Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
بَلَىٰ (हाँ، यह काफी है) — इसका अर्थ है कि तीन हज़ार फ़रिश्तों का मदद पहुँचना तुम्हारे लिए पर्याप्त है।
مِن فَوْرِهِمْ (अपनी इसी घड़ी से) — अर्थात उसी समय, बिना किसी देरी के।
مُسَوِّمِينَ (निशान लगाए हुए) — अर्थात फ़रिश्तों ने अपने आपको और अपने घोड़ों को स्पष्ट निशानों से चिह्नित किया हुआ था, ताकि वे पहचाने जा सकें।
व्याख्या:
अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ और मोमिनीन को सांत्वना और खुशखबरी दे रहा है। वह फ़रमा रहा है: "हाँ! यह तीन हज़ार फ़रिश्तों का मदद तुम्हारे लिए काफी है, बल्कि इससे भी बढ़कर एक और बशारत सुनो — यदि तुम सब्र करो (अर्थात दुश्मन के मुक़ाबले में डटे रहो, जज़्बाती न बनो) और तक़वा अपनाओ (अर्थात अल्लाह के हुक्मों की पालना करो और उसकी नफ़रमानी से बचो), और कुफ़्फ़ारे मक्का उसी वक़्त तुम पर हमला करने के लिए तेज़ी से आ जाएँ, तो तुम्हारा रब उन पहले तीन हज़ार फ़रिश्तों के साथ पाँच हज़ार और फ़रिश्ते भेज देगा, जो अपने आपको और अपने घोड़ों को खास निशानों से मज़ीन (चिह्नित) किए हुए होंगे।"
यह अल्लाह की ओर से मोमिनीन के लिए एक बड़ी दया और मदद है। अल्लाह तआला अपने बंदों को यह सिखा रहा है कि जीत उनकी तादाद या हथियारों से नहीं, बल्कि सब्र और तक़वा से मिलती है। जब बंदा अल्लाह पर भरोसा करता है और उसके हुक्मों का पालन करता है, तो अल्लाह उसे ऐसे ज़रियों से मदद देता है जिनकी उसे उम्मीद भी नहीं होती।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि मुश्किल घड़ी में सब्र और तक़वा ही हमारी असली ढाल है। अल्लाह अपने मोमिन बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। चाहे दुश्मन कितने भी ताक़तवर क्यों न हों, अल्लाह की मदद उसके वफ़ादार बंदों के साथ होती है। यही वजह है कि हमें हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसके हुक्मों पर अमल करते रहना चाहिए। याद रखिए, अल्लाह की मदद का वादा सच्चा है — बशर्ते हम सब्र और तक़वा के साथ उसकी राह पर क़ायम रहें।
📜 आयत 123-127 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 125
सूरा आल-इमरान आयत 125 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बल्कि अगर तुम साबित क़दम रहो और (रसूल की मुख़ालेफ़त…सूरा आयत 125/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 123–127. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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