आल-इमरान · 126/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
وَمَا جَعَلَهُ اللَّهُ إِلَّا بُشْرَىٰ لَكُمْ وَلِتَطْمَئِنَّ قُلُوبُكُم بِهِ ۗ وَمَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِندِ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ ۝١٢٦
Wa maa ja`alahul laahu illaa bushraa lakum wa litatma`inna quloobukum bih` wa man-nasru illaa min `indilllaahil `Azeezil Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये तो ज़ाहिर है कि) मदद जब होती है तो ख़ुदा ही की तरफ़ से जो सब पर ग़ालिब (और) हिकमत वाला है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بُشْرَىٰ: खुशखबरी, शुभ सूचना।
  • لِتَطْمَئِنَّ: ताकि चैन और सुकून हासिल हो।
  • الْعَزِيزِ: वह शक्तिशाली जिसे कोई हरा न सके।
  • الْحَكِيمِ: वह तत्वदर्शी जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और समझदारी से काम करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने यह स्पष्ट कर दिया कि उसने बद्र के मैदान में फ़रिश्तों के साथ जो मदद भेजी, वह केवल तुम्हारे लिए एक खुशखबरी थी, ताकि तुम्हारे दिलों को सुकून मिले और तुम्हें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह तुम्हारे साथ है। यह मदद इसलिए नहीं भेजी गई कि नसरत (विजय) का स्रोत फ़रिश्ते या सामान्य साधन हैं, बल्कि असली नसरत और कामयाबी सिर्फ़ अल्लाह ही की तरफ़ से है। वही सबसे शक्तिशाली है, जिसे कोई मात नहीं दे सकता, और वही सबसे बुद्धिमान है, जो हर मामले को अपनी हिकमत से तय करता है। इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि वे सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा रखें, उसी से मदद माँगें और उसी पर तवक्कुल करें। यह आयत हमें सिखाती है कि जब हमारे पास साधन और सामान हों, तो भी हमारा दिल अल्लाह की तरफ़ ही लगा रहना चाहिए, क्योंकि असली फ़तह अल्लाह के हाथ में है। यही वह सबक़ है जो हर मुसलमान को अपनी ज़िंदगी में अपनाना चाहिए — अल्लाह पर पूरा भरोसा, उसकी मदद पर यक़ीन और उसके फ़ैसलों पर राज़ी रहना। जब दिल अल्लाह के ज़िक्र से सुकून पाता है, तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं लगती, और यही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 124-128 — सूरा आल-इमरान

124إِذْ تَقُولُ لِلْمُؤْمِنِينَ أَلَن يَكْفِيَكُمْ أَن يُمِدَّكُمْ رَبُّكُم بِثَلَاثَةِ آلَافٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُنزَلِينَ
पस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस वक्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे हॉ (ज़रूर काफ़ी है)
125بَلَىٰ ۚ إِن تَصْبِرُوا وَتَتَّقُوا وَيَأْتُوكُم مِّن فَوْرِهِمْ هَٰذَا يُمْدِدْكُمْ رَبُّكُم بِخَمْسَةِ آلَافٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُسَوِّمِينَ
बल्कि अगर तुम साबित क़दम रहो और (रसूल की मुख़ालेफ़त से) बचो और कुफ्फ़ार अपने (जोश में) तुमपर चढ़ भी आये तो तुम्हारा परवरदिगार ऐसे पॉच हज़ार फ़रिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा जो निशाने जंग लगाए हुए डटे होंगे और ख़ुदा ने ये मदद सिर्फ तुम्हारी ख़ुशी के लिए की है
126وَمَا جَعَلَهُ اللَّهُ إِلَّا بُشْرَىٰ لَكُمْ وَلِتَطْمَئِنَّ قُلُوبُكُم بِهِ ۗ وَمَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِندِ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ
और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये तो ज़ाहिर है कि) मदद जब होती है तो ख़ुदा ही की तरफ़ से जो सब पर ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
127لِيَقْطَعَ طَرَفًا مِّنَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَوْ يَكْبِتَهُمْ فَيَنقَلِبُوا خَائِبِينَ
(और यह मदद की भी तो) इसलिए कि काफ़िरों के एक गिरोह को कम कर दे या ऐसा चौपट कर दे कि (अपना सा) मुंह लेकर नामुराद अपने घर वापस चले जायें
128لَيْسَ لَكَ مِنَ الْأَمْرِ شَيْءٌ أَوْ يَتُوبَ عَلَيْهِمْ أَوْ يُعَذِّبَهُمْ فَإِنَّهُمْ ظَالِمُونَ
(ऐ रसूल) तुम्हारा तो इसमें कुछ बस नहीं चाहे ख़ुदा उनकी तौबा कुबूल करे या उनको सज़ा दे क्योंकि वह ज़ालिम तो ज़रूर हैं
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीअवतरण स्थान
126आयत

अनुवाद — आल-इमरान 126

सूरा आल-इमरान आयत 126 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये…

सूरा आयत 126/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 124–128. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए