फातिर · 29/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
إِنَّ الَّذِينَ يَتْلُونَ كِتَابَ اللَّهِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً يَرْجُونَ تِجَارَةً لَّن تَبُورَ ۝٢٩
Innal lazeena yatloona Kitabbal laahi wa aqaamus Salaata wa anfaqoo mimmaa razaqnaahum sirranw wa `alaa niyatany yarjoona tijaaratal lan taboor
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग Âुदा की किताब पढ़ा करते हैं और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं और जो कुछ हमने उन्हें अता किया है उसमें से छिपा के और दिखा के (खुदा की राह में) देते हैं वह यक़ीनन ऐसे व्यापार का आसरा रखते हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَتْلُونَ – पढ़ते हैं, पाठ करते हैं
  • أَقَامُوا الصَّلَاةَ – नमाज़ को पूरी शर्तों के साथ क़ायम करते हैं
  • أَنفَقُوا – खर्च करते हैं
  • سِرًّا وَعَلَانِيَةً – छिपकर और खुले तौर पर
  • يَرْجُونَ – आशा रखते हैं
  • تِجَارَةً لَّن تَبُورَ – ऐसा व्यापार जो कभी बर्बाद न हो

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में उन मोमिन बंदों की खूबियाँ बयान फ़रमा रहे हैं जो सच्चे व्यापारी हैं — वे उस व्यापार में लगे हैं जो कभी घाटे में नहीं जाता। ये वे लोग हैं जो अल्लाह की किताब (क़ुरआन) को पढ़ते हैं, उस पर अमल करते हैं, और उसे अपनी ज़िंदगी का नक्शा बनाते हैं। वे सिर्फ़ पढ़ते ही नहीं, बल्कि उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं और उसकी तालीमात को अपने अमल में लाते हैं।

फिर अल्लाह ने उनकी दूसरी खूबी बयान की — वे नमाज़ को उसके पूरे तरीक़े, शर्तों और अदब के साथ क़ायम करते हैं। नमाज़ उनके दिल को अल्लाह से जोड़ती है और उन्हें बुराई से रोकती है। यह नमाज़ सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि उनके ईमान की ज़िंदगी का सबूत है।

तीसरी खूबी यह है कि वे अल्लाह ने जो रिज़्क़ दिया है, उसमें से खर्च करते हैं — चाहे वह ज़कात हो या नफ़्ली सदक़ा — और यह खर्च कभी छिपकर करते हैं तो कभी खुले तौर पर। छिपकर खर्च करने से रिया (दिखावा) से बचाव होता है, और खुले तौर पर खर्च करने से दूसरों को भी नेकी की तरग़ीब मिलती है।

ये तीनों अमल — क़ुरआन की तिलावत, नमाज़ की पाबंदी और अल्लाह की राह में खर्च — ये सब वे इस उम्मीद से करते हैं कि उन्हें अल्लाह के पास ऐसा व्यापार मिलेगा जो कभी बर्बाद नहीं होगा। यह व्यापार है — अल्लाह की रज़ा, उसका दीदार और जन्नत की नेअमतें। दुनिया का हर व्यापार कभी न कभी घाटे में जाता है, लेकिन अल्लाह के साथ का यह व्यापार ऐसा है जिसमें सिर्फ़ नफ़ा है, कोई घाटा नहीं।

अल्लाह इस व्यापार का बदला उन्हें पूरा-पूरा देगा, बल्कि अपने फज़ल से और बढ़ाकर देगा। वह उनकी छोटी-छोटी नेकियों को भी बड़ा अज्र देता है और उनकी ग़लतियों को माफ़ कर देता है। वह ग़फ़ूर है — गुनाहों को माफ़ करने वाला, और शकूर है — नेकियों की क़द्र करने वाला और उनका भरपूर बदला देने वाला।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम सिर्फ़ ईमान का दावा नहीं है, बल्कि अमल का नाम है। जो व्यक्ति क़ुरआन पढ़ता है, नमाज़ पढ़ता है और अल्लाह की राह में खर्च करता है — वह असल में अपने लिए एक ऐसा ख़ज़ाना जमा कर रहा है जो कभी ख़त्म नहीं होगा। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया की फ़िक्रों से निकालकर आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। आओ, हम भी इसी व्यापार में लगें — क़ुरआन को अपना साथी बनाएँ, नमाज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, और अल्लाह की राह में खर्च करने की आदत डालें। यक़ीनन यही वह व्यापार है जो कभी बर्बाद नहीं होता।



📜 आयत 27-31 — फातिर

27أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجْنَا بِهِ ثَمَرَاتٍ مُّخْتَلِفًا أَلْوَانُهَا ۚ وَمِنَ الْجِبَالِ جُدَدٌ بِيضٌ وَحُمْرٌ مُّخْتَلِفٌ أَلْوَانُهَا وَغَرَابِيبُ سُودٌ
अब क्या तुमने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि यक़ीनन खुदा ही ने आसमान से पानी बरसाया फिर हम (खुदा) ने उसके ज़रिए से तरह-तरह की रंगतों के फल पैदा किए और पहाड़ों में क़तआत (टुकड़े रास्ते) हैं जिनके रंग मुख़तलिफ है कुछ तो सफेद (बुर्राक़) और कुछ लाल (लाल) और कुछ बिल्कुल काले सियाह
28وَمِنَ النَّاسِ وَالدَّوَابِّ وَالْأَنْعَامِ مُخْتَلِفٌ أَلْوَانُهُ كَذَٰلِكَ ۗ إِنَّمَا يَخْشَى اللَّهَ مِنْ عِبَادِهِ الْعُلَمَاءُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ غَفُورٌ
और इसी तरह आदमियों और जानवरों और चारपायों की भी रंगते तरह-तरह की हैं उसके बन्दों में ख़ुदा का ख़ौफ करने वाले तो बस उलेमा हैं बेशक खुदा (सबसे) ग़ालिब और बख्शने वाला है
29إِنَّ الَّذِينَ يَتْلُونَ كِتَابَ اللَّهِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً يَرْجُونَ تِجَارَةً لَّن تَبُورَ
बेशक जो लोग Âुदा की किताब पढ़ा करते हैं और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं और जो कुछ हमने उन्हें अता किया है उसमें से छिपा के और दिखा के (खुदा की राह में) देते हैं वह यक़ीनन ऐसे व्यापार का आसरा रखते हैं
30لِيُوَفِّيَهُمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِ ۚ إِنَّهُ غَفُورٌ شَكُورٌ
जिसका कभी टाट न उलटेगा ताकि खुदा उन्हें उनकी मज़दूरियाँ भरपूर अता करे बल्कि अपने फज़ल (व करम) से उसे कुछ और बढ़ा देगा बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है (और) बड़ा क़द्रदान है
31وَالَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ مِنَ الْكِتَابِ هُوَ الْحَقُّ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ بِعِبَادِهِ لَخَبِيرٌ بَصِيرٌ
और हमने जो किताब तुम्हारे पास ''वही'' के ज़रिए से भेजी वह बिल्कुल ठीक है और जो (किताबें इससे पहले की) उसके सामने (मौजूद) हैं उनकी तसदीक़ भी करती हैं - बेशक खुदा अपने बन्दों (के हालात) से खूब वाक़िफ है (और) देख रहा है
फातिरकुरान सूची
45आयत
मक्कीRevelation
29आयत

अनुवाद — फातिर 29

सूरा फातिर आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग Âुदा की किताब पढ़ा करते हैं और…

सूरा आयत 29/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए