Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مِن تُرَابٍ: मिट्टी से।
- نُطْفَةٍ: वीर्य की बूँद (मनुष्य के उत्पत्ति का प्रारंभिक चरण)।
- أَزْوَاجًا: नर और मादा (जोड़े)।
- يُعَمَّرُ مِن مُعَمَّرٍ: जिसे लंबी उम्र दी जाए।
- يُنقَصُ مِنْ عُمُرِهِ: उसकी उम्र में कमी की जाए।
- اللَّوْحِ الْمَحْفُوظِ: वह सुरक्षित पुस्तक जिसमें सब कुछ लिखा हुआ है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपनी कुदरत और इल्म के नमूनों को बयान करते हुए फ़रमाता है कि उसी ने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया—यानी तुम्हारे पहले बाप आदम (अलैहिस्सलाम) को मिट्टी से बनाया। फिर उनकी नस्ल से तुम्हें वीर्य की एक बूँद से पैदा किया, और फिर तुम्हें नर और मादा (स्त्री-पुरुष) बनाया ताकि तुम आपस में मिलकर नस्ल बढ़ाओ। यह सब कुछ अल्लाह की मर्ज़ी और उसके इल्म से होता है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: कोई भी औरत न तो गर्भवती होती है और न ही बच्चे को जन्म देती है, मगर यह सब उसके इल्म से होता है। अल्लाह को हर गर्भ का हाल मालूम होता है—कब ठहरा, कब पैदा होगा, और उसकी किस्मत में क्या लिखा है। इसी तरह, जिसे लंबी उम्र मिलती है, वह उसके इल्म से ही मिलती है, और जिसकी उम्र घटाई जाती है, वह भी उसी के इल्म से होता है। यह सब कुछ लौह-ए-महफूज़ (सुरक्षित पुस्तक) में पहले से लिखा हुआ है, यहाँ तक कि हर इंसान की उम्र, उसके रिज़्क़ और उसके अमल का पूरा रिकॉर्ड अल्लाह के पास मौजूद है।
यह सब कुछ—चाहे तुम्हारी पैदाइश हो, तुम्हारी उम्र का बढ़ना-घटना हो, या तुम्हारे हर अमल का लिखा जाना हो—अल्लाह के लिए बिल्कुल आसान है। उसकी कुदरत के आगे यह सब कुछ बहुत ही सरल है, क्योंकि वही पैदा करने वाला, पालने वाला और सब कुछ जानने वाला है।
दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):
यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत और उसके इल्म पर गहरा ईमान लाने की तरफ बुलाती है। जब हम सोचते हैं कि हमारी पैदाइश मिट्टी से हुई, फिर एक बूँद से, और फिर हम इंसान बने—तो यह हमें अल्लाह की अज़मत का एहसास कराता है। हमारी उम्र, हमारी ज़िंदगी, हमारे हर कदम का हिसाब अल्लाह के पास है। यह हमें सब्र और शुक्र का सबक देती है—कि जब सब कुछ अल्लाह के इल्म में है, तो हमें उसी पर भरोसा रखना चाहिए और उसी की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारनी चाहिए।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह के इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है। हमारी हर साँस, हर पल, हर अच्छा या बुरा काम—सब उसके सामने है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को नेकी और तक़्वा पर बनानी चाहिए, क्योंकि एक दिन हमें अपने अमल का हिसाब देना है। अल्लाह की रहमत और उसकी कुदरत पर ईमान लाकर हम अपनी ज़िंदगी को सुकून और सही राह पर ले जा सकते हैं।
📜 आयत 9-13 — सूरा फातिर
अनुवाद — फातिर 11
सूरा फातिर आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और खुदा ही ने तुम लोगों को (पहले पहल) मिट्टी…सूरा आयत 11/45 — सूरा फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फातिर सुनें, सूरा फातिर अनुवाद, सूरा फातिर mp3, सूरा फातिर pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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