Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَلَا يَأْتَلِ: और कसम न खाएँ
- أُولُو الْفَضْلِ: जिनके पास धर्म का सम्मान और बड़ाई हो
- وَالسَّعَةِ: और (माल की) कुशादगी और गुंजाइश रखने वाले
- أَن يُؤْتُوا: इस बात पर (कसम खाएँ) कि वे न देंगे
- وَلْيَعْفُوا: और उन्हें चाहिए कि माफ कर दें
- وَلْيَصْفَحُوا: और दरगुज़र करें (यानी साफ दिल से छोड़ दें)
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के लिए एक प्यारा और बहुत ही नसीहत भरा पैगाम लेकर आती है जिन्हें अल्लाह ने दीन की समझ, इज़्ज़त और माल की कुशादगी दी है। अल्लाह तआला फरमाता है कि जो लोग तुममें से फज़्ल (बड़ाई) और कुशादगी वाले हैं, वे इस बात की कसम न खाएँ कि वे अपने रिश्तेदारों, मिस्कीनों और अल्लाह की राह में हिजरत करने वालों को खर्च नहीं देंगे। यह आयत हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) के बारे में नाज़िल हुई, जब उन्होंने मिस्तह (जो उनके रिश्तेदार और मुहाजिर थे) पर नाराज़ होकर कसम खा ली कि वे उन्हें कभी खर्च नहीं देंगे, क्योंकि मिस्तह ने हज़रत आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) के खिलाफ इफ्क (झूठी तोहमत) की बात में हिस्सा लिया था।
अल्लाह तआला ने फरमाया: ऐ अबू बक्र! और ऐ सभी फज़्ल वालों! तुम कसम मत खाओ कि नेकी और सिला-रहमी छोड़ दोगे। बल्कि तुम्हें चाहिए कि माफ करो, दरगुज़र करो और उन्हें खर्च दो। फिर अल्लाह ने एक बहुत ही प्यारा और दिल को छू लेने वाला सवाल पूछा: "क्या तुम यह पसंद नहीं करते कि अल्लाह तुम्हें माफ कर दे?" यानी जिस तरह तुम चाहते हो कि अल्लाह तुम्हारी गलतियों को माफ कर दे, उसी तरह तुम भी अपने भाइयों की गलतियों को माफ करो। अगर तुम दूसरों को माफ करोगे, तो अल्लाह तुम्हें माफ करेगा। और अल्लाह बड़ा माफ करने वाला, बड़ा रहम करने वाला है।
यह आयत हमें सिखाती है कि नेकी और भलाई का दरवाज़ा कभी बंद नहीं करना चाहिए, चाहे दूसरों की तरफ से कितनी ही नाराज़गी क्यों न हो। माफी और दरगुज़र सबसे बड़ी नेकी है, और अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो माफ करते हैं। यही अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सीख थी और यही इस्लाम की रूह है। हमें चाहिए कि हम दूसरों की गलतियों पर माफी का बर्ताव करें, ताकि अल्लाह हम पर अपनी रहमत और माफी का बर्ताव करे।
📜 आयत 20-24 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 22
सूरा अन-नूर आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुममें से जो लोग ज्यादा दौलत और मुक़द्दर वालें…सूरा आयत 22/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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