Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ظَلَمْتُ نَفْسِي: मैंने अपने ऊपर अत्याचार किया (अर्थात अपनी आत्मा पर ज़ुल्म किया)
- فَاغْفِرْ لِي: तो मुझे क्षमा कर दे
- الْغَفُورُ: अत्यधिक क्षमा करने वाला
- الرَّحِيمُ: अत्यंत दयालु
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) से यह अनजाने में एक क़िब्ती व्यक्ति की मृत्यु का कारण बन गया, तो उन्होंने तुरंत अपनी गलती को स्वीकार किया और अपने रब की ओर रुजू किया। उन्होंने विनम्रता और पश्चाताप के साथ कहा: "ऐ मेरे रब! मैंने अपनी आत्मा पर ज़ुल्म किया, क्योंकि मैंने उस व्यक्ति को मारा जिसे मारने का मुझे आदेश नहीं था। यह मेरी भूल थी, मेरी कमज़ोरी थी। अतः तू मुझे क्षमा कर दे।"
यह एक अद्भुत दृश्य है—एक नबी अपने रब के सामने इस तरह झुकता है, अपनी गलती स्वीकार करता है, और क्षमा की भीख माँगता है। यह हमें सिखाता है कि इंसान से गलती हो सकती है, लेकिन असली इंसान वही है जो अपनी गलती को स्वीकार करे और अल्लाह से क्षमा माँगे।
अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) की दुआ क़बूल की और उन्हें क्षमा कर दिया। यह अल्लाह की रहमत का अद्भुत प्रदर्शन है—वह अपने बंदों की गलतियों को क्षमा करने के लिए हमेशा तैयार है, बशर्ते वे सच्चे दिल से तौबा करें।
इस आयत के अंत में अल्लाह अपने दो खूबसूरत नामों का ज़िक्र करता है: अल-ग़फ़ूर (अत्यधिक क्षमा करने वाला) और अर-रहीम (अत्यंत दयालु)। यह हमें बताता है कि अल्लाह की क्षमा असीमित है और उसकी दया सबसे बढ़कर है।
दावती पहलू:
यह आयत हर उस इंसान के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो गलती कर बैठता है। चाहे गलती कितनी भी बड़ी हो, अल्लाह का दरवाज़ा तौबा के लिए हमेशा खुला है। जिस तरह अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को क्षमा किया, वह हममें से हर उस व्यक्ति को क्षमा करेगा जो सच्चे दिल से उसकी ओर लौटेगा। निराशा शैतान का हथियार है—हमें कभी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह की क्षमा उसकी दया से भी बड़ी है, और वह अपने बंदों से मुहब्बत करता है। आइए, हम भी मूसा (अलैहिस्सलाम) की तरह अपनी गलतियों को स्वीकार करें और अल्लाह से क्षमा माँगें—वह ज़रूर क्षमा करेगा, क्योंकि वही तो अल-ग़फ़ूर अर-रहीम है।
📜 आयत 14-18 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 16
सूरा अल-क़सस आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (फिर बारगाहे ख़ुदा में) अर्ज़ की परवरदिगार बेशक मैने अपने…सूरा आयत 16/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


