अल-अंकबूत · 25/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَقَالَ إِنَّمَا اتَّخَذْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ أَوْثَانًا مَّوَدَّةَ بَيْنِكُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ ثُمَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكْفُرُ بَعْضُكُم بِبَعْضٍ وَيَلْعَنُ بَعْضُكُم بَعْضًا وَمَأْوَاكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّاصِرِينَ ۝٢٥
Wa qaala innamat takhaz tum min doonil laahi awsaanam mawaddata bainikum fil hayaatid dunyaa summa yawmal qiyaamati yakfuru ba`dukum biba `dinw wa yal`anu ba`dukum ba`danw-wa yal`anu ba`dukum ba`danw wa maa waakumun Naaru wa maa lakum min naasireen
📖 हिंदी अर्थ
और इबराहीम ने (अपनी क़ौम से) कहा कि तुम लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर बुतो को सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी में बाहम मोहब्त करने की वजह से (ख़ुदा) बना रखा है फिर क़यामत के दिन तुम में से एक का एक इनकार करेगा और एक दूसरे पर लानत करेगा और (आख़िर) तुम लोगों का ठिकाना जहन्नुम है और (उस वक्त तुम्हारा कोई भी मददगार न होगा)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अवसान (أوثانًا): मूर्तियाँ, बुत
  • मवद्दत (مَوَدَّة): आपसी प्रेम और मोहब्बत
  • यक्फुरु (يَكْفُرُ): इनकार करना, अस्वीकार करना
  • मअवाकुम (مَأْوَاكُم): तुम्हारा ठिकाना, तुम्हारा आश्रय स्थल
  • नासिरीन (نَّاصِرِينَ): मददगार, सहायक

तफसीर:

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को नसीहत करते हुए फ़रमाया: “तुमने अल्लाह को छोड़कर जिन मूर्तियों को अपना माबूद बना रखा है, यह सब कुछ नहीं बल्कि सिर्फ़ दुनियावी ज़िंदगी में आपसी मोहब्बत और एक-दूसरे के साथ जुड़े रहने का ज़रिया है। तुम इन बुतों की इबादत को अपने बीच मुहब्बत का बहाना बनाते हो, ताकि दुनिया में तुम्हारे रिश्ते क़ायम रहें और तुम एक दूसरे के साथ मिल-जुलकर रह सको।”

लेकिन यह मोहब्बत और यह रिश्ते सिर्फ़ दुनिया की ज़िंदगी तक ही सीमित हैं। जब क़यामत का दिन आएगा, तो यह सारी मुहब्बत दुश्मनी में बदल जाएगी। उस दिन तुम में से हर एक दूसरे से बराअत (अलगाव) ज़ाहिर करेगा। जो लोग इन मूर्तियों की इबादत करते थे, वे अपने बुतों से इनकार करेंगे, और जो बुतपरस्ती की तरफ़ बुलाने वाले थे, उनके पैरोकार उन्हें लानतें देंगे। एक दूसरे को कोसेंगे और एक दूसरे से बेज़ारी का इज़हार करेंगे। यानी जो लोग दुनिया में एक दूसरे के साथ मुहब्बत और इत्तेफ़ाक़ से रहते थे, वे उस दिन एक दूसरे के दुश्मन बन जाएंगे।

फिर हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने उन्हें आगाह किया कि तुम सबका आख़िरी ठिकाना जहन्नम की आग है। तुम्हारे ये बुत, ये मूर्तियाँ, ये देवी-देवता, और तुम्हारे रहनुमा — कोई भी तुम्हें उस आग से नहीं बचा सकता। उस दिन तुम्हारे लिए कोई मददगार नहीं होगा, कोई सहारा नहीं होगा, कोई सिफ़ारिशी नहीं होगा। न तुम्हारे बुत तुम्हारे काम आएंगे, न तुम्हारे दुनियावी रिश्ते, न तुम्हारी दौलत, न तुम्हारी औलाद। अल्लाह के अज़ाब से बचाने वाला कोई नहीं होगा।

यह एक बहुत बड़ी चेतावनी है कि दुनिया में जो रिश्ते और मुहब्बतें अल्लाह की रज़ा के बिना क़ायम की जाती हैं, वे आख़िरत में बेकार साबित होंगी। इसलिए हमें चाहिए कि अपनी मुहब्बतों और रिश्तों की बुनियाद अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा पर रखें। जो मुहब्बत अल्लाह के लिए होती है, वही क़यामत के दिन काम आती है और वही सच्ची और बाक़ी रहने वाली है। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अल-अंकबूत

23وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ وَلِقَائِهِ أُولَٰئِكَ يَئِسُوا مِن رَّحْمَتِي وَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों और (क़यामत के दिन) उसके सामने हाज़िर होने से इन्कार किया मेरी रहमत से मायूस हो गए हैं और उन्हीं लोगों के वास्ते दर्दनाक अज़ाब है
24فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا اقْتُلُوهُ أَوْ حَرِّقُوهُ فَأَنجَاهُ اللَّهُ مِنَ النَّارِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
ग़रज़ इबराहीम की क़ौम के पास (इन बातों का) इसके सिवा कोई जवाब न था कि बाहम कहने लगे इसको मार डालो या जला (कर ख़ाक) कर डालो (आख़िर वह कर गुज़रे) तो ख़ुदा ने उनको आग से बचा लिया इसमें शक नहीं कि दुनियादार लोगों के वास्ते इस वाकिये में (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
25وَقَالَ إِنَّمَا اتَّخَذْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ أَوْثَانًا مَّوَدَّةَ بَيْنِكُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ ثُمَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكْفُرُ بَعْضُكُم بِبَعْضٍ وَيَلْعَنُ بَعْضُكُم بَعْضًا وَمَأْوَاكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّاصِرِينَ
और इबराहीम ने (अपनी क़ौम से) कहा कि तुम लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर बुतो को सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी में बाहम मोहब्त करने की वजह से (ख़ुदा) बना रखा है फिर क़यामत के दिन तुम में से एक का एक इनकार करेगा और एक दूसरे पर लानत करेगा और (आख़िर) तुम लोगों का ठिकाना जहन्नुम है और (उस वक्त तुम्हारा कोई भी मददगार न होगा)
26۞ فَآمَنَ لَهُ لُوطٌ ۘ وَقَالَ إِنِّي مُهَاجِرٌ إِلَىٰ رَبِّي ۖ إِنَّهُ هُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
तब सिर्फ लूत इबराहीम पर ईमान लाए और इबराहीम ने कहा मै तो देस को छोड़कर अपने परवरदिगार की तरफ (जहाँ उसको मंज़ूर हो ) निकल जाऊँगा
27وَوَهَبْنَا لَهُ إِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَجَعَلْنَا فِي ذُرِّيَّتِهِ النُّبُوَّةَ وَالْكِتَابَ وَآتَيْنَاهُ أَجْرَهُ فِي الدُّنْيَا ۖ وَإِنَّهُ فِي الْآخِرَةِ لَمِنَ الصَّالِحِينَ
इसमे शक नहीं कि वह ग़ालिब (और) हिकमत वाला है और हमने इबराहीम को इसहाक़ (सा बेटा) और याक़ूब (सा पोता) अता किया और उनकी नस्ल में पैग़म्बरी और किताब क़रार दी और हम न इबराहीम को दुनिया में भी अच्छा बदला अता किया और वह तो आख़ेरत में भी यक़ीनी नेको कारों से हैं
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अनुवाद — अल-अंकबूत 25

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Tuesday, August 18, 2026

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