Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِيُوَفِّيَهُمْ: उन्हें पूरा-पूरा बदला देने के लिए।
- أُجُورَهُمْ: उनके कर्मों का प्रतिफल (बदला)।
- مِن فَضْلِهِ: अपनी ओर से अतिरिक्त अनुग्रह और कृपा।
- غَفُورٌ: अत्यधिक क्षमा करने वाला।
- شَكُورٌ: अधिक आभार स्वीकार करने वाला, अच्छे कर्मों का भरपूर बदला देने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन पवित्र लोगों के बारे में बताती है जो क़ुरआन पढ़ते हैं, उस पर अमल करते हैं, नमाज़ को उसके समय पर बड़ी पाबंदी से अदा करते हैं, और अल्लाह ने जो रोज़ी (जीविका) दी है उसमें से छिपे और खुले तौर पर खर्च करते हैं। ऐसे लोगों की यही आशा होती है कि उनका यह व्यापार कभी घाटे में नहीं जाएगा — वह व्यापार जो अल्लाह की रज़ा (खुशी) और उसके महान प्रतिफल की प्राप्ति के लिए होता है।
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि यह सब कुछ इसलिए है ताकि अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला दे, जिसमें कोई कमी न हो, और फिर अपनी ओर से अतिरिक्त अनुग्रह से उन्हें और भी अधिक दे — इतना कि जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह अतिरिक्त देना अल्लाह का अपना फज़ल (कृपा) है, जो उसके बंदों पर उसकी असीम मेहरबानी का प्रमाण है।
अल्लाह तआला ग़फ़ूर है — वह अपने बंदों की कमियों और गुनाहों को क्षमा कर देता है, और शकूर है — वह छोटे से छोटे अच्छे कर्म को भी स्वीकार करता है और उसका बदला कई गुना बढ़ाकर देता है। यह अल्लाह का बड़ा ही प्यारा गुण है कि वह अपने बंदों के अच्छे कामों की क़द्र करता है और उन्हें भरपूर इनाम देता है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की छोटी-छोटी नेकियों को भी कभी बेकार नहीं जाने देता। जो व्यक्ति क़ुरआन पढ़ता है, नमाज़ पढ़ता है और अल्लाह की राह में खर्च करता है, उसके लिए अल्लाह के पास अनगिनत इनाम तैयार हैं। यह हमारे लिए कितनी बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब इतना कृपालु है कि वह हमारी छोटी सी नेकी का भी बड़ा बदला देता है, और फिर अपनी ओर से और भी अधिक देता है।
आइए! हम अपने जीवन में क़ुरआन की तिलावत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, नमाज़ की पाबंदी करें, और अल्लाह की दी हुई रोज़ी में से दूसरों के साथ साझा करें। यक़ीनन अल्लाह हमारी इस कोशिश को कभी नाकाम नहीं करेगा — वह हमें पूरा बदला देगा और अपने फज़ल से और भी अधिक अता करेगा। यही सफलता का मार्ग है, और यही अल्लाह की रज़ा पाने का ज़रिया है।
📜 आयत 28-32 — सूरा फातिर
अनुवाद — फातिर 30
सूरा फातिर आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिसका कभी टाट न उलटेगा ताकि खुदा उन्हें उनकी मज़दूरियाँ…सूरा आयत 30/45 — सूरा फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फातिर सुनें, सूरा फातिर अनुवाद, सूरा फातिर mp3, सूरा फातिर pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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