अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- सुल्तान: अधिकार, प्रभुत्व, शक्ति
- लि-न'अलम: ताकि हम जान लें (अर्थात, ताकि प्रकट हो जाए)
- शक्क: संदेह, भ्रम
- हफ़ीज़: रक्षक, देखभाल करने वाला, निगरानी रखने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताता है कि शैतान (इब्लीस) का उन लोगों पर कोई वास्तविक अधिकार या ताक़त नहीं थी जिससे वह उन्हें ज़बरदस्ती कुफ़्र और गुमराही की ओर धकेल सके। शैतान के पास सिर्फ़ वसवसा (बुरे ख़यालात) डालने और बहकाने की कोशिश करने की इजाज़त थी, लेकिन उसे यह शक्ति कभी नहीं दी गई कि वह किसी को मजबूर कर दे।
अल्लाह ने शैतान को इंसानों को बहकाने की आज़माइश के तौर पर छोड़ रखा है, ताकि यह साफ़ हो जाए कि कौन सच्चे दिल से आख़िरत (क़यामत के दिन) पर ईमान रखता है और कौन उसके बारे में संदेह में पड़ा हुआ है। यह एक इम्तिहान है — जो लोग अपने ईमान में पक्के हैं, वे शैतान के बहकावे के बावजूद अल्लाह की राह पर क़ायम रहते हैं, और जिनके दिलों में आख़िरत के बारे में शक है, वे उसकी बातों में आकर गुमराह हो जाते हैं।
यानी शैतान सिर्फ़ एक वसीला (ज़रिया) है जिससे अल्लाह लोगों के दिलों की हालत ज़ाहिर करता है — कौन सच्चा मोमिन है और कौन शक्की। यह अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) का हिस्सा है कि ईमान और कुफ़्र की असली हक़ीक़त सामने आ जाए।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और तेरा रब हर चीज़ पर हफ़ीज़ है" — यानी अल्लाह हर चीज़ की निगरानी कर रहा है, वह हर इंसान के अमल (कर्म) को देख रहा है, चाहे वह अच्छा हो या बुरा। वह सब कुछ अपने हिफ़्ज़ (संरक्षण) में रखता है और हर किसी को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि शैतान से डरने की ज़रूरत नहीं, बल्कि अल्लाह से डरना चाहिए। शैतान की कोई असली ताक़त नहीं, वह सिर्फ़ वसवसा डालता है। असली ताक़त तो अल्लाह के हाथ में है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं और अपने ईमान में मज़बूत रहते हैं, उन पर शैतान का कोई असर नहीं हो सकता।
और यह भी याद रखें कि अल्लाह हर चीज़ का हाफ़िज़ है — वह हमारे हर अच्छे और बुरे काम को देख रहा है, और क़यामत के दिन हमें उसका पूरा हिसाब देना होगा। यही सच्चा ईमान है — आख़िरत पर यक़ीन रखना और यह जानना कि अल्लाह की निगरानी हर वक़्त हम पर है। यही ईमान इंसान को गुनाहों से बचाता है और नेक राह पर चलने की तौफ़ीक़ देता है।
📜 आयत 19-23 — सबा
अनुवाद — सबा 21
सूरा सबा आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और शैतान का उन लोगों पर कुछ क़ाबू तो था…सूरा आयत 21/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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