ताहा · 27/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِّن لِّسَانِي ۝٢٧
Wahlul `uqdatam milli saanee
📖 हिंदी अर्थ
और दिलेर बना और मेरा काम मेरे लिए आसान कर दे और मेरी ज़बान से लुक़नत की गिरह खोल दे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَاحْلُلْ: खोल दें, दूर कर दें
  • عُقْدَةً: गाँठ, जकड़न
  • مِن لِّسَانِي: मेरी ज़ुबान से

तफ़सीर:

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से एक और ख़ास दुआ की — "और मेरी ज़ुबान की गाँठ खोल दे।" यह वही दुआ है जो उन्होंने फ़िरऔन के पास जाने से पहले की थी। उनकी ज़ुबान में हकलाहट या बोलने में कुछ रुकावट थी, जिसकी वजह से वे अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं कह पाते थे। उन्होंने अल्लाह से यह प्रार्थना की कि वह उनकी ज़ुबान की इस जकड़न को दूर कर दे, ताकि वे अपनी दावत और पैग़ाम को बड़ी स्पष्टता और प्रभावशीलता के साथ लोगों तक पहुँचा सकें।

यह दुआ हमें सिखाती है कि अल्लाह के दीन की तब्लीग़ (प्रचार) के लिए साफ़ और स्पष्ट बयान कितना ज़रूरी है। जब इंसान का दिल साफ़ होता है और उसकी नीयत ख़ालिस होती है, तो अल्लाह उसकी ज़ुबान में भी असर और वज़ाहत पैदा कर देता है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने यह दुआ सिर्फ़ अपनी सुविधा के लिए नहीं की, बल्कि इसलिए की ताकि अल्लाह का पैग़ाम लोगों तक पूरी तरह पहुँच सके और वे उसे समझ सकें।

यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है — हमें भी अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें अच्छा बोलने की तौफ़ीक़ दे, साफ़ और प्रभावशाली अंदाज़ में अपनी बात रखने की क़ुदरत दे, ताकि हम अपने परिवार, समाज और दोस्तों तक इस्लाम की खूबसूरत तालीमात को बेहतर तरीक़े से पहुँचा सकें। अल्लाह के नबी की यह दुआ हमें याद दिलाती है कि दावत-ओ-तब्लीग़ में साफ़ बोलना, नरम लहजा और समझाने का अच्छा तरीक़ा अपनाना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि दिलों पर असर करने के लिए सिर्फ़ सच्चाई ही नहीं, बल्कि उसे पेश करने का हुनर भी चाहिए।

अल्लाह तआला हम सबको अपने दीन की खिदमत करने की तौफ़ीक़ दे और हमारी ज़ुबानों को हक़ और सच्चाई के लिए खोल दे। आमीन।



📜 आयत 25-29 — सूरा ताहा

25قَالَ رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي
मूसा ने अर्ज़ की परवरदिगार (मैं जाता तो हूँ)
26وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي
मगर तू मेरे लिए मेरे सीने को कुशादा फरमा
27وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِّن لِّسَانِي
और दिलेर बना और मेरा काम मेरे लिए आसान कर दे और मेरी ज़बान से लुक़नत की गिरह खोल दे
28يَفْقَهُوا قَوْلِي
ताकि लोग मेरी बात अच्छी तरह समझें और
29وَاجْعَل لِّي وَزِيرًا مِّنْ أَهْلِي
मेरे कीनेवालों में से मेरे भाई हारून
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — ताहा 27

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Friday, October 2, 2026

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