अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- العزة (इज़्ज़त): प्रतिष्ठा, सम्मान, शक्ति और गौरव।
- الكلم الطيب (कलिम तैय्यिब): पवित्र वचन, जैसे "ला इलाहा इल्लल्लाह" (अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं) और अन्य पुण्यमयी बातें।
- يرفعه (यरफ़उहु): उसे ऊपर उठाता है, अर्थात अल्लाह उसे स्वीकार करता है और उसका दर्जा बढ़ाता है।
- يمكرون (यमकुरून): चालें चलते हैं, बुरी साज़िशें करते हैं।
- يبور (यबूर): नष्ट हो जाता है, बेकार और बेकार हो जाता है, घाटे में रहता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत एक बहुत ही महत्वपूर्ण सत्य को स्पष्ट करती है: जो कोई भी इज़्ज़त (प्रतिष्ठा और सम्मान) चाहता है—चाहे वह दुनिया में हो या आख़िरत में—उसे यह समझ लेना चाहिए कि पूरी इज़्ज़त और सारी शक्ति केवल अल्लाह के हाथ में है। वही सबसे बड़ा सम्मान देने वाला और अपमानित करने वाला है। जो व्यक्ति किसी मख़लूक़ (प्राणी) से इज़्ज़त पाने की कोशिश करता है, अल्लाह उसे अपमानित कर देता है; और जो अल्लाह से इज़्ज़त माँगता है और उसकी आज्ञा का पालन करता है, अल्लाह उसे सच्ची इज़्ज़त प्रदान करता है। इसलिए इज़्ज़त का सही रास्ता यही है कि इसे केवल अल्लाह से माँगा जाए और उसकी इबादत और आज्ञाकारिता में जीवन बिताया जाए।
फिर अल्लाह तआला बताते हैं कि पवित्र वचन (जैसे कलिमा-ए-तैय्यिबा, ज़िक्र, तस्बीह, और अच्छी बातें) अल्लाह की ओर ऊपर उठते हैं। लेकिन अकेले ज़बान से कहना काफ़ी नहीं है; सच्चा नेक अमल (पुण्य कर्म) ही उन वचनों को ऊपर उठाता है और अल्लाह के यहाँ स्वीकार्य बनाता है। यानी जब कोई व्यक्ति ईमान की गवाही देता है और उसके साथ नेक कर्म करता है, तो उसका अमल उसके ईमान को ऊपर उठाता है और अल्लाह उसे क़बूल करता है। यह एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है कि हमारे अच्छे कर्म हमारे दर्जे बुलंद करते हैं और हमें अल्लाह के करीब लाते हैं।
इसके बाद अल्लाह तआला उन लोगों के बारे में बताते हैं जो बुरी साज़िशें करते हैं—जैसे कि मक्का के मुशरिकों ने पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को नुक़सान पहुँचाने और उनका दीन मिटाने की कोशिशें कीं। ऐसे लोगों के लिए सख़्त अज़ाब है। उनकी सारी चालें और साज़िशें अल्लाह के सामने बेकार और नष्ट हो जाएँगी। उनका मक्र (चाल) उन्हें कोई फ़ायदा नहीं पहुँचाएगा, बल्कि उल्टा उन्हीं के लिए हानिकारक साबित होगा। अल्लाह की योजना सबसे मज़बूत है और वह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि असली इज़्ज़त और कामयाबी अल्लाह की राह में है। आज दुनिया में लोग धन, पद, और ताक़त को इज़्ज़त का ज़रिया समझते हैं, लेकिन ये सब चीज़ें फ़ानी हैं। जो इंसान अल्लाह से जुड़ता है, उसकी ज़ुबान पाक होती है और उसके अमल नेक होते हैं, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में सच्ची इज़्ज़त देता है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान को अच्छी बातों से सजाएँ और अपने अमल को नेक बनाएँ, ताकि हमारे वचन और कर्म अल्लाह तक पहुँचें और हमें उसकी रहमत और मग़फ़िरत मिले। याद रखें, बुरी चालें और साज़िशें कभी कामयाब नहीं होतीं, जबकि सच्चाई और नेकी हमेशा बुलंद होती है।
📜 आयत 8-12 — फातिर
अनुवाद — फातिर 10
सूरा फातिर आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो शख्स इज्ज़त का ख्वाहाँ हो तो ख़ुदा से माँगे…सूरा आयत 10/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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