अल-अंकबूत · 12/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلَّذِينَ آمَنُوا اتَّبِعُوا سَبِيلَنَا وَلْنَحْمِلْ خَطَايَاكُمْ وَمَا هُم بِحَامِلِينَ مِنْ خَطَايَاهُم مِّن شَيْءٍ ۖ إِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ ۝١٢
Wa qaalal lazaeena kafaroo lillazeena aamanut tabi`oo sabeelanaa walnahmil khataayaakum wa maa hum bihaamileena min khataa yaahum min shai`in innahum lakaaziboon
📖 हिंदी अर्थ
और कुफ्फार ईमान वालों से कहने लगे कि हमारे तरीक़े पर चलो और (क़यामत में) तुम्हारे गुनाहों (के बोझ) को हम (अपने सर) ले लेंगे हालॉकि ये लोग ज़रा भी तो उनके गुनाह उठाने वाले नहीं ये लोग यक़ीनी झूठे हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَبِيلَنَا: हमारा मार्ग, अर्थात हमारा धर्म और हमारा तरीका।
  • وَلْنَحْمِلْ: हम उठा लेंगे, हम ज़िम्मेदारी ले लेंगे।
  • خَطَايَاكُمْ: तुम्हारे गुनाह, तुम्हारे पाप।
  • كَاذِبُونَ: झूठे हैं।

तफसीर:

यह आयत उस समय के काफ़िरों (विशेषकर कुरैश के मुशरिकों) की उस चालाकी भरी बात का ज़िक्र करती है, जो उन्होंने नए ईमान लाने वालों से कही थी। उन्होंने कहा: "तुम लोग मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के धर्म को छोड़ दो और हमारे रास्ते पर चलो, यानी अपने बाप-दादाओं के धर्म (शिर्क) पर लौट आओ। अगर इस में कोई गुनाह होगा तो हम उसे अपने सिर ले लेंगे, हम तुम्हारे सारे पाप अपने ऊपर उठा लेंगे और उनकी सज़ा हम भुगत लेंगे।"

अल्लाह तआला ने इस झूठ का पर्दाफाश करते हुए फ़रमाया कि ये लोग अपने इस दावे में बिल्कुल झूठे हैं। वे न तो अपने गुनाहों का बोझ उठा सकते हैं और न ही किसी दूसरे के गुनाहों का। यह बात उनके लिए असंभव है। अल्लाह के यहाँ हर इंसान अपने कर्मों का ज़िम्मेदार है। क़ुरआन में साफ़ फ़रमाया गया है: "हर व्यक्ति अपने कमाए हुए (अच्छे-बुरे) के बदले में गिरवी है।" (सूरा अत-तूर: 21) और यह भी फ़रमाया: "कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।" (सूरा फ़ातिर: 18)

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त सिखाती है कि इस्लाम में हर इंसान अपनी ज़िम्मेदारी खुद उठाता है। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही बड़ा और ताकतवर क्यों न हो, किसी दूसरे के गुनाहों को अपने ऊपर नहीं ले सकता। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है। इसलिए हमें किसी की बातों में आकर अपने ईमान और अक़ीदे से समझौता नहीं करना चाहिए। जो लोग हमें गुमराह करने की कोशिश करते हैं और यह वादा करते हैं कि वे हमारे गुनाहों की ज़िम्मेदारी ले लेंगे, वे सिर्फ़ झूठ बोलते हैं। उनका यह वादा उनकी मजबूरी और बेबसी को दर्शाता है, क्योंकि वे खुद अल्लाह के सामने अपने गुनाहों के लिए जवाबदेह होंगे।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए, चाहे दुनिया के लोग कितनी ही कोशिशें करें हमें अपने रास्ते से भटकाने की। अल्लाह का रास्ता ही सच्चा और सीधा रास्ता है, और उसी पर चलकर हम कामयाबी हासिल कर सकते हैं। जो लोग दूसरों को गुमराह करते हैं, वे न केवल अपने गुनाहों का बोझ उठाएँगे, बल्कि उन लोगों के गुनाहों का भी हिस्सा उन पर होगा जिन्हें उन्होंने गुमराह किया, जैसा कि हदीस में आया है। लेकिन यह बोझ उठाना उनके दावे के अनुसार नहीं, बल्कि अल्लाह के इंसाफ़ के अनुसार होगा।

आओ हम इस आयत से सबक़ लें और अपने ईमान को मज़बूत करें, किसी भी धोखेबाज़ की बातों में न आएँ, और हमेशा अल्लाह की राह पर चलते रहें। यही हमारी दुनिया और आख़िरत की कामयाबी है।



📜 आयत 10-14 — अल-अंकबूत

10وَمِنَ النَّاسِ مَن يَقُولُ آمَنَّا بِاللَّهِ فَإِذَا أُوذِيَ فِي اللَّهِ جَعَلَ فِتْنَةَ النَّاسِ كَعَذَابِ اللَّهِ وَلَئِن جَاءَ نَصْرٌ مِّن رَّبِّكَ لَيَقُولُنَّ إِنَّا كُنَّا مَعَكُمْ ۚ أَوَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِمَا فِي صُدُورِ الْعَالَمِينَ
और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो (ज़बान से तो) कह देते हैं कि हम ख़ुदा पर ईमान लाए फिर जब उनको ख़ुदा के बारे में कुछ तकलीफ़ पहुँची तो वह लोगों की तकलीफ़ देही को अज़ाब के बराबर ठहराते हैं और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की मदद आ पहुँची और तुम्हें फतेह हुई तो यही लोग कहने लगते हैं कि हम भी तो तुम्हारे साथ ही साथ थे भला जो कुछ सारे जहाँन के दिलों में है क्या ख़ुदा बख़ूबी वाक़िफ नहीं (ज़रुर है)
11وَلَيَعْلَمَنَّ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَيَعْلَمَنَّ الْمُنَافِقِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया ख़ुदा उनको यक़ीनन जानता है और मुनाफेक़ीन को भी ज़रुर जानता है
12وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلَّذِينَ آمَنُوا اتَّبِعُوا سَبِيلَنَا وَلْنَحْمِلْ خَطَايَاكُمْ وَمَا هُم بِحَامِلِينَ مِنْ خَطَايَاهُم مِّن شَيْءٍ ۖ إِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
और कुफ्फार ईमान वालों से कहने लगे कि हमारे तरीक़े पर चलो और (क़यामत में) तुम्हारे गुनाहों (के बोझ) को हम (अपने सर) ले लेंगे हालॉकि ये लोग ज़रा भी तो उनके गुनाह उठाने वाले नहीं ये लोग यक़ीनी झूठे हैं
13وَلَيَحْمِلُنَّ أَثْقَالَهُمْ وَأَثْقَالًا مَّعَ أَثْقَالِهِمْ ۖ وَلَيُسْأَلُنَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَمَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
और (हाँ) ये लोग अपने (गुनाह के) बोझे तो यक़ीनी उठाएँगें ही और अपने बोझो के साथ जिन्हें गुमराह किया उनके बोझे भी उठाएँगे और जो इफ़ितेरा परदाज़िया ये लोग करते रहे हैं क़यामत के दिन उन से ज़रुर उसकी बाज़पुर्स होगी
14وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَلَبِثَ فِيهِمْ أَلْفَ سَنَةٍ إِلَّا خَمْسِينَ عَامًا فَأَخَذَهُمُ الطُّوفَانُ وَهُمْ ظَالِمُونَ
और हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा तो वह उनमें पचास कम हज़ार बरस रहे (और हिदायत किया किए और जब न माना) तो आख़िर तूफान ने उन्हें ले डाला और वह उस वक्त भी सरकश ही थे
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मक्कीRevelation
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अनुवाद — अल-अंकबूत 12

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Tuesday, August 18, 2026

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