अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَبِيلَنَا: हमारा मार्ग, अर्थात हमारा धर्म और हमारा तरीका।
- وَلْنَحْمِلْ: हम उठा लेंगे, हम ज़िम्मेदारी ले लेंगे।
- خَطَايَاكُمْ: तुम्हारे गुनाह, तुम्हारे पाप।
- كَاذِبُونَ: झूठे हैं।
तफसीर:
यह आयत उस समय के काफ़िरों (विशेषकर कुरैश के मुशरिकों) की उस चालाकी भरी बात का ज़िक्र करती है, जो उन्होंने नए ईमान लाने वालों से कही थी। उन्होंने कहा: "तुम लोग मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के धर्म को छोड़ दो और हमारे रास्ते पर चलो, यानी अपने बाप-दादाओं के धर्म (शिर्क) पर लौट आओ। अगर इस में कोई गुनाह होगा तो हम उसे अपने सिर ले लेंगे, हम तुम्हारे सारे पाप अपने ऊपर उठा लेंगे और उनकी सज़ा हम भुगत लेंगे।"
अल्लाह तआला ने इस झूठ का पर्दाफाश करते हुए फ़रमाया कि ये लोग अपने इस दावे में बिल्कुल झूठे हैं। वे न तो अपने गुनाहों का बोझ उठा सकते हैं और न ही किसी दूसरे के गुनाहों का। यह बात उनके लिए असंभव है। अल्लाह के यहाँ हर इंसान अपने कर्मों का ज़िम्मेदार है। क़ुरआन में साफ़ फ़रमाया गया है: "हर व्यक्ति अपने कमाए हुए (अच्छे-बुरे) के बदले में गिरवी है।" (सूरा अत-तूर: 21) और यह भी फ़रमाया: "कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।" (सूरा फ़ातिर: 18)
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त सिखाती है कि इस्लाम में हर इंसान अपनी ज़िम्मेदारी खुद उठाता है। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही बड़ा और ताकतवर क्यों न हो, किसी दूसरे के गुनाहों को अपने ऊपर नहीं ले सकता। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है। इसलिए हमें किसी की बातों में आकर अपने ईमान और अक़ीदे से समझौता नहीं करना चाहिए। जो लोग हमें गुमराह करने की कोशिश करते हैं और यह वादा करते हैं कि वे हमारे गुनाहों की ज़िम्मेदारी ले लेंगे, वे सिर्फ़ झूठ बोलते हैं। उनका यह वादा उनकी मजबूरी और बेबसी को दर्शाता है, क्योंकि वे खुद अल्लाह के सामने अपने गुनाहों के लिए जवाबदेह होंगे।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए, चाहे दुनिया के लोग कितनी ही कोशिशें करें हमें अपने रास्ते से भटकाने की। अल्लाह का रास्ता ही सच्चा और सीधा रास्ता है, और उसी पर चलकर हम कामयाबी हासिल कर सकते हैं। जो लोग दूसरों को गुमराह करते हैं, वे न केवल अपने गुनाहों का बोझ उठाएँगे, बल्कि उन लोगों के गुनाहों का भी हिस्सा उन पर होगा जिन्हें उन्होंने गुमराह किया, जैसा कि हदीस में आया है। लेकिन यह बोझ उठाना उनके दावे के अनुसार नहीं, बल्कि अल्लाह के इंसाफ़ के अनुसार होगा।
आओ हम इस आयत से सबक़ लें और अपने ईमान को मज़बूत करें, किसी भी धोखेबाज़ की बातों में न आएँ, और हमेशा अल्लाह की राह पर चलते रहें। यही हमारी दुनिया और आख़िरत की कामयाबी है।
📜 आयत 10-14 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 12
सूरा अल-अंकबूत आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कुफ्फार ईमान वालों से कहने लगे कि हमारे तरीक़े…सूरा आयत 12/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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