अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَوْلِيَاءَ: मित्र, सहायक, संरक्षक।
- مِن دُونِ: को छोड़कर, के अतिरिक्त।
- تُقَاةً: डर या भय के कारण बचाव, यानी दुश्मन के नुकसान से बचने के लिए सतर्कता और सावधानी बरतना।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों को स्पष्ट रूप से निर्देश देता है कि वे काफिरों को अपना मित्र, सहायक और संरक्षक न बनाएं, जबकि मोमिन भाई उनके बीच मौजूद हैं। मोमिनों को चाहिए कि वे आपस में ही एक-दूसरे के सहारे बनें, क्योंकि काफिर अल्लाह के दुश्मन हैं और उनसे दोस्ती रखना अल्लाह की दुश्मनी को अपनाना है। जो कोई भी ऐसा करेगा—यानी काफिरों को मोमिनों को छोड़कर अपना मित्र बनाएगा—वह अल्लाह के धर्म और उसकी सुरक्षा से बाहर हो जाएगा, और अल्लाह भी उससे बरी हो जाएगा।
हालाँकि, अल्लाह ने एक रियायत दी है: यदि मोमिन किसी ऐसी स्थिति में हों जहाँ उन्हें काफिरों के अत्याचार या नुकसान का डर हो, और वे कमज़ोर हों, तो उन्हें अनुमति है कि वे अपनी जान बचाने के लिए उनसे नरमी से पेश आएँ, मीठी बात करें, या दिखावे के लिए कुछ सहयोग दिखाएँ—लेकिन यह केवल ज़ाहिरी (बाहरी) होगा, दिल में उनकी दुश्मनी और नफरत बनी रहेगी। यह उनके नुकसान से बचने का एक उपाय है, जब तक कि मोमिनों की ताकत न बढ़ जाए।
फिर अल्लाह तआला मोमिनों को अपने गज़ब (प्रकोप) से डराता है और कहता है कि वह स्वयं उन्हें सावधान कर रहा है—यानी काफिरों की मोहब्बत और उनसे दोस्ती रखने से बचो, वरना अल्लाह का क्रोध भुगतना पड़ेगा। अंत में अल्लाह कहता है कि सबको एक दिन उसी की ओर लौटना है, और वहीं हर किसी को उसके कर्मों का बदला मिलेगा। यह एक और चेतावनी है कि इस दुनिया में काफिरों से दोस्ती करने का नतीजा आख़िरत में बहुत बुरा होगा।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- मोमिन की पहचान यह है कि वह अल्लाह और उसके दीन को सबसे ज़्यादा प्यार करता है, और इसी प्यार की बुनियाद पर वह अपने रिश्ते बनाता है। काफिरों से दोस्ती रखना इस प्यार के खिलाफ है।
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि मुश्किल समय में भी हमें अपने ईमान और अल्लाह पर भरोसा नहीं छोड़ना चाहिए। अल्लाह ने ज़रूरत के वक़्त सतर्कता की इजाज़त दी है, लेकिन दिल हमेशा ईमान पर क़ायम रहना चाहिए।
- अल्लाह का डर ही वह चीज़ है जो इंसान को गलत रास्तों पर जाने से रोकती है। जब हमें यकीन हो कि अल्लाह हमें देख रहा है और हमें उसी के सामने जवाब देना है, तो हम अपने आपको गुनाहों से बचा सकते हैं।
- यह आयत मोमिनों को एकजुट रहने और आपसी भाईचारे की ताकत बढ़ाने की तरफ़ बुलाती है, ताकि वे किसी बाहरी ताकत के मोहताज न हों। इस्लाम हमें सिखाता है कि सच्ची इज़्ज़त और ताकत अल्लाह की राह में एकजुट होने में है।
📜 आयत 26-30 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 28
सूरा आल-इमरान आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मोमिनीन मोमिनीन को छोड़ के काफ़िरों को अपना सरपरस्त न…सूरा आयत 28/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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