अल-हज · 4/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
كُتِبَ عَلَيْهِ أَنَّهُ مَن تَوَلَّاهُ فَأَنَّهُ يُضِلُّهُ وَيَهْدِيهِ إِلَىٰ عَذَابِ السَّعِيرِ ۝٤
Kutiba `alaihi annahoo man tawallaahu fa annahoo yudil lauhoo wa yahdeehi ilaa `azaabis sa`eer
📖 हिंदी अर्थ
जिन (की पेशानी) के ऊपर (ख़ते तक़दीर से) लिखा जा चुका है कि जिसने उससे दोस्ती की हो तो ये यक़ीनन उसे गुमराह करके छोड़ेगा और दोज़ख़ के अज़ाब तक पहुँचा देगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كُتِبَ عَلَيْهِ – उस पर लिख दिया गया, अर्थात अल्लाह का फैसला और तकदीर उसके बारे में पहले ही लिख दी गई।
  • مَن تَوَلَّاهُ – जो उसे (शैतान को) अपना संरक्षक, मित्र और अनुयायी बना ले।
  • يُضِلُّهُ – वह उसे सीधे रास्ते से भटका देगा।
  • عَذَابِ السَّعِيرِ – भड़कती हुई आग का अज़ाब (दंड)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत शैतान की उस स्थिति को बयान करती है जो अल्लाह ने पहले से तय कर रखी है। अल्लाह ने शैतान के बारे में यह फैसला सुना दिया है कि जो कोई भी उसका अनुसरण करेगा, उसे अपना मित्र और राहनुमा बनाएगा, तो शैतान उसे ज़रूर गुमराह करेगा। शैतान का स्वभाव ही है कि वह इंसान को सीधे रास्ते से हटाकर अंधकार की ओर ले जाता है। वह उसे अच्छे कामों से रोकता है, बुराइयों को सुंदर दिखाता है, और धीरे-धीरे उसे कुफ्र और गुनाहों की तरफ खींच ले जाता है। अंततः वह उसे उस भड़कती हुई आग (जहन्नम) की ओर ले जाता है, जो उसके पीछे चलने वालों का अंजाम है।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सच्चाई से आगाह करती है कि शैतान हमारा खुला दुश्मन है। वह कभी हमारा भला नहीं चाहता, बल्कि उसकी कोशिश यही होती है कि हमें अल्लाह की राह से भटकाकर जहन्नम की आग में झोंक दे। इसलिए हमें चाहिए कि हम शैतान के बहकावे से बचें, उसकी बातों पर न जाएँ, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसके प्यारे नबी ﷺ की सुन्नत पर चलाकर सुरक्षित करें। अल्लाह ने हमें अक्ल और समझ दी है, साथ ही कुरआन और सुन्नत की रोशनी भी दी है, ताकि हम शैतान के जाल में न फँसें। जो लोग अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़ लेते हैं, उन्हें शैतान कभी नुकसान नहीं पहुँचा सकता। याद रखिए, शैतान का वादा हमेशा झूठा होता है, जबकि अल्लाह का वादा सच्चा और हमेशा कायम रहने वाला है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की राह पर चलाएँ और शैतान की पैरवी से बचकर जन्नत की ओर बढ़ें।



📜 आयत 2-6 — अल-हज

2يَوْمَ تَرَوْنَهَا تَذْهَلُ كُلُّ مُرْضِعَةٍ عَمَّا أَرْضَعَتْ وَتَضَعُ كُلُّ ذَاتِ حَمْلٍ حَمْلَهَا وَتَرَى النَّاسَ سُكَارَىٰ وَمَا هُم بِسُكَارَىٰ وَلَٰكِنَّ عَذَابَ اللَّهِ شَدِيدٌ
जिस दिन तुम उसे देख लोगे तो हर दूध पिलाने वाली (डर के मारे) अपने दूध पीते (बच्चे) को भूल जायेगी और सारी हामला औरते अपने-अपने हमल (बेहिश्त से) गिरा देगी और (घबराहट में) लोग तुझे मतवाले मालूम होंगे हालाँकि वह मतवाले नहीं हैं बल्कि खुदा का अज़ाब बहुत सख्त है कि लोग बदहवास हो रहे हैं
3وَمِنَ النَّاسِ مَن يُجَادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَيَتَّبِعُ كُلَّ شَيْطَانٍ مَّرِيدٍ
और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बग़ैर जाने खुदा के बारे में (ख्वाह म ख्वाह) झगड़ते हैं और हर सरकश शैतान के पीछे हो लेते हैं
4كُتِبَ عَلَيْهِ أَنَّهُ مَن تَوَلَّاهُ فَأَنَّهُ يُضِلُّهُ وَيَهْدِيهِ إِلَىٰ عَذَابِ السَّعِيرِ
जिन (की पेशानी) के ऊपर (ख़ते तक़दीर से) लिखा जा चुका है कि जिसने उससे दोस्ती की हो तो ये यक़ीनन उसे गुमराह करके छोड़ेगा और दोज़ख़ के अज़ाब तक पहुँचा देगा
5يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِن كُنتُمْ فِي رَيْبٍ مِّنَ الْبَعْثِ فَإِنَّا خَلَقْنَاكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍ ثُمَّ مِن مُّضْغَةٍ مُّخَلَّقَةٍ وَغَيْرِ مُخَلَّقَةٍ لِّنُبَيِّنَ لَكُمْ ۚ وَنُقِرُّ فِي الْأَرْحَامِ مَا نَشَاءُ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ثُمَّ نُخْرِجُكُمْ طِفْلًا ثُمَّ لِتَبْلُغُوا أَشُدَّكُمْ ۖ وَمِنكُم مَّن يُتَوَفَّىٰ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰ أَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْلَا يَعْلَمَ مِن بَعْدِ عِلْمٍ شَيْئًا ۚ وَتَرَى الْأَرْضَ هَامِدَةً فَإِذَا أَنزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْ وَأَنبَتَتْ مِن كُلِّ زَوْجٍ بَهِيجٍ
लोगों अगर तुमको (मरने के बाद) दोबारा जी उठने में किसी तरह का शक है तो इसमें शक नहीं कि हमने तुम्हें शुरू-शुरू मिट्टी से उसके बाद नुत्फे से उसके बाद जमे हुए ख़ून से फिर उस लोथड़े से जो पूरा (सूडौल हो) या अधूरा हो पैदा किया ताकि तुम पर (अपनी कुदरत) ज़ाहिर करें (फिर तुम्हारा दोबारा ज़िन्दा) करना क्या मुश्किल है और हम औरतों के पेट में जिस (नुत्फे) को चाहते हैं एक मुद्दत मुअय्यन तक ठहरा रखते हैं फिर तुमको बच्चा बनाकर निकालते हैं फिर (तुम्हें पालते हैं) ताकि तुम अपनी जवानी को पहुँचो और तुममें से कुछ लोग तो ऐसे हैं जो (क़ब्ल बुढ़ापे के) मर जाते हैं और तुम में से कुछ लोग ऐसे हैं जो नाकारा ज़िन्दगी बुढ़ापे तक फेर लाए हैं जातें ताकि समझने के बाद सठिया के कुछ भी (ख़ाक) न समझ सके और तो ज़मीन को मुर्दा (बेकार उफ़तादा) देख रहा है फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने और उभरने लगती है और हर तरह की ख़ुशनुमा चीज़ें उगती है तो ये क़ुदरत के तमाशे इसलिए दिखाते हैं ताकि तुम जानो
6ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ هُوَ الْحَقُّ وَأَنَّهُ يُحْيِي الْمَوْتَىٰ وَأَنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
कि बेशक खुदा बरहक़ है और (ये भी कि) बेशक वही मुर्दों को जिलाता है और वह यक़ीनन हर चीज़ पर क़ादिर है
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अनुवाद — अल-हज 4

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Tuesday, August 18, 2026

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