Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَرْمُونَ أَزْوَاجَهُمْ: अपनी पत्नियों पर (व्यभिचार का) आरोप लगाते हैं।
- شُهَدَاءُ: गवाह।
- إِلَّا أَنفُسَهُمْ: स्वयं के अलावा कोई नहीं।
- فَشَهَادَةُ أَحَدِهِمْ أَرْبَعُ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ: तो उनमें से एक का (अपनी बात साबित करने के लिए) चार बार अल्लाह की क़सम खाकर गवाही देना है।
- إِنَّهُ لَمِنَ الصَّادِقِينَ: कि वह (अपने आरोप में) सच्चा है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस स्थिति का समाधान प्रस्तुत करती है जब एक पति अपनी पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाए, लेकिन उसके पास चार गवाह न हों — जो कि इस्लामी क़ानून में ऐसे आरोप के लिए आवश्यक हैं। ऐसे में शरीअत ने एक न्यायसंगत और निष्पक्ष नियम बनाया है: पति को चार बार अल्लाह की क़सम खाकर गवाही देनी होगी कि वह अपने आरोप में सच्चा है। यह गवाही न्यायाधीश (क़ाज़ी) के सामने होगी। इसके बाद पाँचवीं बार वह यह कहेगा कि यदि वह झूठा है तो उस पर अल्लाह की लानत हो। यह प्रक्रिया उसे झूठी गवाही देने से रोकती है, क्योंकि यह एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी और अल्लाह के सामने जवाबदेही का मामला है।
यह आयत इस्लामी न्याय प्रणाली की सुंदरता और संतुलन को दर्शाती है। एक ओर यह पत्नी की इज़्ज़त की रक्षा करती है कि कोई भी बिना सबूत के उस पर आरोप न लगा सके, और दूसरी ओर यह पति को भी इंसाफ़ दिलाने का रास्ता देती है, ताकि सच्चाई छिपी न रहे। यह क़ुरआन का वह नियम है जो घरेलू जीवन में न्याय, सच्चाई और अल्लाह के भय को स्थापित करता है। अल्लाह तआला ने यह क़ानून इसलिए बनाया ताकि समाज में पवित्रता बनी रहे, झूठ और बदनामी का दरवाज़ा बंद हो, और हर मुसलमान यह समझे कि उसकी हर बात का हिसाब अल्लाह के यहाँ होगा। यह हुक्म हमें सिखाता है कि जीवन के हर मामले में अल्लाह का डर और उसकी रज़ा को मुख्य रखना चाहिए, और दूसरों के अधिकारों का ख़याल रखना चाहिए। यही इस्लाम की रहमत और कामिल इंसाफ़ है, जो हर हाल में सच्चाई और भलाई की तरफ़ रहनुमाई करता है।
📜 आयत 4-8 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 6
सूरा अन-नूर आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग अपनी बीवियों पर (ज़िना) का ऐब लगाएँ…सूरा आयत 6/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


