अल-हज · 3/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
وَمِنَ النَّاسِ مَن يُجَادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَيَتَّبِعُ كُلَّ شَيْطَانٍ مَّرِيدٍ ۝٣
Wa minan naasi mai yujaadilu fil laahi bighairi `ilminw wa yattabi`u kullaa shaitaanim mareed
📖 हिंदी अर्थ
और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बग़ैर जाने खुदा के बारे में (ख्वाह म ख्वाह) झगड़ते हैं और हर सरकश शैतान के पीछे हो लेते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

कठिन शब्दों के अर्थ:

  • يُجَادِلُ: झगड़ता है, विवाद करता है
  • مَرِيدٍ: सरकश, हद से गुज़रा हुआ, जो अल्लाह की आज्ञा का उल्लंघन करने में जिद्दी हो

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जो ज्ञान और दलील के बिना अल्लाह के बारे में झगड़ते हैं। ये लोग अल्लाह की क़ुदरत पर शक करते हैं, ख़ासकर मौत के बाद दोबारा जीवित किए जाने (हश्र) के मामले में। वे बिना किसी इल्म और सबूत के, सिर्फ़ अपनी जहालत और हठधर्मी की वजह से अल्लाह के दीन में विवाद पैदा करते हैं।

ये लोग अपनी इस जिद्दो-जहद में हर उस शैतान की पैरवी करते हैं जो अल्लाह की रहमत से दूर हो चुका है और अपनी सरकशी में हद से गुज़र गया है। यानी वे अंधी पैरवी करते हैं — चाहे वो शैतान इंसानों में से हो या जिन्नात में से। ये शैतान उन्हें गुमराही की तरफ ले जाते हैं और उन्हें अल्लाह की क़ुदरत और उसके वादे पर शक करना सिखाते हैं।

यह आयत हमें एक बड़ा सबक देती है कि दीन के मामलों में बिना इल्म के बोलना और झगड़ना कितनी बड़ी गलती है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के बारे में, उसकी क़ुदरत के बारे में और उसके दीन के बारे में सिर्फ़ उसी ज्ञान से बात करे जो कुरआन और सुन्नत से मिलता है। अल्लाह तआला ने हमें अक्ल दी है और कुरआन भेजा है ताकि हम सही रास्ता पहचानें और शैतान की पैरवी से बचें।

इस आयत में एक चेतावनी भी है कि जो लोग जान-बूझकर अल्लाह के दीन में झगड़ा करते हैं और शैतानों की पैरवी करते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। लेकिन अल्लाह रहीम है — उसने हमें मौका दिया है कि हम अपनी गलतियों से तौबा करें, इल्म हासिल करें और सीधे रास्ते पर चलें। जो लोग अल्लाह की किताब और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत को पकड़ते हैं, अल्लाह उन्हें गुमराही से बचाता है और उन्हें सच्ची मंज़िल तक पहुँचाता है।

आओ हम सब इस आयत से सीख लें कि इल्म के बिना बात न करें, शैतानी ख्यालात से दूर रहें और अल्लाह की क़ुदरत पर पक्का यकीन रखें। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — अल-हज

1يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمْ ۚ إِنَّ زَلْزَلَةَ السَّاعَةِ شَيْءٌ عَظِيمٌ
ऐ लोगों अपने परवरदिगार से डरते रहो (क्योंकि) क़यामत का ज़लज़ला (कोई मामूली नहीं) एक बड़ी (सख्त) चीज़ है
2يَوْمَ تَرَوْنَهَا تَذْهَلُ كُلُّ مُرْضِعَةٍ عَمَّا أَرْضَعَتْ وَتَضَعُ كُلُّ ذَاتِ حَمْلٍ حَمْلَهَا وَتَرَى النَّاسَ سُكَارَىٰ وَمَا هُم بِسُكَارَىٰ وَلَٰكِنَّ عَذَابَ اللَّهِ شَدِيدٌ
जिस दिन तुम उसे देख लोगे तो हर दूध पिलाने वाली (डर के मारे) अपने दूध पीते (बच्चे) को भूल जायेगी और सारी हामला औरते अपने-अपने हमल (बेहिश्त से) गिरा देगी और (घबराहट में) लोग तुझे मतवाले मालूम होंगे हालाँकि वह मतवाले नहीं हैं बल्कि खुदा का अज़ाब बहुत सख्त है कि लोग बदहवास हो रहे हैं
3وَمِنَ النَّاسِ مَن يُجَادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَيَتَّبِعُ كُلَّ شَيْطَانٍ مَّرِيدٍ
और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बग़ैर जाने खुदा के बारे में (ख्वाह म ख्वाह) झगड़ते हैं और हर सरकश शैतान के पीछे हो लेते हैं
4كُتِبَ عَلَيْهِ أَنَّهُ مَن تَوَلَّاهُ فَأَنَّهُ يُضِلُّهُ وَيَهْدِيهِ إِلَىٰ عَذَابِ السَّعِيرِ
जिन (की पेशानी) के ऊपर (ख़ते तक़दीर से) लिखा जा चुका है कि जिसने उससे दोस्ती की हो तो ये यक़ीनन उसे गुमराह करके छोड़ेगा और दोज़ख़ के अज़ाब तक पहुँचा देगा
5يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِن كُنتُمْ فِي رَيْبٍ مِّنَ الْبَعْثِ فَإِنَّا خَلَقْنَاكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍ ثُمَّ مِن مُّضْغَةٍ مُّخَلَّقَةٍ وَغَيْرِ مُخَلَّقَةٍ لِّنُبَيِّنَ لَكُمْ ۚ وَنُقِرُّ فِي الْأَرْحَامِ مَا نَشَاءُ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ثُمَّ نُخْرِجُكُمْ طِفْلًا ثُمَّ لِتَبْلُغُوا أَشُدَّكُمْ ۖ وَمِنكُم مَّن يُتَوَفَّىٰ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰ أَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْلَا يَعْلَمَ مِن بَعْدِ عِلْمٍ شَيْئًا ۚ وَتَرَى الْأَرْضَ هَامِدَةً فَإِذَا أَنزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْ وَأَنبَتَتْ مِن كُلِّ زَوْجٍ بَهِيجٍ
लोगों अगर तुमको (मरने के बाद) दोबारा जी उठने में किसी तरह का शक है तो इसमें शक नहीं कि हमने तुम्हें शुरू-शुरू मिट्टी से उसके बाद नुत्फे से उसके बाद जमे हुए ख़ून से फिर उस लोथड़े से जो पूरा (सूडौल हो) या अधूरा हो पैदा किया ताकि तुम पर (अपनी कुदरत) ज़ाहिर करें (फिर तुम्हारा दोबारा ज़िन्दा) करना क्या मुश्किल है और हम औरतों के पेट में जिस (नुत्फे) को चाहते हैं एक मुद्दत मुअय्यन तक ठहरा रखते हैं फिर तुमको बच्चा बनाकर निकालते हैं फिर (तुम्हें पालते हैं) ताकि तुम अपनी जवानी को पहुँचो और तुममें से कुछ लोग तो ऐसे हैं जो (क़ब्ल बुढ़ापे के) मर जाते हैं और तुम में से कुछ लोग ऐसे हैं जो नाकारा ज़िन्दगी बुढ़ापे तक फेर लाए हैं जातें ताकि समझने के बाद सठिया के कुछ भी (ख़ाक) न समझ सके और तो ज़मीन को मुर्दा (बेकार उफ़तादा) देख रहा है फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने और उभरने लगती है और हर तरह की ख़ुशनुमा चीज़ें उगती है तो ये क़ुदरत के तमाशे इसलिए दिखाते हैं ताकि तुम जानो
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Tuesday, August 18, 2026

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