फातिर · 30/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
لِيُوَفِّيَهُمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِ ۚ إِنَّهُ غَفُورٌ شَكُورٌ ۝٣٠
Liyuwaffiyahum ujoorahum wa yazeedahum min fadlih; innahoo Ghafoorun Shakoor
📖 हिंदी अर्थ
जिसका कभी टाट न उलटेगा ताकि खुदा उन्हें उनकी मज़दूरियाँ भरपूर अता करे बल्कि अपने फज़ल (व करम) से उसे कुछ और बढ़ा देगा बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है (और) बड़ा क़द्रदान है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِيُوَفِّيَهُمْ: उन्हें पूरा-पूरा बदला देने के लिए।
  • أُجُورَهُمْ: उनके कर्मों का प्रतिफल (बदला)।
  • مِن فَضْلِهِ: अपनी ओर से अतिरिक्त अनुग्रह और कृपा।
  • غَفُورٌ: अत्यधिक क्षमा करने वाला।
  • شَكُورٌ: अधिक आभार स्वीकार करने वाला, अच्छे कर्मों का भरपूर बदला देने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन पवित्र लोगों के बारे में बताती है जो क़ुरआन पढ़ते हैं, उस पर अमल करते हैं, नमाज़ को उसके समय पर बड़ी पाबंदी से अदा करते हैं, और अल्लाह ने जो रोज़ी (जीविका) दी है उसमें से छिपे और खुले तौर पर खर्च करते हैं। ऐसे लोगों की यही आशा होती है कि उनका यह व्यापार कभी घाटे में नहीं जाएगा — वह व्यापार जो अल्लाह की रज़ा (खुशी) और उसके महान प्रतिफल की प्राप्ति के लिए होता है।

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि यह सब कुछ इसलिए है ताकि अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला दे, जिसमें कोई कमी न हो, और फिर अपनी ओर से अतिरिक्त अनुग्रह से उन्हें और भी अधिक दे — इतना कि जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह अतिरिक्त देना अल्लाह का अपना फज़ल (कृपा) है, जो उसके बंदों पर उसकी असीम मेहरबानी का प्रमाण है।

अल्लाह तआला ग़फ़ूर है — वह अपने बंदों की कमियों और गुनाहों को क्षमा कर देता है, और शकूर है — वह छोटे से छोटे अच्छे कर्म को भी स्वीकार करता है और उसका बदला कई गुना बढ़ाकर देता है। यह अल्लाह का बड़ा ही प्यारा गुण है कि वह अपने बंदों के अच्छे कामों की क़द्र करता है और उन्हें भरपूर इनाम देता है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की छोटी-छोटी नेकियों को भी कभी बेकार नहीं जाने देता। जो व्यक्ति क़ुरआन पढ़ता है, नमाज़ पढ़ता है और अल्लाह की राह में खर्च करता है, उसके लिए अल्लाह के पास अनगिनत इनाम तैयार हैं। यह हमारे लिए कितनी बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब इतना कृपालु है कि वह हमारी छोटी सी नेकी का भी बड़ा बदला देता है, और फिर अपनी ओर से और भी अधिक देता है।

आइए! हम अपने जीवन में क़ुरआन की तिलावत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, नमाज़ की पाबंदी करें, और अल्लाह की दी हुई रोज़ी में से दूसरों के साथ साझा करें। यक़ीनन अल्लाह हमारी इस कोशिश को कभी नाकाम नहीं करेगा — वह हमें पूरा बदला देगा और अपने फज़ल से और भी अधिक अता करेगा। यही सफलता का मार्ग है, और यही अल्लाह की रज़ा पाने का ज़रिया है।

🎧 सुनें

📜 आयत 28-32 — फातिर

28وَمِنَ النَّاسِ وَالدَّوَابِّ وَالْأَنْعَامِ مُخْتَلِفٌ أَلْوَانُهُ كَذَٰلِكَ ۗ إِنَّمَا يَخْشَى اللَّهَ مِنْ عِبَادِهِ الْعُلَمَاءُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ غَفُورٌ
और इसी तरह आदमियों और जानवरों और चारपायों की भी रंगते तरह-तरह की हैं उसके बन्दों में ख़ुदा का ख़ौफ करने वाले तो बस उलेमा हैं बेशक खुदा (सबसे) ग़ालिब और बख्शने वाला है
29إِنَّ الَّذِينَ يَتْلُونَ كِتَابَ اللَّهِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً يَرْجُونَ تِجَارَةً لَّن تَبُورَ
बेशक जो लोग Âुदा की किताब पढ़ा करते हैं और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं और जो कुछ हमने उन्हें अता किया है उसमें से छिपा के और दिखा के (खुदा की राह में) देते हैं वह यक़ीनन ऐसे व्यापार का आसरा रखते हैं
30لِيُوَفِّيَهُمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِ ۚ إِنَّهُ غَفُورٌ شَكُورٌ
जिसका कभी टाट न उलटेगा ताकि खुदा उन्हें उनकी मज़दूरियाँ भरपूर अता करे बल्कि अपने फज़ल (व करम) से उसे कुछ और बढ़ा देगा बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है (और) बड़ा क़द्रदान है
31وَالَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ مِنَ الْكِتَابِ هُوَ الْحَقُّ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ بِعِبَادِهِ لَخَبِيرٌ بَصِيرٌ
और हमने जो किताब तुम्हारे पास ''वही'' के ज़रिए से भेजी वह बिल्कुल ठीक है और जो (किताबें इससे पहले की) उसके सामने (मौजूद) हैं उनकी तसदीक़ भी करती हैं - बेशक खुदा अपने बन्दों (के हालात) से खूब वाक़िफ है (और) देख रहा है
32ثُمَّ أَوْرَثْنَا الْكِتَابَ الَّذِينَ اصْطَفَيْنَا مِنْ عِبَادِنَا ۖ فَمِنْهُمْ ظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ وَمِنْهُم مُّقْتَصِدٌ وَمِنْهُمْ سَابِقٌ بِالْخَيْرَاتِ بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَضْلُ الْكَبِيرُ
फिर हमने अपने बन्दगान में से ख़ास उनको कुरान का वारिस बनाया जिन्हें (अहल समझकर) मुन्तख़िब किया क्योंकि बन्दों में से कुछ तो (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सितम ढाते हैं और कुछ उनमें से (नेकी बदी के) दरमियान हैं और उनमें से कुछ लोग खुदा के इख़तेयार से नेकों में (औरों से) गोया सबकत ले गए हैं (इन्तेख़ाब व सबक़त) तो खुदा का बड़ा फज़ल है
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अनुवाद — फातिर 30

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सूरा आयत 30/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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