अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अवसान (أوثانًا): मूर्तियाँ, बुत
- मवद्दत (مَوَدَّة): आपसी प्रेम और मोहब्बत
- यक्फुरु (يَكْفُرُ): इनकार करना, अस्वीकार करना
- मअवाकुम (مَأْوَاكُم): तुम्हारा ठिकाना, तुम्हारा आश्रय स्थल
- नासिरीन (نَّاصِرِينَ): मददगार, सहायक
तफसीर:
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को नसीहत करते हुए फ़रमाया: “तुमने अल्लाह को छोड़कर जिन मूर्तियों को अपना माबूद बना रखा है, यह सब कुछ नहीं बल्कि सिर्फ़ दुनियावी ज़िंदगी में आपसी मोहब्बत और एक-दूसरे के साथ जुड़े रहने का ज़रिया है। तुम इन बुतों की इबादत को अपने बीच मुहब्बत का बहाना बनाते हो, ताकि दुनिया में तुम्हारे रिश्ते क़ायम रहें और तुम एक दूसरे के साथ मिल-जुलकर रह सको।”
लेकिन यह मोहब्बत और यह रिश्ते सिर्फ़ दुनिया की ज़िंदगी तक ही सीमित हैं। जब क़यामत का दिन आएगा, तो यह सारी मुहब्बत दुश्मनी में बदल जाएगी। उस दिन तुम में से हर एक दूसरे से बराअत (अलगाव) ज़ाहिर करेगा। जो लोग इन मूर्तियों की इबादत करते थे, वे अपने बुतों से इनकार करेंगे, और जो बुतपरस्ती की तरफ़ बुलाने वाले थे, उनके पैरोकार उन्हें लानतें देंगे। एक दूसरे को कोसेंगे और एक दूसरे से बेज़ारी का इज़हार करेंगे। यानी जो लोग दुनिया में एक दूसरे के साथ मुहब्बत और इत्तेफ़ाक़ से रहते थे, वे उस दिन एक दूसरे के दुश्मन बन जाएंगे।
फिर हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने उन्हें आगाह किया कि तुम सबका आख़िरी ठिकाना जहन्नम की आग है। तुम्हारे ये बुत, ये मूर्तियाँ, ये देवी-देवता, और तुम्हारे रहनुमा — कोई भी तुम्हें उस आग से नहीं बचा सकता। उस दिन तुम्हारे लिए कोई मददगार नहीं होगा, कोई सहारा नहीं होगा, कोई सिफ़ारिशी नहीं होगा। न तुम्हारे बुत तुम्हारे काम आएंगे, न तुम्हारे दुनियावी रिश्ते, न तुम्हारी दौलत, न तुम्हारी औलाद। अल्लाह के अज़ाब से बचाने वाला कोई नहीं होगा।
यह एक बहुत बड़ी चेतावनी है कि दुनिया में जो रिश्ते और मुहब्बतें अल्लाह की रज़ा के बिना क़ायम की जाती हैं, वे आख़िरत में बेकार साबित होंगी। इसलिए हमें चाहिए कि अपनी मुहब्बतों और रिश्तों की बुनियाद अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा पर रखें। जो मुहब्बत अल्लाह के लिए होती है, वही क़यामत के दिन काम आती है और वही सच्ची और बाक़ी रहने वाली है। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 23-27 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 25
सूरा अल-अंकबूत आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इबराहीम ने (अपनी क़ौम से) कहा कि तुम लोगों…सूरा आयत 25/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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