Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَابَ: तौबा की, अपने गुनाहों से लौट आया।
- سَیِّئَاتِهِمْ: उनकी बुराइयाँ, गुनाह।
- حَسَنَاتٍ: नेकियाँ, अच्छे काम।
- غَفُورًا رَّحِيمًا: बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों के लिए रहमत का दरवाज़ा खोलते हैं। पिछली आयतों में उन लोगों के अंजाम का ज़िक्र किया गया जो शिर्क करते हैं, नाहक़ कत्ल करते हैं, और ज़िना जैसे बड़े गुनाहों में मुब्तिला होते हैं। उनके लिए सख्त अज़ाब और रुसवाई का वर्णन था। लेकिन यहाँ अल्लाह तआला फ़ौरन ही रहमत का पैग़ाम देते हैं—"मगर जो शख्स तौबा कर ले, ईमान ले आए और नेक अमल करे।"
यानी अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि जो लोग अपने गुनाहों से सच्चे दिल से तौबा कर लें, अपने रब पर ईमान ले आएँ, और अपने अमल को सुधार लें—सिर्फ़ ज़ुबान से तौबा न करें बल्कि अपने किरदार को भी बदल लें—तो अल्लाह उनके साथ क्या सलूक करेगा? वह उनकी बुराइयों को नेकियों में बदल देगा। यह अल्लाह का बेहद करम है कि वह गुनाहों को मिटाकर उनकी जगह नेकियाँ लिख देता है। शिर्क की जगह ईमान, कत्ल की जगह इंसानियत, और ज़िना की जगह पाकदामनी अता कर देता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से कहीं बड़ी है। कोई भी गुनाह—चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो—अल्लाह की रहमत से बड़ा नहीं है। अल्लाह तआला ने खुद वादा किया है कि वह तौबा करने वालों के गुनाह माफ़ कर देगा और उन्हें नेकियों से बदल देगा। यही अल्लाह की सिफ़ात हैं—ग़फ़ूर (बहुत क्षमा करने वाला) और रहीम (अत्यंत दयावान)।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम कभी अल्लाह की रहमत से मायूस न हों। चाहे हमसे कितनी ही ग़लतियाँ हुई हों, जब तक हम साँस ले रहे हैं, तौबा का दरवाज़ा खुला है। अल्लाह तआला अपने बंदों को पुकार रहा है कि "मेरी तरफ लौट आओ, मैं तुम्हारे गुनाह माफ़ कर दूँगा और तुम्हारी बुराइयों को नेकियों से बदल दूँगा।" यह कितनी बड़ी खुशखबरी है! हमें चाहिए कि हम इस दरवाज़े से फायदा उठाएँ, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की राह में ढालें। अल्लाह तआला अपने बंदों से बेहद मुहब्बत करता है और उनकी भलाई चाहता है।
📜 आयत 68-72 — सूरा अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 70
सूरा अल-फुरकान आयत 70 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर (हाँ) जिस शख्स ने तौबा की और ईमान क़ुबूल…सूरा आयत 70/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 68–72. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-फुरकान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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