आल-इमरान · 124/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِذْ تَقُولُ لِلْمُؤْمِنِينَ أَلَن يَكْفِيَكُمْ أَن يُمِدَّكُمْ رَبُّكُم بِثَلَاثَةِ آلَافٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُنزَلِينَ ۝١٢٤
Iz taqoolu lilmu`mineena alai yakfiyakum ai-yumiddakum Rabbukum bisalaasati aalaafim minal malaaa`ikati munzaleen
📖 हिंदी अर्थ
पस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस वक्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे हॉ (ज़रूर काफ़ी है)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِذْ تَقُولُ: (ऐ नबी!) उस समय को याद करो जब तुम कह रहे थे।
  • أَلَن يَكْفِيَكُمْ: क्या तुम्हारे लिए यह पर्याप्त नहीं है?
  • يُمِدَّكُمْ: वह तुम्हारी सहायता करे (सैन्य सहायता भेजे)।
  • بِثَلَاثَةِ آلَافٍ: तीन हज़ार (की संख्या में)।
  • مُنزَلِينَ: (आकाश से) उतारे हुए (फ़रिश्ते)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस समय को याद करो जब बद्र की जंग में मुसलमानों को यह खबर मिली कि मुशरिकों की मदद के लिए बड़ी फ़ौज आ रही है, तो कुछ मोमिनीन के दिलों में घबराहट पैदा हुई। उस वक्त अल्लाह ने आपको यह बात कहने की तौफ़ीक़ दी कि तुम मोमिनीन से पूछ रहे थे: "क्या तुम्हारे लिए यह काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा रब तीन हज़ार फ़रिश्तों के साथ तुम्हारी मदद करे, जो आसमान से उतारे गए हों?"

यह अल्लाह की तरफ से मोमिनीन के लिए एक बड़ी बशारत और दिलासा थी। अल्लाह ने अपने नबी के ज़रिए मुसलमानों को यक़ीन दिलाया कि अगर वे सब्र और तक़्वा अपनाएँ, तो अल्लाह की मदद उनके साथ है, और फ़रिश्तों की यह फ़ौज उनके साथ मिलकर लड़ेगी और उन्हें मज़बूती प्रदान करेगी। यह मदद सिर्फ़ उनके दिलों को मज़बूत करने और दुश्मन के दिलों में रौब डालने के लिए थी, क्योंकि अल्लाह की मदद किसी गिनती और तादाद की मोहताज नहीं होती।


फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):

  1. अल्लाह पर भरोसा: यह आयत सिखाती है कि मुसलमान को हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब अल्लाह की मदद हो, तो थोड़ी तादाद भी बड़ी फ़ौजों पर भारी पड़ती है।
  2. नबी की रहनुमाई: यह आयत दिखाती है कि नबी ﷺ मुश्किल वक्त में मोमिनीन के दिलों को मज़बूत करते थे और उन्हें अल्लाह की मदद की याद दिलाते थे। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम भी दूसरों को हौसला दें और अल्लाह की मदद की उम्मीद दिलाएँ।
  3. फ़रिश्तों की मदद: अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद के लिए फ़रिश्ते भेजता है, जो उनके हौसले बढ़ाते हैं और दुश्मनों पर रौब डालते हैं। यह मोमिन के लिए इज़्ज़त की बात है कि अल्लाह के फ़रिश्ते उसके साथ होते हैं।
  4. सब्र और तक़्वा की अहमियत: यह आयत उस वादे से जुड़ी है जो अगली आयत में बताया गया है कि अगर मुसलमान सब्र करें और अल्लाह से डरते रहें, तो अल्लाह उन्हें और भी ज़्यादा मदद देगा। यानी अल्लाह की मदद का दारोमदार हमारे अमल और नीयत पर है।
  5. इस्लाम की ताक़त: यह आयत मुसलमानों को बताती है कि उनकी असली ताक़त अल्लाह की मदद में है, न कि साज़ो-सामान और तादाद में। जब अल्लाह किसी की मदद करता है, तो कोई ताक़त उसके आगे टिक नहीं सकती।
🎧 सुनें

📜 आयत 122-126 — आल-इमरान

122إِذْ هَمَّت طَّائِفَتَانِ مِنكُمْ أَن تَفْشَلَا وَاللَّهُ وَلِيُّهُمَا ۗ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
ये उस वक्त क़ा वाक़या है जब तुममें से दो गिरोहों ने ठान लिया था कि पसपाई करें और फिर (सॅभल गए) क्योंकि ख़ुदा तो उनका सरपरस्त था और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिये
123وَلَقَدْ نَصَرَكُمُ اللَّهُ بِبَدْرٍ وَأَنتُمْ أَذِلَّةٌ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की (बावजूद के) तुम (दुश्मन के मुक़ाबले में) बिल्कुल बे हक़ीक़त थे (फिर भी) ख़ुदा ने फतेह दी
124إِذْ تَقُولُ لِلْمُؤْمِنِينَ أَلَن يَكْفِيَكُمْ أَن يُمِدَّكُمْ رَبُّكُم بِثَلَاثَةِ آلَافٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُنزَلِينَ
पस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस वक्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे हॉ (ज़रूर काफ़ी है)
125بَلَىٰ ۚ إِن تَصْبِرُوا وَتَتَّقُوا وَيَأْتُوكُم مِّن فَوْرِهِمْ هَٰذَا يُمْدِدْكُمْ رَبُّكُم بِخَمْسَةِ آلَافٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُسَوِّمِينَ
बल्कि अगर तुम साबित क़दम रहो और (रसूल की मुख़ालेफ़त से) बचो और कुफ्फ़ार अपने (जोश में) तुमपर चढ़ भी आये तो तुम्हारा परवरदिगार ऐसे पॉच हज़ार फ़रिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा जो निशाने जंग लगाए हुए डटे होंगे और ख़ुदा ने ये मदद सिर्फ तुम्हारी ख़ुशी के लिए की है
126وَمَا جَعَلَهُ اللَّهُ إِلَّا بُشْرَىٰ لَكُمْ وَلِتَطْمَئِنَّ قُلُوبُكُم بِهِ ۗ وَمَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِندِ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ
और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये तो ज़ाहिर है कि) मदद जब होती है तो ख़ुदा ही की तरफ़ से जो सब पर ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
124आयत

अनुवाद — आल-इमरान 124

सूरा आल-इमरान आयत 124 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : पस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो…

सूरा आयत 124/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 122–126. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए