फातिर · 12/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा फातिर
وَمَا يَسْتَوِي الْبَحْرَانِ هَٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ سَائِغٌ شَرَابُهُ وَهَٰذَا مِلْحٌ أُجَاجٌ ۖ وَمِن كُلٍّ تَأْكُلُونَ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُونَ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَا ۖ وَتَرَى الْفُلْكَ فِيهِ مَوَاخِرَ لِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ ۝١٢
Wa maa yastawil bahraani haaza `azbun furaatun saaa`ighun sharaabuhoo wa haazaa milhun ujaaj; wa min kullin taakuloona lahman tariyyanw wa tastakhrijoona hilyatan talbasoonahaa wa taral fulka feehi mawaakhira litabtaghoo min fadlihee wa la`allakm tashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
(उसकी कुदरत देखो) दो समन्दर बावजूद मिल जाने के यकसाँ नहीं हो जाते ये (एक तो) मीठा खुश ज़ाएका कि उसका पीना सुवारत (ख़ुश्गवार) है और ये (दूसरा) खारी कड़ुवा है और (इस इख़तेलाफ पर भी) तुम लोग दोनों से (मछली का) तरो ताज़ा गोश्त (यकसाँ) खाते हो और (अपने लिए ज़ेवरात (मोती वग़ैरह) निकालते हो जिन्हें तुम पहनते हो और तुम देखते हो कि कश्तियां दरिया में (पानी को) फाड़ती चली जाती हैं ताकि उसके फज्ल (व करम तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम लोग शुक्र करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَذْبٌ فُرَاتٌ: अत्यंत मीठा और प्यास बुझाने वाला।
  • سَائِغٌ شَرَابُهُ: जिसका पीना आसान और गले से उतरने में सरल हो।
  • مِلْحٌ أُجَاجٌ: अत्यधिक नमकीन और कड़वा, जिसे पीना असंभव हो।
  • مَوَاخِرَ: समुद्र को चीरती हुई (नावें)।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी कुदरत के अज़ीम नमूनों की तरफ हमारा ध्यान दिलाते हुए फ़रमाता है कि दो समुद्र (पानी के भंडार) कभी एक जैसे नहीं हो सकते। एक समुद्र मीठा और अत्यंत स्वादिष्ट होता है, जो प्यास बुझाता है और जिसे पीना गले के लिए आसान और खुशगवार होता है। दूसरा समुद्र खारा और कड़वा होता है, जो पीने के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं होता। लेकिन अल्लाह की रहमत और कुदरत का करिश्मा देखिए कि इन दोनों समुद्रों से ही इंसान को फायदे पहुँचते हैं। दोनों से तुम ताज़ा और नर्म मछली खाते हो, जो खाने में बेहद लज़ीज़ होती है। और खारे समुद्र से तुम मोती और मूंगा (प्रवाल) निकालते हो, जिन्हें तुम ज़ेवर के तौर पर पहनते हो। यह अल्लाह की बड़ी नेमत है कि उसने समुद्र को इंसान के लिए रिज़्क़ और ज़ीनत का ज़रिया बनाया।

और तुम देखते हो कि बड़ी-बड़ी नावें और जहाज़ समुद्र में चलते हैं, पानी को चीरती हुई, अपने सफर पर जाती और आती हैं। यह सब अल्लाह के इशारे और उसकी ताक़त से होता है, ताकि तुम उसका फज़ल (रिज़्क़) तलाश करो — व्यापार और दूसरे ज़रूरी कामों के लिए सफर करो। और यह सब कुछ इसलिए है कि तुम अल्लाह का शुक्र अदा करो, उसकी नेमतों को पहचानो और उसकी इबादत में लगे रहो।

यहाँ अल्लाह तआला हमें सोचने की दावत देता है कि जिस तरह मीठा और खारा पानी एक जैसे नहीं होते, लेकिन दोनों में इंसान के लिए फायदे रखे गए हैं, उसी तरह मोमिन और काफिर भी एक जैसे नहीं हैं। मोमिन का दिल ईमान की मिठास से भरा होता है, जबकि काफिर का दिल कुफ्र की कड़वाहट में डूबा होता है। लेकिन अल्लाह की रहमत यह है कि वह हर इंसान को हिदायत का रास्ता दिखाता है और तौबा करने वालों को माफ कर देता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की कुदरत के नज़ारों पर गौर करें, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक बनाएं। समुद्र की ये नेमतें हमें याद दिलाती हैं कि अल्लाह जिस पर चाहे रिज़्क़ खोल देता है और वही सब कुछ करने पर कादिर है। हमें चाहिए कि इन नेमतों को देखकर अल्लाह की तारीफ करें और उसके बताए रास्ते पर चलें, ताकि दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी हासिल हो।



📜 आयत 10-14 — सूरा फातिर

10مَن كَانَ يُرِيدُ الْعِزَّةَ فَلِلَّهِ الْعِزَّةُ جَمِيعًا ۚ إِلَيْهِ يَصْعَدُ الْكَلِمُ الطَّيِّبُ وَالْعَمَلُ الصَّالِحُ يَرْفَعُهُ ۚ وَالَّذِينَ يَمْكُرُونَ السَّيِّئَاتِ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۖ وَمَكْرُ أُولَٰئِكَ هُوَ يَبُورُ
जो शख्स इज्ज़त का ख्वाहाँ हो तो ख़ुदा से माँगे क्योंकि सारी इज्ज़त खुदा ही की है उसकी बारगाह तक अच्छी बातें (बुलन्द होकर) पहुँचतीं हैं और अच्छे काम को वह खुद बुलन्द फरमाता है और जो लोग (तुम्हारे ख़िलाफ) बुरी-बुरी तदबीरें करते रहते हैं उनके लिए क़यामत में सख्त अज़ाब है और (आख़िर) उन लोगों की तदबीर मटियामेट हो जाएगी
11وَاللَّهُ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ جَعَلَكُمْ أَزْوَاجًا ۚ وَمَا تَحْمِلُ مِنْ أُنثَىٰ وَلَا تَضَعُ إِلَّا بِعِلْمِهِ ۚ وَمَا يُعَمَّرُ مِن مُّعَمَّرٍ وَلَا يُنقَصُ مِنْ عُمُرِهِ إِلَّا فِي كِتَابٍ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
और खुदा ही ने तुम लोगों को (पहले पहल) मिट्टी से पैदा किया फिर नतफ़े से फिर तुमको जोड़ा (नर मादा) बनाया और बग़ैर उसके इल्म (इजाज़त) के न कोई औरत हमेला होती है और न जनती है और न किसी शख्स की उम्र में ज्यादती होती है और न किसी की उम्र से कमी की जाती है मगर वह किताब (लौहे महफूज़) में (ज़रूर) है बेशक ये बात खुदा पर बहुत ही आसान है
12وَمَا يَسْتَوِي الْبَحْرَانِ هَٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ سَائِغٌ شَرَابُهُ وَهَٰذَا مِلْحٌ أُجَاجٌ ۖ وَمِن كُلٍّ تَأْكُلُونَ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُونَ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَا ۖ وَتَرَى الْفُلْكَ فِيهِ مَوَاخِرَ لِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
(उसकी कुदरत देखो) दो समन्दर बावजूद मिल जाने के यकसाँ नहीं हो जाते ये (एक तो) मीठा खुश ज़ाएका कि उसका पीना सुवारत (ख़ुश्गवार) है और ये (दूसरा) खारी कड़ुवा है और (इस इख़तेलाफ पर भी) तुम लोग दोनों से (मछली का) तरो ताज़ा गोश्त (यकसाँ) खाते हो और (अपने लिए ज़ेवरात (मोती वग़ैरह) निकालते हो जिन्हें तुम पहनते हो और तुम देखते हो कि कश्तियां दरिया में (पानी को) फाड़ती चली जाती हैं ताकि उसके फज्ल (व करम तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम लोग शुक्र करो
13يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ لَهُ الْمُلْكُ ۚ وَالَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِهِ مَا يَمْلِكُونَ مِن قِطْمِيرٍ
वही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल करता है (तो रात बढ़ जाती है) और वही दिन को (बढ़ा के) रात में दाख़िल करता है (तो दिन बढ़ जाता है और) उसी ने सूरज और चाँद को अपना मुतीइ बना रखा है कि हर एक अपने (अपने) मुअय्यन (तय) वक्त पर चला करता है वही खुदा तुम्हारा परवरदिगार है उसी की सलतनत है और उसे छोड़कर जिन माबूदों को तुम पुकारते हो वह छुवारों की गुठली की झिल्ली के बराबर भी तो इख़तेयार नहीं रखते
14إِن تَدْعُوهُمْ لَا يَسْمَعُوا دُعَاءَكُمْ وَلَوْ سَمِعُوا مَا اسْتَجَابُوا لَكُمْ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكْفُرُونَ بِشِرْكِكُمْ ۚ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثْلُ خَبِيرٍ
अगर तुम उनको पुकारो तो वह तुम्हारी पुकार को सुनते नहीं अगर (बिफ़रज़े मुहाल) सुनों भी तो तुम्हारी दुआएँ नहीं कुबूल कर सकते और क़यामत के दिन तुम्हारे शिर्क से इन्कार कर बैठेंगें और वाक़िफकार (शख्स की तरह कोई दूसरा उनकी पूरी हालत) तुम्हें बता नहीं सकता
फातिरकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — फातिर 12

सूरा फातिर आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उसकी कुदरत देखो) दो समन्दर बावजूद मिल जाने के यकसाँ…

सूरा आयत 12/45 — सूरा फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फातिर सुनें, सूरा फातिर अनुवाद, सूरा फातिर mp3, सूरा फातिर pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए