अल-अंकबूत · 23/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ وَلِقَائِهِ أُولَٰئِكَ يَئِسُوا مِن رَّحْمَتِي وَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ ۝٢٣
Wallazeena kafaroo bi Aayaatil laahi wa liqaaa`iheee ulaaa`ika ya`isoo mir rahmatee wa ulaaa`ika lahum `azaabun aleem
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों और (क़यामत के दिन) उसके सामने हाज़िर होने से इन्कार किया मेरी रहमत से मायूस हो गए हैं और उन्हीं लोगों के वास्ते दर्दनाक अज़ाब है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آيَاتِ اللهِ: अल्लाह की निशानियाँ और प्रमाण, जो उसकी एकता और शक्ति पर दलील देती हैं।
  • لِقَائِهِ: अल्लाह से मुलाक़ात का अर्थ है क़ियामत के दिन उठाया जाना और उसके सामने हाज़िर होना।
  • يَئِسُوا: निराश हो जाना, उम्मीद छोड़ देना।
  • عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक और तकलीफ़देह अज़ाब।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के हाल का वर्णन करती है जो अल्लाह की आयतों (निशानियों) को झुठलाते हैं और उससे मुलाक़ात (आख़िरत में हाज़िर होने) का इनकार करते हैं। ऐसे लोगों के बारे में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उन्होंने उसकी रहमत से निराश होकर उम्मीद तोड़ दी है। यानी जब वे क़ियामत के दिन अपने किए का अंजाम देखेंगे और समझ जाएँगे कि उनके लिए क्या तैयार किया गया है, तो वे अल्लाह की रहमत से पूरी तरह मायूस हो जाएँगे। उनके कुफ़्र की वजह से उनके लिए जन्नत का दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद हो जाएगा, और उनका अंजाम एक दर्दनाक अज़ाब होगा जो उन्हें आख़िरत में मिलेगा।

यह आयत मक्का के काफ़िरों को ख़ास तौर पर ख़ताब करती है, जो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की कहानी के बीच में उन्हें चेतावनी देने के लिए आई है। अल्लाह तआला उन्हें याद दिलाता है कि जिस तरह इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को तौहीद की दावत दी और उन्हें आख़िरत से डराया, उसी तरह आख़िरी नबी ﷺ भी उन्हें वही पैग़ाम दे रहे हैं।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह की रहमत असीम है, लेकिन वह उन लोगों के लिए है जो उसकी आयतों पर ईमान लाएँ, उसकी इबादत करें और आख़िरत के दिन पर यक़ीन रखें। जो लोग इन हक़ीक़तों से मुँह मोड़ते हैं, वे खुद को अल्लाह की रहमत से महरूम कर लेते हैं। यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने रब की निशानियों पर ग़ौर करें, उसकी किताब पर ईमान लाएँ और क़ियामत के दिन की तैयारी करें, ताकि हम उस दर्दनाक अज़ाब से बच सकें और अपने रब की रहमत के हक़दार बन सकें। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है और जो लोग उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, उनके लिए उसकी रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 21-25 — अल-अंकबूत

21يُعَذِّبُ مَن يَشَاءُ وَيَرْحَمُ مَن يَشَاءُ ۖ وَإِلَيْهِ تُقْلَبُونَ
जिस पर चाहे अज़ाब करे और जिस पर चाहे रहम करे और तुम लोग (सब के सब) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
22وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ ۖ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
और न तो तुम ज़मीन ही में ख़ुदा को ज़ेर कर सकते हो और न आसमान में और ख़ुदा के सिवा न तो तुम्हारा कोई सरपरस्त है और न मददगार
23وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ وَلِقَائِهِ أُولَٰئِكَ يَئِسُوا مِن رَّحْمَتِي وَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों और (क़यामत के दिन) उसके सामने हाज़िर होने से इन्कार किया मेरी रहमत से मायूस हो गए हैं और उन्हीं लोगों के वास्ते दर्दनाक अज़ाब है
24فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا اقْتُلُوهُ أَوْ حَرِّقُوهُ فَأَنجَاهُ اللَّهُ مِنَ النَّارِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
ग़रज़ इबराहीम की क़ौम के पास (इन बातों का) इसके सिवा कोई जवाब न था कि बाहम कहने लगे इसको मार डालो या जला (कर ख़ाक) कर डालो (आख़िर वह कर गुज़रे) तो ख़ुदा ने उनको आग से बचा लिया इसमें शक नहीं कि दुनियादार लोगों के वास्ते इस वाकिये में (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
25وَقَالَ إِنَّمَا اتَّخَذْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ أَوْثَانًا مَّوَدَّةَ بَيْنِكُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ ثُمَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكْفُرُ بَعْضُكُم بِبَعْضٍ وَيَلْعَنُ بَعْضُكُم بَعْضًا وَمَأْوَاكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّاصِرِينَ
और इबराहीम ने (अपनी क़ौम से) कहा कि तुम लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर बुतो को सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी में बाहम मोहब्त करने की वजह से (ख़ुदा) बना रखा है फिर क़यामत के दिन तुम में से एक का एक इनकार करेगा और एक दूसरे पर लानत करेगा और (आख़िर) तुम लोगों का ठिकाना जहन्नुम है और (उस वक्त तुम्हारा कोई भी मददगार न होगा)
अल-अंकबूतकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अंकबूत 23

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Tuesday, August 18, 2026

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