अल-अंकबूत · 11/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
وَلَيَعْلَمَنَّ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَيَعْلَمَنَّ الْمُنَافِقِينَ ۝١١
Wa la ya`lamannal laahul lazeena aamanoo wa la ya`lamannal munaafiqeen
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया ख़ुदा उनको यक़ीनन जानता है और मुनाफेक़ीन को भी ज़रुर जानता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَلَيَعْلَمَنَّ اللَّهُ: अल्लाह अवश्य जान लेगा (यानी उसका ज्ञान प्रकट हो जाएगा)।
  • الَّذِينَ آمَنُوا: जो लोग ईमान लाए (सच्चे दिल से विश्वास किया)।
  • الْمُنَافِقِينَ: मुनाफ़िक़ीन (वे लोग जो ज़बान से ईमान का दावा करते हैं, लेकिन दिल में कुफ़्र छिपाए होते हैं)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने स्पष्ट कर दिया है कि वह हर उस व्यक्ति को जानता है जो सच्चे दिल से उस पर और उसके रसूल (ﷺ) पर ईमान लाया है, और अपने अमल से उस ईमान को साबित किया है। साथ ही, वह उन मुनाफ़िक़ों को भी भली-भाँति जानता है जो बाहर से मुसलमान बनते हैं, लेकिन अंदर से कुफ़्र और नफ़रत रखते हैं। अल्लाह का यह "जानना" केवल उसके इल्म का मामला नहीं है, बल्कि यहाँ मतलब यह है कि वह उनके हालात को लोगों के सामने प्रकट करेगा और हर एक को उसके असलियत के अनुसार अलग करेगा।

यह आयत मुसलमानों को संदेश देती है कि ईमान का दावा करना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि इम्तिहान (परीक्षा) के वक़्त सच्चे ईमान और मुनाफ़िक़ी का फ़र्क़ सामने आ जाता है। जो लोग मुसीबत और बला के समय अपने ईमान पर साबित क़दम रहते हैं, वही सच्चे मोमिन हैं। और जो लोग परीक्षा के समय इस्लाम से मुँह मोड़ लेते हैं या अपने कुफ़्र को छिपाकर मुसलमानों के साथ मिल जाते हैं, वही मुनाफ़िक़ हैं। अल्लाह तआला ने यह बात इसलिए बताई ताकि मुसलमानों का दिल मज़बूत हो और वे जान लें कि अल्लाह हर चीज़ से बाख़बर है, और उसका इन्साफ़ कभी ग़लत नहीं होता।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने ईमान को सिर्फ़ ज़बान तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे अपने अमल, अपने रिश्तों और अपनी ज़िंदगी के हर पहलू में ज़ाहिर करना चाहिए। अल्लाह तआला हमारी नीयतों को खूब जानता है, और वह हर उस व्यक्ति को प्यार करता है जो सच्चे दिल से उसकी राह पर चलता है। यह हमारे लिए एक खुशख़बरी है कि अगर हम ईमान पर साबित रहेंगे, तो अल्लाह हमें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी देगा। और जो लोग मुनाफ़िक़ी की राह अपनाते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास सख्त अज़ाब है। इसलिए हमें हमेशा सच्चाई और ईमान की राह पर चलना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की नज़र में सब कुछ साफ़ है, और वह हर अच्छे और बुरे को अलग करके रहेगा।



📜 आयत 9-13 — सूरा अल-अंकबूत

9وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُدْخِلَنَّهُمْ فِي الصَّالِحِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए हम उन्हें (क़यामत के दिन) ज़रुर नेको कारों में दाख़िल करेंगे
10وَمِنَ النَّاسِ مَن يَقُولُ آمَنَّا بِاللَّهِ فَإِذَا أُوذِيَ فِي اللَّهِ جَعَلَ فِتْنَةَ النَّاسِ كَعَذَابِ اللَّهِ وَلَئِن جَاءَ نَصْرٌ مِّن رَّبِّكَ لَيَقُولُنَّ إِنَّا كُنَّا مَعَكُمْ ۚ أَوَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِمَا فِي صُدُورِ الْعَالَمِينَ
और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो (ज़बान से तो) कह देते हैं कि हम ख़ुदा पर ईमान लाए फिर जब उनको ख़ुदा के बारे में कुछ तकलीफ़ पहुँची तो वह लोगों की तकलीफ़ देही को अज़ाब के बराबर ठहराते हैं और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की मदद आ पहुँची और तुम्हें फतेह हुई तो यही लोग कहने लगते हैं कि हम भी तो तुम्हारे साथ ही साथ थे भला जो कुछ सारे जहाँन के दिलों में है क्या ख़ुदा बख़ूबी वाक़िफ नहीं (ज़रुर है)
11وَلَيَعْلَمَنَّ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَيَعْلَمَنَّ الْمُنَافِقِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया ख़ुदा उनको यक़ीनन जानता है और मुनाफेक़ीन को भी ज़रुर जानता है
12وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلَّذِينَ آمَنُوا اتَّبِعُوا سَبِيلَنَا وَلْنَحْمِلْ خَطَايَاكُمْ وَمَا هُم بِحَامِلِينَ مِنْ خَطَايَاهُم مِّن شَيْءٍ ۖ إِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
और कुफ्फार ईमान वालों से कहने लगे कि हमारे तरीक़े पर चलो और (क़यामत में) तुम्हारे गुनाहों (के बोझ) को हम (अपने सर) ले लेंगे हालॉकि ये लोग ज़रा भी तो उनके गुनाह उठाने वाले नहीं ये लोग यक़ीनी झूठे हैं
13وَلَيَحْمِلُنَّ أَثْقَالَهُمْ وَأَثْقَالًا مَّعَ أَثْقَالِهِمْ ۖ وَلَيُسْأَلُنَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَمَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
और (हाँ) ये लोग अपने (गुनाह के) बोझे तो यक़ीनी उठाएँगें ही और अपने बोझो के साथ जिन्हें गुमराह किया उनके बोझे भी उठाएँगे और जो इफ़ितेरा परदाज़िया ये लोग करते रहे हैं क़यामत के दिन उन से ज़रुर उसकी बाज़पुर्स होगी
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीअवतरण स्थान
11आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 11

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Friday, October 2, 2026

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