अन-नूर · 20/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ ۝٢٠
Wa law laa fadlul laahi `alaikum wa rahmatuhoo wa annal laaha Ra`oofur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और अगर ये बात न होती कि तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत से और ये कि ख़ुदा (अपने बन्दों पर) बड़ा शफीक़ मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَضْلُ اللهِ: अल्लाह की कृपा और उसका उपकार।
  • رَحْمَتُهُ: उसकी दया और करुणा।
  • رَءُوفٌ: अत्यंत दयालु, जो अपने बंदों पर बहुत अधिक करुणा करने वाला हो।
  • رَحِيمٌ: बड़ी दया करने वाला, जो लगातार अपनी रहमत बरसाता रहे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! अगर अल्लाह का तुम पर फ़ज़ल (कृपा) और उसकी रहमत (दया) न होती, और यह कि वह अत्यंत करुणामय और दयावान है, तो तुम पर उसकी पकड़ बहुत कठोर होती। यह आयत उन लोगों के संदर्भ में उतरी जो 'इफ़्क' (झूठे आरोप) की घटना में शामिल थे। अल्लाह ने अपनी असीम कृपा और दया से उन्हें माफ़ कर दिया और उन पर वह सज़ा नहीं भेजी जो वे अपने इस गुनाह की वजह से पाते।

अल्लाह की रहमत का यह हाल है कि वह अपने बंदों के छोटे-छोटे गुनाहों पर भी बड़ी मेहरबानी से पर्दा डालता है और उन्हें मौका देता है कि वे तौबा कर लें। अगर वह चाहता तो तुम्हारे किसी भी गलत काम पर तुरंत पकड़ लेता, लेकिन उसकी रहमत और उसका करुणामय स्वभाव ही है कि वह तुम्हें मोहलत देता है, तुम्हारे लिए हिदायत के रास्ते खोलता है और तुम्हें अपनी तरफ बुलाता है।

यहाँ 'रऊफ़' और 'रहीम' दोनों शब्दों का ज़िक्र बहुत ही खूबसूरत है। 'रऊफ़' का मतलब है वह दया जो किसी की बुराई देखकर भी उस पर रहम करे, और 'रहीम' का मतलब है वह दया जो लगातार बरसती रहे। यानी अल्लाह की रहमत सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि हर वक्त, हर हाल में उसके बंदों के साथ है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जब हमसे कोई गलती हो जाए, तो हमें अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह तआला अपने बंदों से बहुत प्यार करता है और उनकी भलाई चाहता है। वह चाहता है कि हम उसकी तरफ लौटें, उससे माफ़ी माँगें और उसकी रहमत के साये में जीवन बिताएं।

यह आयत हमें अल्लाह की मुहब्बत और उसकी दया की याद दिलाती है, ताकि हम उसकी तरफ रुजू करें और उसके दिए हुए हर नेमत के लिए शुक्रगुज़ार बनें। अल्लाह की रहमत का दामन थामने वाले कभी नाकाम नहीं होते, क्योंकि उसकी रहमत हर चीज़ से बड़ी है।



📜 आयत 18-22 — अन-नूर

18وَيُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और ख़ुदा तुम से (अपने) एहकाम साफ साफ बयान करता है और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम है
19إِنَّ الَّذِينَ يُحِبُّونَ أَن تَشِيعَ الْفَاحِشَةُ فِي الَّذِينَ آمَنُوا لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
जो लोग ये चाहते हैं कि ईमानदारों में बदकारी का चर्चा फैल जाए बेशक उनके लिए दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है और ख़ुदा (असल हाल को) ख़ूब जानता है और तुम लोग नहीं जानते हो
20وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ
और अगर ये बात न होती कि तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत से और ये कि ख़ुदा (अपने बन्दों पर) बड़ा शफीक़ मेहरबान है
21۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ ۚ وَمَن يَتَّبِعْ خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ فَإِنَّهُ يَأْمُرُ بِالْفَحْشَاءِ وَالْمُنكَرِ ۚ وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ مَا زَكَىٰ مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ أَبَدًا وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يُزَكِّي مَن يَشَاءُ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
(तो तुम देखते क्या होता) ऐ ईमानदारों शैतान के क़दम ब क़दम न चलो और जो शख्स शैतान के क़दम ब क़दम चलेगा तो वह यक़ीनन उसे बदकारी और बुरी बात (करने) का हुक्म देगा और अगर तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत न होती तो तुममें से कोई भी कभी पाक साफ न होता मगर ख़ुदा तो जिसे चहता है पाक साफ कर देता है और ख़ुदा बड़ा सुनने वाला वाकिफकार है
22وَلَا يَأْتَلِ أُولُو الْفَضْلِ مِنكُمْ وَالسَّعَةِ أَن يُؤْتُوا أُولِي الْقُرْبَىٰ وَالْمَسَاكِينَ وَالْمُهَاجِرِينَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۖ وَلْيَعْفُوا وَلْيَصْفَحُوا ۗ أَلَا تُحِبُّونَ أَن يَغْفِرَ اللَّهُ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और तुममें से जो लोग ज्यादा दौलत और मुक़द्दर वालें है क़राबतदारों और मोहताजों और ख़ुदा की राह में हिजरत करने वालों को कुछ देने (लेने) से क़सम न खा बैठें बल्कि उन्हें चाहिए कि (उनकी ख़ता) माफ कर दें और दरगुज़र करें क्या तुम ये नहीं चाहते हो कि ख़ुदा तुम्हारी ख़ता माफ करे और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अन-नूर 20

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Tuesday, August 18, 2026

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