें भी चाहिए कि हम अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें अच्छी तरह से बात समझाने की क्षमता दे, और हमारी ज़ुबान को स्पष्ट और प्रभावी बनाए।
इस आयत में एक और बहुत प्यारी बात यह है कि मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी कमज़ोरी को अल्लाह के सामने रखा और उससे मदद माँगी। यह हमें सिखाता है कि हमें अपनी कमियों पर शर्मिंदा नहीं होना चाहिए, बल्कि अल्लाह से उन्हें दूर करने की प्रार्थना करनी चाहिए। अल्लाह तआला अपने बंदे की दुआ सुनता है और उसे सहारा देता है, जैसा कि उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) को दिया और उनकी ज़ुबान की रुकावट को दूर कर दिया।
यह दुआ हमें यह भी सिखाती है कि जब हम किसी को अच्छी बात समझाना चाहते हैं — चाहे वह ईमान की दावत हो, या कोई अच्छी बात — तो हमें अल्लाह से मदद माँगनी चाहिए और अपनी बात को साफ़ और सरल तरीके से पेश करनी चाहिए। इससे हमारी बात दिलों में असर करती है और लोग उसे समझ पाते हैं।
अल्लाह तआला हम सबको यह तौफ़ीक़ दे कि हम अपनी बातों को स्पष्टता, हिकमत और नरमी से पेश करें, और दूसरों तक सच्चाई और भलाई का पैग़ाम पहुँचाएँ। आमीन।
📜 आयत 26-30 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 28
सूरा ताहा आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि लोग मेरी बात अच्छी तरह समझें औरसूरा आयत 28/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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