साद · 72/88
अनुवाद उच्चारण — साद
فَإِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِي فَقَعُوا لَهُ سَاجِدِينَ ۝٧٢
Fa-iza sawwaituhoo wa nafakhtu feehi mir roohee faqa`oo lahoo saajideen
📖 हिंदी अर्थ
तो जब मैं उसको दुरूस्त कर लूँ और इसमें अपनी (पैदा) की हुई रूह फूँक दो तो तुम सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَوَّيْتُهُ – मैंने उसे पूर्ण बना दिया, उसके अंगों को सही-सलामत और संतुलित कर दिया।
  • نَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِي – मैंने उसमें अपनी ओर से रूह (आत्मा) फूँक दी, यानी उसे जीवन प्रदान कर दिया।
  • فَقَعُوا لَهُ سَاجِدِينَ – तुम सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ो।

तफसीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को हुक्म दिया कि वे लोगों को वह वक़्त याद दिलाएँ जब अल्लाह ने फ़रिश्तों से कहा: “मैं एक इंसान को मिट्टी से पैदा करने वाला हूँ। जब मैं उसकी सूरत पूरी कर दूँ, उसके जिस्म को अच्छी तरह सँवार दूँ, और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ, यानी उसे ज़िंदगी अता कर दूँ, तो तुम सब उसके आगे सजदे में झुक जाना।”

यह सजदा इबादत का नहीं था, बल्कि आदर और सम्मान का सजदा था। इस्लाम में सिर्फ़ अल्लाह ही की इबादत की जाती है, और किसी को सजदा करना जायज़ नहीं। यह आदेश आज़माइश के तौर पर था, ताकि फ़रिश्तों की फ़रमाँबरदारी और इब्लीस की नाफ़रमानी ज़ाहिर हो। यह आयत इंसान की अज़मत और शरफ़ को बयान करती है कि अल्लाह ने उसे कितनी बुलंदी अता की, और साथ ही हमें सिखाती है कि अल्लाह के हुक्म के आगे फ़ौरन सर झुकाना चाहिए।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह की हर मख़लूक़ में हिकमत है, और इंसान को चाहिए कि वह अपनी इस अज़ीम मर्तबे को पहचाने और अपने रब की इबादत और फ़रमाँबरदारी में अपनी ज़िंदगी गुज़ारे। अल्लाह ने इंसान को अशरफ़ुल मख़लूक़ात बनाया, इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को उसी लायक़ बनाना चाहिए जो अल्लाह को पसंद हो। याद रखें, सजदा सिर्फ़ अल्लाह को करना है, और यही सबसे बड़ी इबादत है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 70-74 — साद

70إِن يُوحَىٰ إِلَيَّ إِلَّا أَنَّمَا أَنَا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
मेरे पास तो बस वही की गयी है कि मैं (खुदा के अज़ाब से) साफ-साफ डराने वाला हूँ
71إِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَائِكَةِ إِنِّي خَالِقٌ بَشَرًا مِّن طِينٍ
(वह बहस ये थी कि) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं गीली मिट्टी से एक आदमी बनाने वाला हूँ
72فَإِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِي فَقَعُوا لَهُ سَاجِدِينَ
तो जब मैं उसको दुरूस्त कर लूँ और इसमें अपनी (पैदा) की हुई रूह फूँक दो तो तुम सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना
73فَسَجَدَ الْمَلَائِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ
तो सब के सब कुल फरिश्तों ने सजदा किया
74إِلَّا إِبْلِيسَ اسْتَكْبَرَ وَكَانَ مِنَ الْكَافِرِينَ
मगर (एक) इबलीस ने कि वह शेख़ी में आ गया और काफिरों में हो गया
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अनुवाद — साद 72

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Tuesday, August 18, 2026

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