अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الدَّوَابِّ: धरती पर चलने वाले जानवर।
- الأَنْعَامِ: ऊँट, गाय, भेड़ और बकरी।
- مُخْتَلِفٌ أَلْوَانُهُ: उनके रंग अलग-अलग हैं।
- يَخْشَى: डरता है, दिल से डरकर अल्लाह की इज़्ज़त करता है।
- الْعُلَمَاءُ: वे लोग जो अल्लाह को, उसकी क़ुदरत को और उसके दीन को गहराई से जानते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी क़ुदरत के अज़ीम नमूनों को बयान किया है। जिस तरह पहले की आयतों में फलों, पहाड़ों और बग़ात के रंगों के अलग-अलग होने का ज़िक्र किया गया, उसी तरह यहाँ बताया गया कि इंसानों में भी रंगों का अजीब इख्तिलाफ़ है — कोई गोरा है, कोई काला, कोई साँवला। चलने वाले जानवरों में भी तरह-तरह के रंग पाए जाते हैं — कोई सफ़ेद, कोई काला, कोई लाल, कोई चितकबरा। ऊँट, गाय, भेड़ और बकरियों में भी रंगों की अद्भुत किस्में हैं। यह सब उसी एक अल्लाह की पैदाइश है जिसने अपनी हिकमत से हर चीज़ को अलग शक्ल और रंग अता किया।
फिर अल्लाह तआला ने सबसे अहम बात कही: "उसके बंदों में से सिर्फ़ वही लोग अल्लाह से डरते हैं जो जानने वाले हैं।" यानी असली इल्म वह नहीं जो सिर्फ़ ज़ुबान से पढ़ा जाए, बल्कि असली इल्म वह है जो दिल में अल्लाह का खौफ़ पैदा करे। जो इंसान जितना अल्लाह की ज़ात, उसकी सिफ़ात, उसकी क़ुदरत और उसके दीन को समझता है, उतना ही उसके दिल में अल्लाह की अज़मत का डर और उसकी इज़्ज़त होती है। यही इल्म इंसान को गुनाहों से रोकता है और नेकियों की तरफ़ ले जाता है।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का डर सिर्फ़ नाम के लिए नहीं, बल्कि दिल की गहराई से होना चाहिए। जो इंसान जितना अल्लाह को जानता है, उतना ही उससे डरता है। इसलिए हमें चाहिए कि अल्लाह की किताब और उसके दीन का इल्म हासिल करें, उसकी पैदाइश में ग़ौर करें, ताकि हमारे दिलों में अल्लाह की अज़मत और उसका खौफ़ पैदा हो।
आख़िर में अल्लाह तआला अपनी दो सिफ़ात बयान करता है: "बेशक अल्लाह अज़ीज़ है (सब पर ग़ालिब है) और ग़फ़ूर है (बहुत माफ़ करने वाला है)।" यानी अल्लाह की क़ुदरत के आगे किसी की मजाल नहीं, वह जो चाहता है करता है, और इसी अज़मत के साथ वह अपने गुनाहगार बंदों को माफ़ भी करता है। यह बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब इतना क़ादिर होते हुए भी रहीम और ग़फ़ूर है। वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, तौबा करें, और वह उन्हें माफ़ कर दे।
इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि हम अल्लाह की पैदाइश में ग़ौर करें, उसकी क़ुदरत को पहचानें, और अपने दिल में उसका खौफ़ पैदा करें। यही खौफ़ हमें सीधे रास्ते पर चलाता है और अल्लाह की मुहब्बत और माफ़ी का ज़रिया बनता है। अल्लाह हमें सच्चा इल्म और उसका खौफ़ अता करे। आमीन।
📜 आयत 26-30 — फातिर
अनुवाद — फातिर 28
सूरा फातिर आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसी तरह आदमियों और जानवरों और चारपायों की भी…सूरा आयत 28/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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