अल-फुरकान · 70/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
إِلَّا مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ عَمَلًا صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ يُبَدِّلُ اللَّهُ سَيِّئَاتِهِمْ حَسَنَاتٍ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا ۝٧٠
Illaa man taaba wa `aamana wa `amila `amalan saalihan fa ulaaa`ika yubad dilul laahu saiyi aatihim hasanaat; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheemaa
📖 हिंदी अर्थ
मगर (हाँ) जिस शख्स ने तौबा की और ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो (अलबत्ता) उन लोगों की बुराइयों को ख़ुदा नेकियों से बदल देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَابَ: तौबा की, अपने गुनाहों से लौट आया।
  • سَیِّئَاتِهِمْ: उनकी बुराइयाँ, गुनाह।
  • حَسَنَاتٍ: नेकियाँ, अच्छे काम।
  • غَفُورًا رَّحِيمًا: बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों के लिए रहमत का दरवाज़ा खोलते हैं। पिछली आयतों में उन लोगों के अंजाम का ज़िक्र किया गया जो शिर्क करते हैं, नाहक़ कत्ल करते हैं, और ज़िना जैसे बड़े गुनाहों में मुब्तिला होते हैं। उनके लिए सख्त अज़ाब और रुसवाई का वर्णन था। लेकिन यहाँ अल्लाह तआला फ़ौरन ही रहमत का पैग़ाम देते हैं—"मगर जो शख्स तौबा कर ले, ईमान ले आए और नेक अमल करे।"

यानी अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि जो लोग अपने गुनाहों से सच्चे दिल से तौबा कर लें, अपने रब पर ईमान ले आएँ, और अपने अमल को सुधार लें—सिर्फ़ ज़ुबान से तौबा न करें बल्कि अपने किरदार को भी बदल लें—तो अल्लाह उनके साथ क्या सलूक करेगा? वह उनकी बुराइयों को नेकियों में बदल देगा। यह अल्लाह का बेहद करम है कि वह गुनाहों को मिटाकर उनकी जगह नेकियाँ लिख देता है। शिर्क की जगह ईमान, कत्ल की जगह इंसानियत, और ज़िना की जगह पाकदामनी अता कर देता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से कहीं बड़ी है। कोई भी गुनाह—चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो—अल्लाह की रहमत से बड़ा नहीं है। अल्लाह तआला ने खुद वादा किया है कि वह तौबा करने वालों के गुनाह माफ़ कर देगा और उन्हें नेकियों से बदल देगा। यही अल्लाह की सिफ़ात हैं—ग़फ़ूर (बहुत क्षमा करने वाला) और रहीम (अत्यंत दयावान)।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम कभी अल्लाह की रहमत से मायूस न हों। चाहे हमसे कितनी ही ग़लतियाँ हुई हों, जब तक हम साँस ले रहे हैं, तौबा का दरवाज़ा खुला है। अल्लाह तआला अपने बंदों को पुकार रहा है कि "मेरी तरफ लौट आओ, मैं तुम्हारे गुनाह माफ़ कर दूँगा और तुम्हारी बुराइयों को नेकियों से बदल दूँगा।" यह कितनी बड़ी खुशखबरी है! हमें चाहिए कि हम इस दरवाज़े से फायदा उठाएँ, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की राह में ढालें। अल्लाह तआला अपने बंदों से बेहद मुहब्बत करता है और उनकी भलाई चाहता है।



📜 आयत 68-72 — अल-फुरकान

68وَالَّذِينَ لَا يَدْعُونَ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ وَلَا يَقْتُلُونَ النَّفْسَ الَّتِي حَرَّمَ اللَّهُ إِلَّا بِالْحَقِّ وَلَا يَزْنُونَ ۚ وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ يَلْقَ أَثَامًا
और वह लोग जो ख़ुदा के साथ दूसरे माबूदों की परसतिश नही करते और जिस जान के मारने को ख़ुदा ने हराम कर दिया है उसे नाहक़ क़त्ल नहीं करते और न ज़िना करते हैं और जो शख्स ऐसा करेगा वह आप अपने गुनाह की सज़ा भुगतेगा
69يُضَاعَفْ لَهُ الْعَذَابُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَيَخْلُدْ فِيهِ مُهَانًا
कि क़यामत के दिन उसके लिए अज़ाब दूना कर दिया जाएगा और उसमें हमेशा ज़लील व ख़वार रहेगा
70إِلَّا مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ عَمَلًا صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ يُبَدِّلُ اللَّهُ سَيِّئَاتِهِمْ حَسَنَاتٍ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
मगर (हाँ) जिस शख्स ने तौबा की और ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो (अलबत्ता) उन लोगों की बुराइयों को ख़ुदा नेकियों से बदल देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
71وَمَن تَابَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَإِنَّهُ يَتُوبُ إِلَى اللَّهِ مَتَابًا
और जिस शख्स ने तौबा कर ली और अच्छे अच्छे काम किए तो बेशक उसने ख़ुदा की तरफ (सच्चे दिल से) हक़ीकक़तन रुजु की
72وَالَّذِينَ لَا يَشْهَدُونَ الزُّورَ وَإِذَا مَرُّوا بِاللَّغْوِ مَرُّوا كِرَامًا
और वह लोग जो फरेब के पास ही नही खड़े होते और वह लोग जब किसी बेहूदा काम के पास से गुज़रते हैं तो बुर्ज़ुगाना अन्दाज़ से गुज़र जाते हैं
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अनुवाद — अल-फुरकान 70

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Tuesday, August 18, 2026

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