Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُلْكُ — स्वामित्व, राज्य
- فَلْيَرْتَقُوا — तो उन्हें चढ़ने दो, ऊपर जाने दो
- الْأَسْبَاب — साधन, रास्ते, सीढ़ियाँ (यहाँ आसमान तक पहुँचने के रास्ते)
तफसीर:
यह आयत उन मुशरिकीन (बहुदेववादियों) को चुनौती दे रही है जो अल्लाह के दीन और उसके नबी ﷺ पर आपत्ति जताते थे और कहते थे कि अगर यह क़ुरआन सच्चा है तो हमें भी वही मिलना चाहिए जो अल्लाह अपने चुने हुए बंदों को देता है। अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या इन मुशरिकीन के पास आसमानों और ज़मीन और जो कुछ इनके बीच है, उसका कोई राज्य या स्वामित्व है? क्या वे अपनी मर्ज़ी से किसी को देना या किसी से रोकना चाहते हैं तो कर सकते हैं?
अगर उनका यह दावा है कि उनके पास ऐसा अधिकार है, तो उन्हें चाहिए कि वे आसमान तक पहुँचने के रास्ते (साधन) पकड़ें और ऊपर चढ़कर अपना फ़ैसला सुनाएँ, या वहाँ से वही लेकर आएँ जो वे चाहते हैं। लेकिन यह उनके लिए हरगिज़ मुमकिन नहीं है, क्योंकि आसमानों और ज़मीन का मालिक सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह है। वही देता है जिसे चाहता है और रोकता है जिससे चाहता है। उसकी मर्ज़ी के बिना कोई पत्ता भी नहीं हिल सकता।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का फ़ैसला सबसे बड़ा है और उसकी रहमत और फ़ज़ल उसकी मर्ज़ी पर मुनहसिर है। कोई इंसान चाहे कितना ही बड़ा, अमीर या ताक़तवर क्यों न हो, वह अल्लाह के दिए बिना कुछ नहीं पा सकता। इसलिए हमें अपनी ज़रूरतें सिर्फ़ अल्लाह से माँगनी चाहिए और उसी पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह तआला अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपनी रहमत और नुबुव्वत के लिए चुन लेता है — यह उसका फ़ज़ल है, जो वह जिसे चाहे देता है।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के दीन के खिलाफ़ चुनौती देना और उसकी तदबीर पर एतराज़ करना बिल्कुल बेकार है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के सामने सर झुकाए, उसकी रहमत का तालिब बने और उसके फ़ैसलों पर राज़ी रहे। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ और उनके साथियों को दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देने वाला है, और जो लोग उसकी आयतों से मुँह मोड़ते हैं, उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है।
📜 आयत 8-12 — सूरा साद
अनुवाद — साद 10
सूरा साद आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या सारे आसमान व ज़मीन और उन दोनों के दरमियान…सूरा आयत 10/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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