Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَتْلُونَ – पढ़ते हैं, पाठ करते हैं
- أَقَامُوا الصَّلَاةَ – नमाज़ को पूरी शर्तों के साथ क़ायम करते हैं
- أَنفَقُوا – खर्च करते हैं
- سِرًّا وَعَلَانِيَةً – छिपकर और खुले तौर पर
- يَرْجُونَ – आशा रखते हैं
- تِجَارَةً لَّن تَبُورَ – ऐसा व्यापार जो कभी बर्बाद न हो
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में उन मोमिन बंदों की खूबियाँ बयान फ़रमा रहे हैं जो सच्चे व्यापारी हैं — वे उस व्यापार में लगे हैं जो कभी घाटे में नहीं जाता। ये वे लोग हैं जो अल्लाह की किताब (क़ुरआन) को पढ़ते हैं, उस पर अमल करते हैं, और उसे अपनी ज़िंदगी का नक्शा बनाते हैं। वे सिर्फ़ पढ़ते ही नहीं, बल्कि उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं और उसकी तालीमात को अपने अमल में लाते हैं।
फिर अल्लाह ने उनकी दूसरी खूबी बयान की — वे नमाज़ को उसके पूरे तरीक़े, शर्तों और अदब के साथ क़ायम करते हैं। नमाज़ उनके दिल को अल्लाह से जोड़ती है और उन्हें बुराई से रोकती है। यह नमाज़ सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि उनके ईमान की ज़िंदगी का सबूत है।
तीसरी खूबी यह है कि वे अल्लाह ने जो रिज़्क़ दिया है, उसमें से खर्च करते हैं — चाहे वह ज़कात हो या नफ़्ली सदक़ा — और यह खर्च कभी छिपकर करते हैं तो कभी खुले तौर पर। छिपकर खर्च करने से रिया (दिखावा) से बचाव होता है, और खुले तौर पर खर्च करने से दूसरों को भी नेकी की तरग़ीब मिलती है।
ये तीनों अमल — क़ुरआन की तिलावत, नमाज़ की पाबंदी और अल्लाह की राह में खर्च — ये सब वे इस उम्मीद से करते हैं कि उन्हें अल्लाह के पास ऐसा व्यापार मिलेगा जो कभी बर्बाद नहीं होगा। यह व्यापार है — अल्लाह की रज़ा, उसका दीदार और जन्नत की नेअमतें। दुनिया का हर व्यापार कभी न कभी घाटे में जाता है, लेकिन अल्लाह के साथ का यह व्यापार ऐसा है जिसमें सिर्फ़ नफ़ा है, कोई घाटा नहीं।
अल्लाह इस व्यापार का बदला उन्हें पूरा-पूरा देगा, बल्कि अपने फज़ल से और बढ़ाकर देगा। वह उनकी छोटी-छोटी नेकियों को भी बड़ा अज्र देता है और उनकी ग़लतियों को माफ़ कर देता है। वह ग़फ़ूर है — गुनाहों को माफ़ करने वाला, और शकूर है — नेकियों की क़द्र करने वाला और उनका भरपूर बदला देने वाला।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम सिर्फ़ ईमान का दावा नहीं है, बल्कि अमल का नाम है। जो व्यक्ति क़ुरआन पढ़ता है, नमाज़ पढ़ता है और अल्लाह की राह में खर्च करता है — वह असल में अपने लिए एक ऐसा ख़ज़ाना जमा कर रहा है जो कभी ख़त्म नहीं होगा। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया की फ़िक्रों से निकालकर आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। आओ, हम भी इसी व्यापार में लगें — क़ुरआन को अपना साथी बनाएँ, नमाज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, और अल्लाह की राह में खर्च करने की आदत डालें। यक़ीनन यही वह व्यापार है जो कभी बर्बाद नहीं होता।
📜 आयत 27-31 — सूरा फातिर
अनुवाद — फातिर 29
सूरा फातिर आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग Âुदा की किताब पढ़ा करते हैं और…सूरा आयत 29/45 — सूरा फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फातिर सुनें, सूरा फातिर अनुवाद, सूरा फातिर mp3, सूरा फातिर pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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