अर-रूम · 7/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रूम
يَعْلَمُونَ ظَاهِرًا مِّنَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَهُمْ عَنِ الْآخِرَةِ هُمْ غَافِلُونَ ۝٧
Ya`lamoona zaahiram minal hayaatid dunya wa hum `anil Aakhirati hum ghaafiloon
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग बस दुनियावी ज़िन्दगी की ज़ाहिरी हालत को जानते हैं और ये लोग आखेरत से बिल्कुल ग़ाफिल हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ظَاهِرًا: बाहरी पहलू, दिखावटी ज्ञान
  • الْحَيَاةِ الدُّنْيَا: सांसारिक जीवन
  • غَافِلُونَ: बेखबर, लापरवाह, ध्यान न देने वाले

तफसीर:

यह आयत उन लोगों की स्थिति का वर्णन करती है जो केवल इस दुनिया के बाहरी और सतही पहलुओं को जानते हैं। वे जीवन के उस हिस्से से वाकिफ हैं जो आँखों से दिखता है — धन कमाना, मकान बनाना, व्यापार करना, खान-पान, वस्त्र और अन्य सांसारिक सुख-साधन। वे इन्हीं चीज़ों में उलझकर रह गए हैं और इन्हीं को अपनी सफलता और असफलता का पैमाना बना लिया है।

लेकिन अफसोस! वे उस आख़िरत (परलोक) से पूरी तरह बेखबर हैं, जो वास्तविक और स्थायी जीवन है। वे इस बात पर कभी विचार नहीं करते कि यह दुनिया तो केवल एक अस्थायी ठिकाना है, एक परीक्षा का मैदान है। असली जीवन तो आने वाला है — वह जीवन जो कभी खत्म नहीं होगा। वे मृत्यु के बाद के जीवन, हिसाब-किताब, जन्नत और जहन्नम की सच्चाई से इस कदर गाफिल हैं जैसे उन्हें इस पर विश्वास ही न हो।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक समझदार इंसान वह है जो दुनिया और आख़िरत दोनों का ध्यान रखे। दुनिया की चीज़ें ज़रूरी हैं, लेकिन उन्हें ही सब कुछ समझ लेना और आख़िरत को भूल जाना — यही सबसे बड़ी नासमझी है। अल्लाह तआला ने हमें आँखें दीं ताकि हम उसकी निशानियों को देखें, दिमाग दिया ताकि हम सोचें, और दिल दिया ताकि हम सच्चाई को समझें। जो इन नेमतों का सही इस्तेमाल करता है, वह इस दुनिया में रहते हुए भी आख़िरत की तैयारी करता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में संतुलन बनाए रखें। दुनिया की कमाई करें, लेकिन साथ ही अपनी आख़िरत को भी संवारें। नमाज़, ज़कात, अच्छे आचरण और अल्लाह की याद — यही वे चीज़ें हैं जो हमें उस स्थायी जीवन में काम आएंगी। याद रखिए, यह दुनिया एक खेल और मनोरंजन है, और आख़िरत का घर ही सच्ची ज़िंदगी है। काश! हम सब इस सच्चाई को समझ लें और अपनी ज़िंदगी को इसी हिसाब से ढाल लें।



📜 आयत 5-9 — सूरा अर-रूम

5بِنَصْرِ اللَّهِ ۚ يَنصُرُ مَن يَشَاءُ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
वह जिसकी चाहता है मदद करता है और वह (सब पर) ग़ालिब रहम करने वाला है
6وَعْدَ اللَّهِ ۖ لَا يُخْلِفُ اللَّهُ وَعْدَهُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ये) ख़ुदा का वायदा है) ख़ुदा अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं किया करता मगर अकसर लोग नहीं जानते हैं
7يَعْلَمُونَ ظَاهِرًا مِّنَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَهُمْ عَنِ الْآخِرَةِ هُمْ غَافِلُونَ
ये लोग बस दुनियावी ज़िन्दगी की ज़ाहिरी हालत को जानते हैं और ये लोग आखेरत से बिल्कुल ग़ाफिल हैं
8أَوَلَمْ يَتَفَكَّرُوا فِي أَنفُسِهِم ۗ مَّا خَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَأَجَلٍ مُّسَمًّى ۗ وَإِنَّ كَثِيرًا مِّنَ النَّاسِ بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ لَكَافِرُونَ
क्या उन लोगों ने अपने दिल में (इतना भी) ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को और जो चीजे उन दोनों के दरमेयान में हैं बस बिल्कुल ठीक और एक मुक़र्रर मियाद के वास्ते पैदा किया है और कुछ शक नहीं कि बहुतेरे लोग तो अपने परवरदिगार की (बारगाह) के हुज़ूर में (क़यामत) ही को किसी तरह नहीं मानते
9أَوَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا أَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةً وَأَثَارُوا الْأَرْضَ وَعَمَرُوهَا أَكْثَرَ مِمَّا عَمَرُوهَا وَجَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ فَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
क्या ये लोग रुए ज़मीन पर चले फिरे नहीं कि देखते कि जो लोग इनसे पहले गुज़र गए उनका अन्जाम कैसा (बुरा) हुआ हालॉकि जो लोग उनसे पहले क़ूवत में भी कहीं ज्यादा थे और जिस क़दर ज़मीन उन लोगों ने आबाद की है उससे कहीं ज्यादा (ज़मीन की) उन लोगों ने काश्त भी की थी और उसको आबाद भी किया था और उनके पास भी उनके पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ चुके थे (मगर उन लोगों ने न माना) तो ख़ुदा ने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया मगर वह लोग (कुफ्र व सरकशी से) आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहे
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अनुवाद — अर-रूम 7

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Wednesday, September 30, 2026

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