फातिर · 11/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
وَاللَّهُ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ جَعَلَكُمْ أَزْوَاجًا ۚ وَمَا تَحْمِلُ مِنْ أُنثَىٰ وَلَا تَضَعُ إِلَّا بِعِلْمِهِ ۚ وَمَا يُعَمَّرُ مِن مُّعَمَّرٍ وَلَا يُنقَصُ مِنْ عُمُرِهِ إِلَّا فِي كِتَابٍ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ ۝١١
Wallaahu khalaqakum min turaabin summa min nutfatin summa ja`alakum azwaajaa; wa maa tahmilu min unsaa wa laa tada`u illaa bi`ilmih; wa maa yu`ammaru mim mu`ammarinw wa laa yunqasu min `umuriheee illaa fee kitaab; inna zaalika `alal laahi yaseer
📖 हिंदी अर्थ
और खुदा ही ने तुम लोगों को (पहले पहल) मिट्टी से पैदा किया फिर नतफ़े से फिर तुमको जोड़ा (नर मादा) बनाया और बग़ैर उसके इल्म (इजाज़त) के न कोई औरत हमेला होती है और न जनती है और न किसी शख्स की उम्र में ज्यादती होती है और न किसी की उम्र से कमी की जाती है मगर वह किताब (लौहे महफूज़) में (ज़रूर) है बेशक ये बात खुदा पर बहुत ही आसान है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِن تُرَابٍ: मिट्टी से।
  • نُطْفَةٍ: वीर्य की बूँद (मनुष्य के उत्पत्ति का प्रारंभिक चरण)।
  • أَزْوَاجًا: नर और मादा (जोड़े)।
  • يُعَمَّرُ مِن مُعَمَّرٍ: जिसे लंबी उम्र दी जाए।
  • يُنقَصُ مِنْ عُمُرِهِ: उसकी उम्र में कमी की जाए।
  • اللَّوْحِ الْمَحْفُوظِ: वह सुरक्षित पुस्तक जिसमें सब कुछ लिखा हुआ है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी कुदरत और इल्म के नमूनों को बयान करते हुए फ़रमाता है कि उसी ने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया—यानी तुम्हारे पहले बाप आदम (अलैहिस्सलाम) को मिट्टी से बनाया। फिर उनकी नस्ल से तुम्हें वीर्य की एक बूँद से पैदा किया, और फिर तुम्हें नर और मादा (स्त्री-पुरुष) बनाया ताकि तुम आपस में मिलकर नस्ल बढ़ाओ। यह सब कुछ अल्लाह की मर्ज़ी और उसके इल्म से होता है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: कोई भी औरत न तो गर्भवती होती है और न ही बच्चे को जन्म देती है, मगर यह सब उसके इल्म से होता है। अल्लाह को हर गर्भ का हाल मालूम होता है—कब ठहरा, कब पैदा होगा, और उसकी किस्मत में क्या लिखा है। इसी तरह, जिसे लंबी उम्र मिलती है, वह उसके इल्म से ही मिलती है, और जिसकी उम्र घटाई जाती है, वह भी उसी के इल्म से होता है। यह सब कुछ लौह-ए-महफूज़ (सुरक्षित पुस्तक) में पहले से लिखा हुआ है, यहाँ तक कि हर इंसान की उम्र, उसके रिज़्क़ और उसके अमल का पूरा रिकॉर्ड अल्लाह के पास मौजूद है।

यह सब कुछ—चाहे तुम्हारी पैदाइश हो, तुम्हारी उम्र का बढ़ना-घटना हो, या तुम्हारे हर अमल का लिखा जाना हो—अल्लाह के लिए बिल्कुल आसान है। उसकी कुदरत के आगे यह सब कुछ बहुत ही सरल है, क्योंकि वही पैदा करने वाला, पालने वाला और सब कुछ जानने वाला है।


दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत और उसके इल्म पर गहरा ईमान लाने की तरफ बुलाती है। जब हम सोचते हैं कि हमारी पैदाइश मिट्टी से हुई, फिर एक बूँद से, और फिर हम इंसान बने—तो यह हमें अल्लाह की अज़मत का एहसास कराता है। हमारी उम्र, हमारी ज़िंदगी, हमारे हर कदम का हिसाब अल्लाह के पास है। यह हमें सब्र और शुक्र का सबक देती है—कि जब सब कुछ अल्लाह के इल्म में है, तो हमें उसी पर भरोसा रखना चाहिए और उसी की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारनी चाहिए।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह के इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है। हमारी हर साँस, हर पल, हर अच्छा या बुरा काम—सब उसके सामने है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को नेकी और तक़्वा पर बनानी चाहिए, क्योंकि एक दिन हमें अपने अमल का हिसाब देना है। अल्लाह की रहमत और उसकी कुदरत पर ईमान लाकर हम अपनी ज़िंदगी को सुकून और सही राह पर ले जा सकते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — फातिर

9وَاللَّهُ الَّذِي أَرْسَلَ الرِّيَاحَ فَتُثِيرُ سَحَابًا فَسُقْنَاهُ إِلَىٰ بَلَدٍ مَّيِّتٍ فَأَحْيَيْنَا بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ كَذَٰلِكَ النُّشُورُ
और ख़ुदा ही वह (क़ादिर व तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो हवाएँ बादलों को उड़ाए-उड़ाए फिरती है फिर हम उस बादल को मुर्दा (उफ़तादा) शहर की तरफ हका देते हैं फिर हम उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके मर जाने के बाद शादाब कर देते हैं यूँ ही (मुर्दों को क़यामत में जी उठना होगा)
10مَن كَانَ يُرِيدُ الْعِزَّةَ فَلِلَّهِ الْعِزَّةُ جَمِيعًا ۚ إِلَيْهِ يَصْعَدُ الْكَلِمُ الطَّيِّبُ وَالْعَمَلُ الصَّالِحُ يَرْفَعُهُ ۚ وَالَّذِينَ يَمْكُرُونَ السَّيِّئَاتِ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۖ وَمَكْرُ أُولَٰئِكَ هُوَ يَبُورُ
जो शख्स इज्ज़त का ख्वाहाँ हो तो ख़ुदा से माँगे क्योंकि सारी इज्ज़त खुदा ही की है उसकी बारगाह तक अच्छी बातें (बुलन्द होकर) पहुँचतीं हैं और अच्छे काम को वह खुद बुलन्द फरमाता है और जो लोग (तुम्हारे ख़िलाफ) बुरी-बुरी तदबीरें करते रहते हैं उनके लिए क़यामत में सख्त अज़ाब है और (आख़िर) उन लोगों की तदबीर मटियामेट हो जाएगी
11وَاللَّهُ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ جَعَلَكُمْ أَزْوَاجًا ۚ وَمَا تَحْمِلُ مِنْ أُنثَىٰ وَلَا تَضَعُ إِلَّا بِعِلْمِهِ ۚ وَمَا يُعَمَّرُ مِن مُّعَمَّرٍ وَلَا يُنقَصُ مِنْ عُمُرِهِ إِلَّا فِي كِتَابٍ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
और खुदा ही ने तुम लोगों को (पहले पहल) मिट्टी से पैदा किया फिर नतफ़े से फिर तुमको जोड़ा (नर मादा) बनाया और बग़ैर उसके इल्म (इजाज़त) के न कोई औरत हमेला होती है और न जनती है और न किसी शख्स की उम्र में ज्यादती होती है और न किसी की उम्र से कमी की जाती है मगर वह किताब (लौहे महफूज़) में (ज़रूर) है बेशक ये बात खुदा पर बहुत ही आसान है
12وَمَا يَسْتَوِي الْبَحْرَانِ هَٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ سَائِغٌ شَرَابُهُ وَهَٰذَا مِلْحٌ أُجَاجٌ ۖ وَمِن كُلٍّ تَأْكُلُونَ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُونَ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَا ۖ وَتَرَى الْفُلْكَ فِيهِ مَوَاخِرَ لِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
(उसकी कुदरत देखो) दो समन्दर बावजूद मिल जाने के यकसाँ नहीं हो जाते ये (एक तो) मीठा खुश ज़ाएका कि उसका पीना सुवारत (ख़ुश्गवार) है और ये (दूसरा) खारी कड़ुवा है और (इस इख़तेलाफ पर भी) तुम लोग दोनों से (मछली का) तरो ताज़ा गोश्त (यकसाँ) खाते हो और (अपने लिए ज़ेवरात (मोती वग़ैरह) निकालते हो जिन्हें तुम पहनते हो और तुम देखते हो कि कश्तियां दरिया में (पानी को) फाड़ती चली जाती हैं ताकि उसके फज्ल (व करम तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम लोग शुक्र करो
13يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ لَهُ الْمُلْكُ ۚ وَالَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِهِ مَا يَمْلِكُونَ مِن قِطْمِيرٍ
वही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल करता है (तो रात बढ़ जाती है) और वही दिन को (बढ़ा के) रात में दाख़िल करता है (तो दिन बढ़ जाता है और) उसी ने सूरज और चाँद को अपना मुतीइ बना रखा है कि हर एक अपने (अपने) मुअय्यन (तय) वक्त पर चला करता है वही खुदा तुम्हारा परवरदिगार है उसी की सलतनत है और उसे छोड़कर जिन माबूदों को तुम पुकारते हो वह छुवारों की गुठली की झिल्ली के बराबर भी तो इख़तेयार नहीं रखते
फातिरकुरान सूची
45आयत
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11आयत

अनुवाद — फातिर 11

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Tuesday, August 18, 2026

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