साद · 11/88
अनुवाद उच्चारण — साद
جُندٌ مَّا هُنَالِكَ مَهْزُومٌ مِّنَ الْأَحْزَابِ ۝١١
Jundum maa hunaalika mahzoomum minal Ahzaab
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल उन पैग़म्बरों के साथ झगड़ने वाले) गिरोहों में से यहाँ तुम्हारे मुक़ाबले में भी एक लशकर है जो शिकस्त खाएगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • جُندٌ مَّا – यह एक सेना है (यहाँ "ما" के लिए कमी या तुच्छता का भाव है, अर्थात यह एक छोटी-सी तुच्छ सेना है)
  • هُنَالِكَ – वहाँ (उस स्थान पर)
  • مَهْزُومٌ – पराजित होने वाली
  • مِّنَ الْأَحْزَابِ – उन गिरोहों में से (जो पहले भी नबियों के विरुद्ध एकत्र हुए थे)

तफ़सीर:

यह आयत उन काफ़िरों की स्थिति बयान कर रही है जो अल्लाह के रसूल ﷺ के विरुद्ध एकत्र हुए थे और इस्लाम को मिटाने की कोशिश में लगे थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग जो तुम्हारे सामने खड़े हैं, ये कोई बड़ी ताक़त नहीं हैं। ये तो बस एक छोटी-सी सेना है जो वहाँ मौजूद है, और यह जल्द ही पराजित होने वाली है। ये उन्हीं पुराने गिरोहों में से हैं जिन्होंने अतीत में अल्लाह के नबियों का विरोध किया था।

इतिहास गवाह है कि नूह की क़ौम, आद, फ़िरऔन, समूद, लूत की क़ौम और शुऐब की उम्मत — ये सब बड़ी ताक़त और साज़िशों के बावजूद अल्लाह के मुक़ाबले में कुछ न कर सके। उन्होंने नबियों को झुठलाया, मगर अंजाम यह हुआ कि अल्लाह का अज़ाब उन पर नाज़िल हुआ और वे बुरी तरह तबाह हो गए।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके साथियों को तसल्ली दे रहा है कि इन मुशरिकों की ताक़त से घबराओ मत। ये वही रास्ता अपना रहे हैं जो पुराने काफ़िरों ने अपनाया था, और उनका अंजाम भी वही होगा — यानी ज़िल्लत और पराजय। अल्लाह का वादा है कि वह अपने दीन की मदद करेगा और सच्चाई को बुलंद करेगा।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस मुसलमान के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है जो किसी भी दौर में काफ़िरों के दबाव या उनकी बड़ी तादाद से घबराता है। अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि सच्चाई की ताक़त कभी झूठ की ताक़त से कम नहीं होती। चाहे काफ़िर कितने भी जमा हो जाएँ, अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ होती है। जब हम इस आयत पर ईमान रखते हैं, तो हमारा दिल मज़बूत होता है और हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह की नुसरत (मदद) ज़रूर आएगी। यही वह चीज़ है जो एक मोमिन को हर मुश्किल में सब्र और इस्तिक़ामत पर क़ायम रखती है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें सच्चाई पर साबित-क़दम रखे और अपनी मदद से नवाज़े। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — साद

9أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَحْمَةِ رَبِّكَ الْعَزِيزِ الْوَهَّابِ
(इस वजह से ये शरारत है) (ऐ रसूल) तुम्हारे ज़बरदस्त फ़य्याज़ परवरदिगार के रहमत के ख़ज़ाने इनके पास हैं
10أَمْ لَهُم مُّلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ فَلْيَرْتَقُوا فِي الْأَسْبَابِ
या सारे आसमान व ज़मीन और उन दोनों के दरमियान की सलतनत इन्हीं की ख़ास है तब इनको चाहिए कि रास्ते या सीढियाँ लगाकर (आसमान पर) चढ़ जाएँ और इन्तेज़ाम करें
11جُندٌ مَّا هُنَالِكَ مَهْزُومٌ مِّنَ الْأَحْزَابِ
(ऐ रसूल उन पैग़म्बरों के साथ झगड़ने वाले) गिरोहों में से यहाँ तुम्हारे मुक़ाबले में भी एक लशकर है जो शिकस्त खाएगा
12كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَفِرْعَوْنُ ذُو الْأَوْتَادِ
उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और फिरऔन मेंख़ों वाला
13وَثَمُودُ وَقَوْمُ لُوطٍ وَأَصْحَابُ الْأَيْكَةِ ۚ أُولَٰئِكَ الْأَحْزَابُ
और समूद और लूत की क़ौम और जंगल के रहने वाले (क़ौम शुऐब ये सब पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं यही वह गिरोह है
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अनुवाद — साद 11

सूरा साद आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल उन पैग़म्बरों के साथ झगड़ने वाले) गिरोहों में…

सूरा आयत 11/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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