अर-रूम · 6/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَعْدَ اللَّهِ ۖ لَا يُخْلِفُ اللَّهُ وَعْدَهُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ۝٦
Wa`dal laahi laa yukhliful laahu wa`dahoo wa laakin na aksaran naasi laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
(ये) ख़ुदा का वायदा है) ख़ुदा अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं किया करता मगर अकसर लोग नहीं जानते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَعْدَ اللَّهِ: अल्लाह का वादा (यहाँ अर्थ है अल्लाह का वह पक्का वादा जो उसने मोमिनों से किया)।
  • لَا يُخْلِفُ: वादा ख़िलाफ़ नहीं करता, पूरा करके ही रहता है।
  • لَا يَعْلَمُونَ: वे नहीं जानते (यानी उन्हें इसकी सच्चाई का ज्ञान नहीं)।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने मोमिन बंदों से एक पक्का और अटल वादा किया है कि रोम के ईसाइयों को फारस के आग-पूजने वालों पर जीत अवश्य दी जाएगी। यह कोई कमज़ोर या बदलने वाला वादा नहीं है, बल्कि अल्लाह का वादा सच्चा और अटल है। अल्लाह तआला अपने वादे को कभी नहीं तोड़ता, क्योंकि वह अपने वादे पर पूर्ण रूप से क़ादिर है और उसका ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है। जब यह वादा पूरा होगा, तो मोमिनों का विश्वास और अधिक मज़बूत होगा कि अल्लाह का हर वादा सच्चा है, चाहे उसमें कितनी भी देर क्यों न हो।

लेकिन अधिकतर लोग, विशेषकर मक्का के काफ़िर, इस हक़ीक़त को नहीं जानते। वे केवल दुनिया के ज़ाहिरी मामलों को देखते हैं, उसके दिखावे और सजावट में खोए रहते हैं, और आख़िरत की भलाई से ग़ाफ़िल हैं। वे नहीं सोचते कि अल्लाह का वादा कितना सच्चा और यक़ीनी है। उनकी नादानी की वजह से वे अल्लाह के वादे पर भरोसा नहीं करते और न ही उसकी सच्चाई को समझ पाते हैं।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला पर पूरा भरोसा रखें। जब अल्लाह कोई वादा करता है, तो वह उसे पूरा करके ही रहता है, चाहे उसमें देर ही क्यों न हो। दुनिया के हालात चाहे कितने भी उलटे-पुलटे क्यों न दिखें, अल्लाह का फ़ैसला हमेशा सच्चा और बेहतर होता है। हमें चाहिए कि हम दुनिया के ज़ाहिरी दिखावे में न खोएं, बल्कि अल्लाह के वादों पर यक़ीन रखें और आख़िरत की तैयारी करें। यही सच्ची कामयाबी है। अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता, और जो लोग इस पर यक़ीन रखते हैं, वही असल में दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होते हैं।



📜 आयत 4-8 — अर-रूम

4فِي بِضْعِ سِنِينَ ۗ لِلَّهِ الْأَمْرُ مِن قَبْلُ وَمِن بَعْدُ ۚ وَيَوْمَئِذٍ يَفْرَحُ الْمُؤْمِنُونَ
क्योंकि (इससे) पहले और बाद (ग़रज़ हर ज़माने में) हर अम्र का एख्तेयार ख़ुदा ही को है और उस दिन ईमानदार लोग ख़ुदा की मदद से खुश हो जाएँगे
5بِنَصْرِ اللَّهِ ۚ يَنصُرُ مَن يَشَاءُ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
वह जिसकी चाहता है मदद करता है और वह (सब पर) ग़ालिब रहम करने वाला है
6وَعْدَ اللَّهِ ۖ لَا يُخْلِفُ اللَّهُ وَعْدَهُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ये) ख़ुदा का वायदा है) ख़ुदा अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं किया करता मगर अकसर लोग नहीं जानते हैं
7يَعْلَمُونَ ظَاهِرًا مِّنَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَهُمْ عَنِ الْآخِرَةِ هُمْ غَافِلُونَ
ये लोग बस दुनियावी ज़िन्दगी की ज़ाहिरी हालत को जानते हैं और ये लोग आखेरत से बिल्कुल ग़ाफिल हैं
8أَوَلَمْ يَتَفَكَّرُوا فِي أَنفُسِهِم ۗ مَّا خَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَأَجَلٍ مُّسَمًّى ۗ وَإِنَّ كَثِيرًا مِّنَ النَّاسِ بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ لَكَافِرُونَ
क्या उन लोगों ने अपने दिल में (इतना भी) ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को और जो चीजे उन दोनों के दरमेयान में हैं बस बिल्कुल ठीक और एक मुक़र्रर मियाद के वास्ते पैदा किया है और कुछ शक नहीं कि बहुतेरे लोग तो अपने परवरदिगार की (बारगाह) के हुज़ूर में (क़यामत) ही को किसी तरह नहीं मानते
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अनुवाद — अर-रूम 6

सूरा अर-रूम आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये) ख़ुदा का वायदा है) ख़ुदा अपने वायदे के ख़िलाफ…

सूरा आयत 6/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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