साद · 12/88
अनुवाद उच्चारण — साद
كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَفِرْعَوْنُ ذُو الْأَوْتَادِ ۝١٢
Kazzabat qablahum qawmu Lootinw-wa `Aadunw wa Fir`awnu zul awtaad
📖 हिंदी अर्थ
उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और फिरऔन मेंख़ों वाला
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ذُو الْأَوْتَادِ: अर्थात खूँटों वाला। फ़िरऔन को "खूँटों वाला" इसलिए कहा गया क्योंकि वह लोगों को सूली पर चढ़ाकर या खूँटों से बाँधकर अत्याचार करता था, और उसके पास मज़बूत इमारतें और सत्ता का सामान भी था।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को सांत्वना देते हुए बताते हैं कि हे नबी! ये क़ुरैश के काफ़िर जो आपको झुठला रहे हैं, वे अकेले नहीं हैं जिन्होंने रसूलों को झुठलाया। इनसे पहले भी कई क़ौमें अपने-अपने नबियों को झुठला चुकी हैं, और उनका अंजाम बहुत बुरा हुआ।

नूह की क़ौम: हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने उन्हें झुठलाया और नौ सौ पचास साल तक उन्हें तकलीफ़ें दीं, आख़िरकार अल्लाह ने उन्हें तूफ़ान में डुबोकर हलाक कर दिया।

आद: हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने भी अपने नबी को झुठलाया। वे ताकतवर और बड़े कद वाले लोग थे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें तेज़ आँधी से नष्ट कर दिया।

फ़िरऔन: वह मिस्र का ज़ालिम बादशाह था, जो खूँटों वाला कहलाता था। वह लोगों को खूँटों से बाँधकर अत्याचार करता था और उसके पास मज़बूत इमारतें और लश्कर थे। उसने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया, तो अल्लाह ने उसे समुद्र में डुबोकर हलाक कर दिया।

इन सब क़ौमों ने अपने-अपने नबियों को झुठलाया और अल्लाह के अज़ाब के हक़दार बने। यही हाल उन लोगों का होगा जो आज मुहम्मद ﷺ को झुठला रहे हैं। अल्लाह तआला उन्हें भी अपनी पकड़ में लेगा, क्योंकि उसका वादा सच्चा है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के रसूलों को झुठलाने वालों का अंजाम हमेशा बुरा रहा है। इतिहास गवाह है कि जिन क़ौमों ने अपने नबियों की नाफ़रमानी की, वे तबाह हो गईं। आज भी अगर हम अल्लाह के रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें और क़ुरआन को अपनाएँ, तो हम कामयाब होंगे। यह आयत हमें चेतावनी देती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह रहम करने वाला है — जो कोई तौबा करके उसकी तरफ़ लौटेगा, उसे वह माफ़ कर देगा। आइए हम उन क़ौमों के अंजाम से सबक़ लें और अपने जीवन को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक़ ढालें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।

🎧 सुनें

📜 आयत 10-14 — साद

10أَمْ لَهُم مُّلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ فَلْيَرْتَقُوا فِي الْأَسْبَابِ
या सारे आसमान व ज़मीन और उन दोनों के दरमियान की सलतनत इन्हीं की ख़ास है तब इनको चाहिए कि रास्ते या सीढियाँ लगाकर (आसमान पर) चढ़ जाएँ और इन्तेज़ाम करें
11جُندٌ مَّا هُنَالِكَ مَهْزُومٌ مِّنَ الْأَحْزَابِ
(ऐ रसूल उन पैग़म्बरों के साथ झगड़ने वाले) गिरोहों में से यहाँ तुम्हारे मुक़ाबले में भी एक लशकर है जो शिकस्त खाएगा
12كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَفِرْعَوْنُ ذُو الْأَوْتَادِ
उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और फिरऔन मेंख़ों वाला
13وَثَمُودُ وَقَوْمُ لُوطٍ وَأَصْحَابُ الْأَيْكَةِ ۚ أُولَٰئِكَ الْأَحْزَابُ
और समूद और लूत की क़ौम और जंगल के रहने वाले (क़ौम शुऐब ये सब पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं यही वह गिरोह है
14إِن كُلٌّ إِلَّا كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ عِقَابِ
(जो शिकस्त खा चुके) सब ही ने तो पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा अज़ाब ठीक आ नाज़िल हुआ
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अनुवाद — साद 12

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Tuesday, August 18, 2026

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