Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تُخْفُوا – छिपाओ, गुप्त रखो
- صُدُورِكُمْ – तुम्हारे सीने, तुम्हारे दिल
- تُبْدُوهُ – उसे प्रकट करो, ज़ाहिर करो
- يَعْلَمْهُ – वह उसे जान लेगा
- قَدِيرٌ – सर्वशक्तिमान, हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला
विस्तृत व्याख्या:
हे नबी! आप मुसलमानों से कह दीजिए कि चाहे तुम अपने दिलों की बातों को छिपाओ या उन्हें प्रकट करो, अल्लाह उन सबको खूब जानता है। यह आयत उस स्थिति के संदर्भ में उतरी जब कुछ मुसलमान अपने दिलों में काफिरों के प्रति मित्रता और सहानुभूति रखते थे, लेकिन उसे छिपाते थे। अल्लाह उन्हें चेतावनी दे रहा है कि उसके ज्ञान से कोई भी बात छिपी नहीं है—न वह जो सीने में दबी है, न वह जो ज़ुबान पर आती है।
अल्लाह का ज्ञान केवल इंसानों के दिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ को जानता है। कोई कण, कोई गति, कोई विचार, कोई इरादा—सब कुछ उसके ज्ञान के दायरे में है। जब वह पूरे ब्रह्मांड की हर छोटी-बड़ी चीज़ से अवगत है, तो उससे तुम्हारे दिलों की बातें कैसे छिप सकती हैं?
और अल्लाह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है। उसकी शक्ति असीम है—वह चाहे तो तुम्हें तुम्हारे छिपे इरादों का बदला दे, चाहे तो माफ कर दे। उसकी कुदरत से कोई चीज़ बाहर नहीं है। इसलिए मोमिनों को चाहिए कि वे अपने दिलों को काफिरों की मुहब्बत से पाक रखें, क्योंकि अल्लाह के सामने दिल का हाल साफ़ है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह का ज्ञान हर चीज़ पर छाया हुआ है – यह आयत हमें सिखाती है कि हमारे दिल की सबसे गहरी बातें भी अल्लाह से छिपी नहीं हैं। इसलिए हमें अपने विचारों और इरादों को भी पाक और सच्चा रखना चाहिए।
- दिल की पवित्रता ईमान का हिस्सा है – इस्लाम सिर्फ़ ज़ुबान और अमल का धर्म नहीं, बल्कि दिल की नीयत और भावनाओं का भी धर्म है। एक सच्चा मुसलमान वह है जो अपने दिल में भी अल्लाह की नाफ़रमानी से बचता है।
- अल्लाह की शक्ति पर भरोसा – जब हम जानते हैं कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, तो हमें किसी इंसान से डरने या उसकी खुशामद करने की ज़रूरत नहीं। हमारा भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर होना चाहिए।
- मोमिनों की पहचान – यह आयत मुसलमानों को यह सिखाती है कि वे काफिरों से दिली मुहब्बत न रखें, क्योंकि यह ईमान के खिलाफ़ है। दिल की सफ़ाई ही असली कामयाबी है।
- जवाबदेही का एहसास – यह जानना कि अल्लाह हमारे हर विचार और इरादे को जानता है, हमें गुनाहों से दूर रखता है और नेक कामों की तरफ़ रागिब करता है। यह हमारे अंदर तक़वा (परहेज़गारी) पैदा करता है।
📜 आयत 27-31 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 29
सूरा आल-इमरान आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ रसूल तुम उन (लोगों से) कह दो किजो कुछ…सूरा आयत 29/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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