अल-हज · 7/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
وَأَنَّ السَّاعَةَ آتِيَةٌ لَّا رَيْبَ فِيهَا وَأَنَّ اللَّهَ يَبْعَثُ مَن فِي الْقُبُورِ ۝٧
Wa annas Saa`ata aatiya tul laa raiba feeha wa annal laaha yab`asuman fil quboor
📖 हिंदी अर्थ
और क़यामत यक़ीनन आने वाली है इसमें कोई शक नहीं और बेशक जो लोग क़ब्रों में हैं उनको खुदा दोबारा ज़िन्दा करेगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • السَّاعَةَ – क़ियामत का दिन, वह समय जब सारा संसार समाप्त हो जाएगा।
  • آتِيَةٌ – आने वाली, निश्चित रूप से घटित होने वाली।
  • لَا رَيْبَ – कोई संदेह नहीं, कोई शक नहीं।
  • يَبْعَثُ – उठाना, जीवित करना, दोबारा ज़िंदा करना।
  • مَن فِي الْقُبُورِ – जो लोग क़ब्रों में हैं (अर्थात मृतक)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में दो महान सत्यों की ओर इशारा कर रहे हैं, जो ईमान की बुनियाद हैं:

पहला सत्य: क़ियामत (प्रलय) का दिन निश्चित रूप से आने वाला है। इसमें कोई संदेह नहीं। यह दिन अवश्य आएगा, चाहे लोग इसे दूर समझें या इसका इनकार करें। अल्लाह का वादा सत्य है और उसका वादा कभी टलता नहीं। यह दिन इसलिए आएगा ताकि दुनिया का हिसाब-किताब हो सके, नेकी और बदी का फल मिल सके, और अल्लाह की अदालत स्थापित हो।

दूसरा सत्य: अल्लाह तआला उन सभी लोगों को क़ब्रों से उठाएगा जो मर चुके हैं। यह पुनरुत्थान (हश्र) अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) से होगा। जिस तरह अल्लाह ने पहली बार इंसान को पैदा किया, उसी तरह वह उसे दोबारा ज़िंदा करने पर पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है। यह पुनरुत्थान इसलिए होगा ताकि हर इंसान को उसके अच्छे या बुरे कर्मों का पूरा बदला मिल सके।

यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि यह दुनिया ही सब कुछ नहीं है। मौत के बाद एक और ज़िंदगी है, जो हमेशा रहने वाली है। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके हुक्मों पर चलते हैं, वे उस दिन कामयाब होंगे। और जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं, वे अपने किए की सज़ा पाएँगे।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है जो इस दुनिया में मज़लूम है, जिसके साथ ज़ुल्म हुआ है, जिसे इंसाफ़ नहीं मिला। क़ियामत का दिन उसके लिए इंसाफ़ का दिन होगा। अल्लाह उस दिन हर ज़ालिम से मज़लूम का हक़ दिलाएगा। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी बेमक़सद नहीं है। हमें इस दुनिया में अच्छे कर्म करने चाहिए, दूसरों की मदद करनी चाहिए, और अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) के लिए जीना चाहिए। जो लोग अल्लाह पर ईमान रखते हैं और उसके रास्ते पर चलते हैं, उनके लिए उस दिन बड़ी कामयाबी और हमेशा की ख़ुशी है। अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसका फैसला बिल्कुल न्यायपूर्ण होगा।



📜 आयत 5-9 — अल-हज

5يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِن كُنتُمْ فِي رَيْبٍ مِّنَ الْبَعْثِ فَإِنَّا خَلَقْنَاكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍ ثُمَّ مِن مُّضْغَةٍ مُّخَلَّقَةٍ وَغَيْرِ مُخَلَّقَةٍ لِّنُبَيِّنَ لَكُمْ ۚ وَنُقِرُّ فِي الْأَرْحَامِ مَا نَشَاءُ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ثُمَّ نُخْرِجُكُمْ طِفْلًا ثُمَّ لِتَبْلُغُوا أَشُدَّكُمْ ۖ وَمِنكُم مَّن يُتَوَفَّىٰ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰ أَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْلَا يَعْلَمَ مِن بَعْدِ عِلْمٍ شَيْئًا ۚ وَتَرَى الْأَرْضَ هَامِدَةً فَإِذَا أَنزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْ وَأَنبَتَتْ مِن كُلِّ زَوْجٍ بَهِيجٍ
लोगों अगर तुमको (मरने के बाद) दोबारा जी उठने में किसी तरह का शक है तो इसमें शक नहीं कि हमने तुम्हें शुरू-शुरू मिट्टी से उसके बाद नुत्फे से उसके बाद जमे हुए ख़ून से फिर उस लोथड़े से जो पूरा (सूडौल हो) या अधूरा हो पैदा किया ताकि तुम पर (अपनी कुदरत) ज़ाहिर करें (फिर तुम्हारा दोबारा ज़िन्दा) करना क्या मुश्किल है और हम औरतों के पेट में जिस (नुत्फे) को चाहते हैं एक मुद्दत मुअय्यन तक ठहरा रखते हैं फिर तुमको बच्चा बनाकर निकालते हैं फिर (तुम्हें पालते हैं) ताकि तुम अपनी जवानी को पहुँचो और तुममें से कुछ लोग तो ऐसे हैं जो (क़ब्ल बुढ़ापे के) मर जाते हैं और तुम में से कुछ लोग ऐसे हैं जो नाकारा ज़िन्दगी बुढ़ापे तक फेर लाए हैं जातें ताकि समझने के बाद सठिया के कुछ भी (ख़ाक) न समझ सके और तो ज़मीन को मुर्दा (बेकार उफ़तादा) देख रहा है फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने और उभरने लगती है और हर तरह की ख़ुशनुमा चीज़ें उगती है तो ये क़ुदरत के तमाशे इसलिए दिखाते हैं ताकि तुम जानो
6ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ هُوَ الْحَقُّ وَأَنَّهُ يُحْيِي الْمَوْتَىٰ وَأَنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
कि बेशक खुदा बरहक़ है और (ये भी कि) बेशक वही मुर्दों को जिलाता है और वह यक़ीनन हर चीज़ पर क़ादिर है
7وَأَنَّ السَّاعَةَ آتِيَةٌ لَّا رَيْبَ فِيهَا وَأَنَّ اللَّهَ يَبْعَثُ مَن فِي الْقُبُورِ
और क़यामत यक़ीनन आने वाली है इसमें कोई शक नहीं और बेशक जो लोग क़ब्रों में हैं उनको खुदा दोबारा ज़िन्दा करेगा
8وَمِنَ النَّاسِ مَن يُجَادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَلَا هُدًى وَلَا كِتَابٍ مُّنِيرٍ
और लोगों में से कुछ ऐसे भी है जो बेजाने बूझे बे हिदायत पाए बगैर रौशन किताब के (जो उसे राह बताए) खुदा की आयतों से मुँह मोडे
9ثَانِيَ عِطْفِهِ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۖ لَهُ فِي الدُّنْيَا خِزْيٌ ۖ وَنُذِيقُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَذَابَ الْحَرِيقِ
(ख्वाहमख्वाह) खुदा के बारे में लड़ने मरने पर तैयार है ताकि (लोगों को) ख़ुदा की राह बहका दे ऐसे (नाबकार) के लिए दुनिया में (भी) रूसवाई है और क़यामत के दिन (भी) हम उसे जहन्नुम के अज़ाब (का मज़ा) चखाएँगे
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अनुवाद — अल-हज 7

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Tuesday, August 18, 2026

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