अल-फुरकान · 71/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
وَمَن تَابَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَإِنَّهُ يَتُوبُ إِلَى اللَّهِ مَتَابًا ۝٧١
Wa man taaba wa `amila saalihan fa innnahoo yatoobu ilal laahi mataabaa
📖 हिंदी अर्थ
और जिस शख्स ने तौबा कर ली और अच्छे अच्छे काम किए तो बेशक उसने ख़ुदा की तरफ (सच्चे दिल से) हक़ीकक़तन रुजु की

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَابَ: तौबा की, पश्चाताप किया, गुनाहों से बाज़ आया।
  • صَالِحًا: अच्छा काम, नेक कर्म।
  • مَتَابًا: सच्ची और ख़ालिस तौबा, अल्लाह की ओर सही रुजू (वापसी)।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की असीम रहमत और मगफिरत का पैगाम देती है। अल्लाह फ़रमाता है कि जो शख्स अपने गुनाहों से तौबा करे—चाहे वह गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों, जैसे शिर्क, कत्ल, ज़िना आदि—और अपनी तौबा को सिर्फ ज़ुबानी न रखे, बल्कि अच्छे कामों से उसे साबित करे, यानी नेक आमाल करे, तो उसकी यह तौबा अल्लाह के यहाँ मक़बूल (क़बूल की गई) होगी।

असल में तौबा का मतलब सिर्फ "माफ़ी चाह लेना" नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की तरफ सच्चे दिल से लौटना है। जब इंसान गुनाह छोड़कर अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) की तरफ लौटता है, तो यही सच्ची तौबा है। अल्लाह तआला ऐसे बंदे की तौबा को क़बूल फ़रमाता है और उसके गुनाहों को माफ कर देता है, बल्कि उसकी बुराइयों को नेकियों से बदल देता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का दरवाजा हमेशा खुला है। चाहे इंसान कितना ही गुनाहगार क्यों न हो, जब वह सच्चे दिल से तौबा करके अल्लाह की तरफ लौटता है, तो अल्लाह उसे अपनी रहमत से नवाज़ता है। तौबा का दरवाजा कभी बंद नहीं होता, जब तक कि सूरज पश्चिम से न निकले (यानी क़यामत से पहले)।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमारे लिए खुशखबरी है। अल्लाह तआला हमें बता रहा है कि उसकी रहमत उसके गज़ब से कहीं ज़्यादा वसी' (विस्तृत) है। वह चाहता है कि हम उसकी तरफ लौटें, वह हमारी तौबा का इंतज़ार करता है। इसलिए आज ही अपने गुनाहों से तौबा करें, नमाज़ की पाबंदी करें, अच्छे कामों में लगें, और अल्लाह से वादा करें कि हम उसकी नाफ़रमानी नहीं करेंगे। याद रखें, तौबा वह चाबी है जो जन्नत के दरवाजे खोलती है और हमें अल्लाह का प्यारा बंदा बनाती है। अल्लाह हम सबको सच्ची तौबा की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 69-73 — अल-फुरकान

69يُضَاعَفْ لَهُ الْعَذَابُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَيَخْلُدْ فِيهِ مُهَانًا
कि क़यामत के दिन उसके लिए अज़ाब दूना कर दिया जाएगा और उसमें हमेशा ज़लील व ख़वार रहेगा
70إِلَّا مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ عَمَلًا صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ يُبَدِّلُ اللَّهُ سَيِّئَاتِهِمْ حَسَنَاتٍ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
मगर (हाँ) जिस शख्स ने तौबा की और ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो (अलबत्ता) उन लोगों की बुराइयों को ख़ुदा नेकियों से बदल देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
71وَمَن تَابَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَإِنَّهُ يَتُوبُ إِلَى اللَّهِ مَتَابًا
और जिस शख्स ने तौबा कर ली और अच्छे अच्छे काम किए तो बेशक उसने ख़ुदा की तरफ (सच्चे दिल से) हक़ीकक़तन रुजु की
72وَالَّذِينَ لَا يَشْهَدُونَ الزُّورَ وَإِذَا مَرُّوا بِاللَّغْوِ مَرُّوا كِرَامًا
और वह लोग जो फरेब के पास ही नही खड़े होते और वह लोग जब किसी बेहूदा काम के पास से गुज़रते हैं तो बुर्ज़ुगाना अन्दाज़ से गुज़र जाते हैं
73وَالَّذِينَ إِذَا ذُكِّرُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ لَمْ يَخِرُّوا عَلَيْهَا صُمًّا وَعُمْيَانًا
और वह लोग कि जब उन्हें उनके परवरदिगार की आयतें याद दिलाई जाती हैं तो बहरे अन्धें होकर गिर नहीं पड़ते बल्कि जी लगाकर सुनते हैं
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अनुवाद — अल-फुरकान 71

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Tuesday, August 18, 2026

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