Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- جُندٌ مَّا – यह एक सेना है (यहाँ "ما" के लिए कमी या तुच्छता का भाव है, अर्थात यह एक छोटी-सी तुच्छ सेना है)
- هُنَالِكَ – वहाँ (उस स्थान पर)
- مَهْزُومٌ – पराजित होने वाली
- مِّنَ الْأَحْزَابِ – उन गिरोहों में से (जो पहले भी नबियों के विरुद्ध एकत्र हुए थे)
तफ़सीर:
यह आयत उन काफ़िरों की स्थिति बयान कर रही है जो अल्लाह के रसूल ﷺ के विरुद्ध एकत्र हुए थे और इस्लाम को मिटाने की कोशिश में लगे थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग जो तुम्हारे सामने खड़े हैं, ये कोई बड़ी ताक़त नहीं हैं। ये तो बस एक छोटी-सी सेना है जो वहाँ मौजूद है, और यह जल्द ही पराजित होने वाली है। ये उन्हीं पुराने गिरोहों में से हैं जिन्होंने अतीत में अल्लाह के नबियों का विरोध किया था।
इतिहास गवाह है कि नूह की क़ौम, आद, फ़िरऔन, समूद, लूत की क़ौम और शुऐब की उम्मत — ये सब बड़ी ताक़त और साज़िशों के बावजूद अल्लाह के मुक़ाबले में कुछ न कर सके। उन्होंने नबियों को झुठलाया, मगर अंजाम यह हुआ कि अल्लाह का अज़ाब उन पर नाज़िल हुआ और वे बुरी तरह तबाह हो गए।
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके साथियों को तसल्ली दे रहा है कि इन मुशरिकों की ताक़त से घबराओ मत। ये वही रास्ता अपना रहे हैं जो पुराने काफ़िरों ने अपनाया था, और उनका अंजाम भी वही होगा — यानी ज़िल्लत और पराजय। अल्लाह का वादा है कि वह अपने दीन की मदद करेगा और सच्चाई को बुलंद करेगा।
दावती पहलू:
यह आयत हर उस मुसलमान के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है जो किसी भी दौर में काफ़िरों के दबाव या उनकी बड़ी तादाद से घबराता है। अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि सच्चाई की ताक़त कभी झूठ की ताक़त से कम नहीं होती। चाहे काफ़िर कितने भी जमा हो जाएँ, अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ होती है। जब हम इस आयत पर ईमान रखते हैं, तो हमारा दिल मज़बूत होता है और हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह की नुसरत (मदद) ज़रूर आएगी। यही वह चीज़ है जो एक मोमिन को हर मुश्किल में सब्र और इस्तिक़ामत पर क़ायम रखती है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें सच्चाई पर साबित-क़दम रखे और अपनी मदद से नवाज़े। आमीन।
📜 आयत 9-13 — सूरा साद
अनुवाद — साद 11
सूरा साद आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल उन पैग़म्बरों के साथ झगड़ने वाले) गिरोहों में…सूरा आयत 11/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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