अल-अंकबूत · 22/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ ۖ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ ۝٢٢
Wa maaa antum bimu`jizeena fil ardi wa laa fissamaaa`i wa maa lakum min doonil laahi minw waliyyinw wa laa naseer
📖 हिंदी अर्थ
और न तो तुम ज़मीन ही में ख़ुदा को ज़ेर कर सकते हो और न आसमान में और ख़ुदा के सिवा न तो तुम्हारा कोई सरपरस्त है और न मददगार
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِمُعْجِزِينَ (मुआज्जिज़ीन): अल्लाह को विवश करने वाले, उसकी पकड़ से बच निकलने वाले, या उसे असमर्थ बनाने वाले।
  • وَلِيّ (वली): संरक्षक, मददगार, जो आपके कामों को संभालने वाला हो।
  • نَصِير (नसीर): सहायक, जो आपकी मदद करे और आपको बचाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! तुम अल्लाह को हरा नहीं सकते, न धरती में भागकर उसकी पकड़ से बच सकते हो और न आसमान में जाकर। अगर तुम उसकी अवज्ञा करोगे, तो वह तुम्हें कहीं भी नहीं छोड़ेगा। चाहे तुम धरती की गहराइयों में छिप जाओ या आसमान की बुलंदियों पर चढ़ जाओ, अल्लाह की क़ुदरत और उसके इल्म से बाहर निकलना नामुमकिन है। वह हर जगह मौजूद है, हर चीज़ पर क़ाबू रखता है, और उसकी पकड़ से कोई फरार नहीं हो सकता।

और अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई वली (संरक्षक) नहीं जो तुम्हारे मामलों को संभाले, और न कोई नसीर (सहायक) है जो तुम्हें उसके अज़ाब से बचा सके। अगर अल्लाह तुम्हें कोई तकलीफ़ देना चाहे या तुम्हें सज़ा देना चाहे, तो कोई नहीं है जो उसके आगे खड़ा हो सके या उसके फैसले को टाल सके। वली और नसीर में फर्क यह है कि वली तो वह होता है जो आपके पूरे मामलों की देखभाल करे, और नसीर वह होता है जो मुसीबत के वक्त आपकी मदद के लिए आए — और ये दोनों सिफ़तें सिर्फ अल्लाह ही की हैं, उसके सिवा किसी में नहीं पाई जातीं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी ताकत का एहसास कराती है। जब हमें यक़ीन हो जाए कि हमारा रब हर चीज़ पर क़ादिर है, हम उससे कहीं नहीं भाग सकते, और उसी की पनाह में ही हमारी भलाई है — तो हमारा दिल उसी की तरफ मुड़ जाता है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ही हमारा असली वली और नसीर है। जब हम उसकी राह पर चलते हैं, तो वह हमारी हिफाज़त करता है, हमारी मदद करता है और हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर मामले में अल्लाह पर भरोसा करें, उसकी इबादत करें और उसकी राह पर चलें — क्योंकि उसी के हाथ में हमारी कामयाबी है, और उसी की पनाह में ही असली सुकून है।

🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — अल-अंकबूत

20قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ بَدَأَ الْخَلْقَ ۚ ثُمَّ اللَّهُ يُنشِئُ النَّشْأَةَ الْآخِرَةَ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(ऐ रसूल इन लोगों से) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चलफिर कर देखो तो कि ख़ुदा ने किस तरह पहले पहल मख़लूक को पैदा किया फिर (उसी तरह वही) ख़ुदा (क़यामत के दिन) आखिरी पैदाइश पैदा करेगा- बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
21يُعَذِّبُ مَن يَشَاءُ وَيَرْحَمُ مَن يَشَاءُ ۖ وَإِلَيْهِ تُقْلَبُونَ
जिस पर चाहे अज़ाब करे और जिस पर चाहे रहम करे और तुम लोग (सब के सब) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
22وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ ۖ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
और न तो तुम ज़मीन ही में ख़ुदा को ज़ेर कर सकते हो और न आसमान में और ख़ुदा के सिवा न तो तुम्हारा कोई सरपरस्त है और न मददगार
23وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ وَلِقَائِهِ أُولَٰئِكَ يَئِسُوا مِن رَّحْمَتِي وَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों और (क़यामत के दिन) उसके सामने हाज़िर होने से इन्कार किया मेरी रहमत से मायूस हो गए हैं और उन्हीं लोगों के वास्ते दर्दनाक अज़ाब है
24فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا اقْتُلُوهُ أَوْ حَرِّقُوهُ فَأَنجَاهُ اللَّهُ مِنَ النَّارِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
ग़रज़ इबराहीम की क़ौम के पास (इन बातों का) इसके सिवा कोई जवाब न था कि बाहम कहने लगे इसको मार डालो या जला (कर ख़ाक) कर डालो (आख़िर वह कर गुज़रे) तो ख़ुदा ने उनको आग से बचा लिया इसमें शक नहीं कि दुनियादार लोगों के वास्ते इस वाकिये में (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
22आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 22

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Tuesday, August 18, 2026

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