अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تُولِجُ: तुम दाखिल करते हो, प्रवेश कराते हो।
- الْحَيَّ: जीवित को।
- الْمَيِّتِ: मृत को।
- بِغَيْرِ حِسَابٍ: बिना किसी हिसाब-किताब के, अर्थात असीमित और बिना किसी रोक-टोक के।
व्याख्या:
यह आयत अल्लाह तआला की असीम शक्ति और कुदरत के अद्भुत नमूनों को बयान करती है। अल्लाह ही है जो रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखिल करता है। इसका अर्थ यह है कि वह दिन और रात की अवधि को घटाता-बढ़ाता है; जब दिन लंबा होता है तो रात छोटी हो जाती है, और जब रात लंबी होती है तो दिन छोटा हो जाता है। यह बदलाव ऋतुओं के अनुसार लगातार होता रहता है, जो अल्लाह की पूर्ण योजना और प्रबंधन को दर्शाता है।
इसी प्रकार, अल्लाह जीवित को मृत से निकालता है, जैसे बीज से पौधा, अंडे से चूज़ा, और अंधेरे कब्र जैसे स्थानों से जीवन का प्रकट होना। वह मृत को जीवित से भी निकालता है, जैसे मुर्गी से अंडा, पेड़ से बीज, और एक इंसान से निर्जीव वस्तुओं का उत्पन्न होना। यहाँ एक और उदाहरण दिया गया है कि ईमानवाला (मोमिन) काफ़िर से पैदा होता है और काफ़िर मोमिन से, जो अल्लाह की इच्छा और कुदरत के आगे सब कुछ समर्पित है।
अंत में, अल्लाह कहता है कि वह जिसे चाहता है, बिना किसी हिसाब के रिज़्क़ (आजीविका) प्रदान करता है। यानी उसकी देन ऐसी है जिसे कोई सीमा या गणना में नहीं बाँध सकता; वह जिसे चाहता है, अपार और असीमित रूप से देता है, बिना किसी शर्त या प्रयास के।
फ़ायदे:
- यह आयत अल्लाह की कुदरत और उसके नियंत्रण पर गहरा ईमान लाने की तरफ़ ले जाती है। जो व्यक्ति दिन-रात के इस बदलाव और जीवन-मृत्यु के चक्र को देखता है, उसका दिल अल्लाह की अज़मत के सामने झुक जाता है।
- इससे यह सीख मिलती है कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है; वह विपरीत चीज़ों को भी एक-दूसरे से पैदा कर सकता है। यह हमें सिखाता है कि कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह मुश्किल से आसान, ग़म से ख़ुशी और मौत के बाद ज़िंदगी पैदा कर सकता है।
- रिज़्क़ में बिना हिसाब के देने का ज़िक्र हमें सिखाता है कि रिज़्क़ अल्लाह के हाथ में है, और उसकी देन किसी के प्रयास या योग्यता पर निर्भर नहीं, बल्कि उसकी मर्ज़ी पर है। इससे इंसान का भरोसा अल्लाह पर मज़बूत होता है और वह लालच, ईर्ष्या और दूसरों के पास देखकर जलने से बचता है।
- यह आयत मुसलमान को हर हाल में अल्लाह की तारीफ़ और उसके प्रति कृतज्ञता का पाठ पढ़ाती है, क्योंकि उसकी नेमतें और कुदरत के नमूने हर पल हमारे सामने हैं।
📜 आयत 25-29 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 27
सूरा आल-इमरान आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तू ही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल कर…सूरा आयत 27/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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