अन-नूर · 21/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ ۚ وَمَن يَتَّبِعْ خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ فَإِنَّهُ يَأْمُرُ بِالْفَحْشَاءِ وَالْمُنكَرِ ۚ وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ مَا زَكَىٰ مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ أَبَدًا وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يُزَكِّي مَن يَشَاءُ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ۝٢١
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa tattabi`oo khutuwaatish Shaitaan; wa many-yattabi` khutuwaatish Shaitaani fa innahoo yaamuru bilfahshaaa`i walmunkar; wa law laa fadlul laahi `alaikum wa rahmatuhoo maa zakaa minkum min ahadin abadanw wa laakinnal laaha yuzakkee many-yashaaa`; wallaahu Samee`un `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
(तो तुम देखते क्या होता) ऐ ईमानदारों शैतान के क़दम ब क़दम न चलो और जो शख्स शैतान के क़दम ब क़दम चलेगा तो वह यक़ीनन उसे बदकारी और बुरी बात (करने) का हुक्म देगा और अगर तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत न होती तो तुममें से कोई भी कभी पाक साफ न होता मगर ख़ुदा तो जिसे चहता है पाक साफ कर देता है और ख़ुदा बड़ा सुनने वाला वाकिफकार है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ: शैतान के कदमों के निशान, यानी उसके रास्ते और तरीके।
  • الْفَحْشَاءِ: बहुत बुरे काम, जैसे झूठ, चुगली, बदनामी और व्यभिचार।
  • الْمُنكَرِ: वह काम जिसे शरिया (इस्लामी कानून) और अक्ल बुरा कहे, और जिसे अल्लाह ने मना किया हो।
  • مَا زَكَى: पवित्र नहीं हुआ, गुनाहों से साफ नहीं हुआ।
  • يُزَكِّي: पवित्र करता है, गुनाहों से साफ करता है।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! अल्लाह तआला तुम्हें साफ़ हिदायत दे रहा है कि शैतान के निशानों पर न चलो, यानी उसके रास्ते और तरीकों को अपनाने से बचो। शैतान का तरीका यही है कि वह बुरे कामों को खूबसूरत दिखाकर इंसान को गुनाह की तरफ ले जाता है। जो शख्स शैतान के पीछे चलता है, उसे समझ लेना चाहिए कि शैतान उसे हमेशा बुरे कामों — जैसे झूठ, चुगली, बदनामी, व्यभिचार और हर उस काम की तरफ ले जाएगा जिसे अल्लाह ने मना किया है और जिसे अक्ल भी बुरा समझती है।

अल्लाह तआला फरमाता है: अगर अल्लाह का फज़ल (कृपा) और उसकी रहमत (दया) तुम पर न होती, तो तुममें से कोई भी कभी पवित्र न हो पाता — न अपने गुनाहों से तौबा कर पाता, न अपने दिल की गंदगी से साफ हो पाता। लेकिन अल्लाह अपनी रहमत से जिसे चाहता है, पवित्र कर देता है, उसकी तौबा कबूल करता है और उसे गुनाहों से निकालकर सीधे रास्ते पर लगा देता है। यह सब अल्लाह की मेहरबानी है, किसी की अपनी ताकत का कमाल नहीं।

याद रखो कि अल्लाह सब कुछ सुनता है — तुम्हारी जुबान से निकलने वाली हर बात को, और वह तुम्हारे दिलों के भेद और तुम्हारे इरादों को भी जानता है। तुम्हारे अंदर जो नीयत होती है, जो सोच होती है, और जो काम तुम करते हो — सब उसके इल्म में है, और वही उसका हिसाब लेगा।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान अपनी ताकत से खुद को पवित्र नहीं कर सकता, बल्कि यह अल्लाह की रहमत है जो उसे गुनाहों से बचाती है। इसलिए हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें शैतान के रास्तों से बचाए और हमें सीधी राह पर चलाए। जब भी दिल में बुरा ख्याल आए, तो समझ लें कि यह शैतान का इशारा है — और उससे अल्लाह की पनाह माँगें। अल्लाह अपने बंदों से बहुत प्यार करता है, और जो उसकी तरफ लौटता है, वह उसे साफ करके अपनी मुहब्बत से भर देता है। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अल्लाह की रहमत के साये में रहें और शैतान के धोखे से बचे रहें।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — अन-नूर

19إِنَّ الَّذِينَ يُحِبُّونَ أَن تَشِيعَ الْفَاحِشَةُ فِي الَّذِينَ آمَنُوا لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
जो लोग ये चाहते हैं कि ईमानदारों में बदकारी का चर्चा फैल जाए बेशक उनके लिए दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है और ख़ुदा (असल हाल को) ख़ूब जानता है और तुम लोग नहीं जानते हो
20وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ
और अगर ये बात न होती कि तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत से और ये कि ख़ुदा (अपने बन्दों पर) बड़ा शफीक़ मेहरबान है
21۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ ۚ وَمَن يَتَّبِعْ خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ فَإِنَّهُ يَأْمُرُ بِالْفَحْشَاءِ وَالْمُنكَرِ ۚ وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ مَا زَكَىٰ مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ أَبَدًا وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يُزَكِّي مَن يَشَاءُ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
(तो तुम देखते क्या होता) ऐ ईमानदारों शैतान के क़दम ब क़दम न चलो और जो शख्स शैतान के क़दम ब क़दम चलेगा तो वह यक़ीनन उसे बदकारी और बुरी बात (करने) का हुक्म देगा और अगर तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत न होती तो तुममें से कोई भी कभी पाक साफ न होता मगर ख़ुदा तो जिसे चहता है पाक साफ कर देता है और ख़ुदा बड़ा सुनने वाला वाकिफकार है
22وَلَا يَأْتَلِ أُولُو الْفَضْلِ مِنكُمْ وَالسَّعَةِ أَن يُؤْتُوا أُولِي الْقُرْبَىٰ وَالْمَسَاكِينَ وَالْمُهَاجِرِينَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۖ وَلْيَعْفُوا وَلْيَصْفَحُوا ۗ أَلَا تُحِبُّونَ أَن يَغْفِرَ اللَّهُ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और तुममें से जो लोग ज्यादा दौलत और मुक़द्दर वालें है क़राबतदारों और मोहताजों और ख़ुदा की राह में हिजरत करने वालों को कुछ देने (लेने) से क़सम न खा बैठें बल्कि उन्हें चाहिए कि (उनकी ख़ता) माफ कर दें और दरगुज़र करें क्या तुम ये नहीं चाहते हो कि ख़ुदा तुम्हारी ख़ता माफ करे और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
23إِنَّ الَّذِينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ الْغَافِلَاتِ الْمُؤْمِنَاتِ لُعِنُوا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
बेशक जो लोग पाक दामन बेख़बर और ईमानदार औरतों पर (ज़िना की) तोहमत लगाते हैं उन पर दुनिया और आख़िरत में (ख़ुदा की) लानत है और उन पर बड़ा (सख्त) अज़ाब होगा
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अनुवाद — अन-नूर 21

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Tuesday, August 18, 2026

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