फातिर · 28/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
وَمِنَ النَّاسِ وَالدَّوَابِّ وَالْأَنْعَامِ مُخْتَلِفٌ أَلْوَانُهُ كَذَٰلِكَ ۗ إِنَّمَا يَخْشَى اللَّهَ مِنْ عِبَادِهِ الْعُلَمَاءُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ غَفُورٌ ۝٢٨
Wa minan naasi wadda waaabbi wal an`aami mukhtalifun alwaanuhoo kazalik; innamaa yakhshal laaha min `ibaadihil `ulamaaa`; innal laaha `Azeezun Ghafoor
📖 हिंदी अर्थ
और इसी तरह आदमियों और जानवरों और चारपायों की भी रंगते तरह-तरह की हैं उसके बन्दों में ख़ुदा का ख़ौफ करने वाले तो बस उलेमा हैं बेशक खुदा (सबसे) ग़ालिब और बख्शने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الدَّوَابِّ: धरती पर चलने वाले जानवर।
  • الأَنْعَامِ: ऊँट, गाय, भेड़ और बकरी।
  • مُخْتَلِفٌ أَلْوَانُهُ: उनके रंग अलग-अलग हैं।
  • يَخْشَى: डरता है, दिल से डरकर अल्लाह की इज़्ज़त करता है।
  • الْعُلَمَاءُ: वे लोग जो अल्लाह को, उसकी क़ुदरत को और उसके दीन को गहराई से जानते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी क़ुदरत के अज़ीम नमूनों को बयान किया है। जिस तरह पहले की आयतों में फलों, पहाड़ों और बग़ात के रंगों के अलग-अलग होने का ज़िक्र किया गया, उसी तरह यहाँ बताया गया कि इंसानों में भी रंगों का अजीब इख्तिलाफ़ है — कोई गोरा है, कोई काला, कोई साँवला। चलने वाले जानवरों में भी तरह-तरह के रंग पाए जाते हैं — कोई सफ़ेद, कोई काला, कोई लाल, कोई चितकबरा। ऊँट, गाय, भेड़ और बकरियों में भी रंगों की अद्भुत किस्में हैं। यह सब उसी एक अल्लाह की पैदाइश है जिसने अपनी हिकमत से हर चीज़ को अलग शक्ल और रंग अता किया।

फिर अल्लाह तआला ने सबसे अहम बात कही: "उसके बंदों में से सिर्फ़ वही लोग अल्लाह से डरते हैं जो जानने वाले हैं।" यानी असली इल्म वह नहीं जो सिर्फ़ ज़ुबान से पढ़ा जाए, बल्कि असली इल्म वह है जो दिल में अल्लाह का खौफ़ पैदा करे। जो इंसान जितना अल्लाह की ज़ात, उसकी सिफ़ात, उसकी क़ुदरत और उसके दीन को समझता है, उतना ही उसके दिल में अल्लाह की अज़मत का डर और उसकी इज़्ज़त होती है। यही इल्म इंसान को गुनाहों से रोकता है और नेकियों की तरफ़ ले जाता है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का डर सिर्फ़ नाम के लिए नहीं, बल्कि दिल की गहराई से होना चाहिए। जो इंसान जितना अल्लाह को जानता है, उतना ही उससे डरता है। इसलिए हमें चाहिए कि अल्लाह की किताब और उसके दीन का इल्म हासिल करें, उसकी पैदाइश में ग़ौर करें, ताकि हमारे दिलों में अल्लाह की अज़मत और उसका खौफ़ पैदा हो।

आख़िर में अल्लाह तआला अपनी दो सिफ़ात बयान करता है: "बेशक अल्लाह अज़ीज़ है (सब पर ग़ालिब है) और ग़फ़ूर है (बहुत माफ़ करने वाला है)।" यानी अल्लाह की क़ुदरत के आगे किसी की मजाल नहीं, वह जो चाहता है करता है, और इसी अज़मत के साथ वह अपने गुनाहगार बंदों को माफ़ भी करता है। यह बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब इतना क़ादिर होते हुए भी रहीम और ग़फ़ूर है। वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, तौबा करें, और वह उन्हें माफ़ कर दे।

इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि हम अल्लाह की पैदाइश में ग़ौर करें, उसकी क़ुदरत को पहचानें, और अपने दिल में उसका खौफ़ पैदा करें। यही खौफ़ हमें सीधे रास्ते पर चलाता है और अल्लाह की मुहब्बत और माफ़ी का ज़रिया बनता है। अल्लाह हमें सच्चा इल्म और उसका खौफ़ अता करे। आमीन।



📜 आयत 26-30 — फातिर

26ثُمَّ أَخَذْتُ الَّذِينَ كَفَرُوا ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
फिर हमने उन लोगों को जो काफ़िर हो बैठे ले डाला तो (तुमने देखाकि) मेरा अज़ाब (उन पर) कैसा (सख्त हुआ
27أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجْنَا بِهِ ثَمَرَاتٍ مُّخْتَلِفًا أَلْوَانُهَا ۚ وَمِنَ الْجِبَالِ جُدَدٌ بِيضٌ وَحُمْرٌ مُّخْتَلِفٌ أَلْوَانُهَا وَغَرَابِيبُ سُودٌ
अब क्या तुमने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि यक़ीनन खुदा ही ने आसमान से पानी बरसाया फिर हम (खुदा) ने उसके ज़रिए से तरह-तरह की रंगतों के फल पैदा किए और पहाड़ों में क़तआत (टुकड़े रास्ते) हैं जिनके रंग मुख़तलिफ है कुछ तो सफेद (बुर्राक़) और कुछ लाल (लाल) और कुछ बिल्कुल काले सियाह
28وَمِنَ النَّاسِ وَالدَّوَابِّ وَالْأَنْعَامِ مُخْتَلِفٌ أَلْوَانُهُ كَذَٰلِكَ ۗ إِنَّمَا يَخْشَى اللَّهَ مِنْ عِبَادِهِ الْعُلَمَاءُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ غَفُورٌ
और इसी तरह आदमियों और जानवरों और चारपायों की भी रंगते तरह-तरह की हैं उसके बन्दों में ख़ुदा का ख़ौफ करने वाले तो बस उलेमा हैं बेशक खुदा (सबसे) ग़ालिब और बख्शने वाला है
29إِنَّ الَّذِينَ يَتْلُونَ كِتَابَ اللَّهِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً يَرْجُونَ تِجَارَةً لَّن تَبُورَ
बेशक जो लोग Âुदा की किताब पढ़ा करते हैं और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं और जो कुछ हमने उन्हें अता किया है उसमें से छिपा के और दिखा के (खुदा की राह में) देते हैं वह यक़ीनन ऐसे व्यापार का आसरा रखते हैं
30لِيُوَفِّيَهُمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِ ۚ إِنَّهُ غَفُورٌ شَكُورٌ
जिसका कभी टाट न उलटेगा ताकि खुदा उन्हें उनकी मज़दूरियाँ भरपूर अता करे बल्कि अपने फज़ल (व करम) से उसे कुछ और बढ़ा देगा बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है (और) बड़ा क़द्रदान है
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अनुवाद — फातिर 28

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Tuesday, August 18, 2026

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