अल-फुरकान · 69/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
يُضَاعَفْ لَهُ الْعَذَابُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَيَخْلُدْ فِيهِ مُهَانًا ۝٦٩
Yudaa`af lahul `azaabu Yawmal Qiyaamati wa yakhlud feehee muhaanaa
📖 हिंदी अर्थ
कि क़यामत के दिन उसके लिए अज़ाब दूना कर दिया जाएगा और उसमें हमेशा ज़लील व ख़वार रहेगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُضَاعَفْ – दोगुना किया जाएगा, बढ़ाया जाएगा
  • الْعَذَابُ – यातना, अज़ाब
  • يَخْلُدْ – हमेशा रहेगा, स्थायी रूप से रहेगा
  • مُهَانًا – अपमानित, ज़लील, बेइज़्ज़त

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के अंजाम को बयान करती है जो अल्लाह के साथ शिर्क करते हैं, नाहक़ किसी की जान लेते हैं, या ज़िना (व्यभिचार) जैसे घोर पापों में मुब्तिला होते हैं। ऐसे लोगों के लिए क़ियामत के दिन अज़ाब को दोगुना कर दिया जाएगा, और वे उस यातना में हमेशा के लिए रहेंगे, ऐसी हालत में कि वे बेहद ज़लील और अपमानित होंगे। उनकी इज़्ज़त छीन ली जाएगी, कोई उनकी मदद नहीं करेगा, और वे अपनी सज़ा से कभी छुटकारा नहीं पा सकेंगे। यह अल्लाह का सख्त अज़ाब है, जो उन लोगों के लिए है जो अपनी सरकशी और नाफ़रमानी पर अड़े रहे।

लेकिन इसी सूरह में अल्लाह तआला ने रहमत का दरवाज़ा भी खुला रखा है। अगर कोई इंसान इन बड़े गुनाहों से तौबा कर ले, सच्चे दिल से अल्लाह की ओर लौट आए, ईमान लाए और नेक अमल करे, तो अल्लाह उसकी बुराइयों को नेकियों में बदल देगा। अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है। वह अपने बंदों से मुहब्बत करता है और चाहता है कि वे अपनी गलतियों से तौबा करके उसकी रहमत के साये में आ जाएँ।

यह आयत हमें दो बातें सिखाती है: पहली, अल्लाह के गुनाहों से बचना चाहिए, क्योंकि उसका अज़ाब बहुत सख्त है। दूसरी, अगर कोई गुनाह हो जाए तो निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि तौबा करके अल्लाह की ओर लौटना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की रहमत उसके गज़ब से कहीं ज़्यादा वसी' है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करनी चाहिए, उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए, और हर हाल में उसकी रहमत से उम्मीद रखनी चाहिए। यही कामयाबी की राह है, और यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत की तरफ ले जाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 67-71 — अल-फुरकान

67وَالَّذِينَ إِذَا أَنفَقُوا لَمْ يُسْرِفُوا وَلَمْ يَقْتُرُوا وَكَانَ بَيْنَ ذَٰلِكَ قَوَامًا
और वह लोग कि जब खर्च करते हैं तो न फुज़ूल ख़र्ची करते हैं और न तंगी करते हैं और उनका ख़र्च उसके दरमेयान औसत दर्जे का रहता है
68وَالَّذِينَ لَا يَدْعُونَ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ وَلَا يَقْتُلُونَ النَّفْسَ الَّتِي حَرَّمَ اللَّهُ إِلَّا بِالْحَقِّ وَلَا يَزْنُونَ ۚ وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ يَلْقَ أَثَامًا
और वह लोग जो ख़ुदा के साथ दूसरे माबूदों की परसतिश नही करते और जिस जान के मारने को ख़ुदा ने हराम कर दिया है उसे नाहक़ क़त्ल नहीं करते और न ज़िना करते हैं और जो शख्स ऐसा करेगा वह आप अपने गुनाह की सज़ा भुगतेगा
69يُضَاعَفْ لَهُ الْعَذَابُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَيَخْلُدْ فِيهِ مُهَانًا
कि क़यामत के दिन उसके लिए अज़ाब दूना कर दिया जाएगा और उसमें हमेशा ज़लील व ख़वार रहेगा
70إِلَّا مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ عَمَلًا صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ يُبَدِّلُ اللَّهُ سَيِّئَاتِهِمْ حَسَنَاتٍ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
मगर (हाँ) जिस शख्स ने तौबा की और ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो (अलबत्ता) उन लोगों की बुराइयों को ख़ुदा नेकियों से बदल देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
71وَمَن تَابَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَإِنَّهُ يَتُوبُ إِلَى اللَّهِ مَتَابًا
और जिस शख्स ने तौबा कर ली और अच्छे अच्छे काम किए तो बेशक उसने ख़ुदा की तरफ (सच्चे दिल से) हक़ीकक़तन रुजु की
अल-फुरकानकुरान सूची
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अनुवाद — अल-फुरकान 69

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Tuesday, August 18, 2026

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