Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- बशर: इंसान, आदम (अलैहिस्सलाम)
- तीन: मिट्टी, जो आदम के शरीर की मूल सामग्री थी
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप लोगों को वह समय याद दिलाइए जब आपके रब ने फ़रिश्तों से कहा था: "मैं मिट्टी से एक इंसान पैदा करने वाला हूँ।" यह वही आदम (अलैहिस्सलाम) हैं, जो इंसानियत के पहले नबी और पहले इंसान हैं। अल्लाह तआला ने उन्हें अपने हाथों से बनाया और उनकी खिलक़त को पूरा किया। यह बात उस समय की है जब फ़रिश्तों के सामने इंसान की पैदाइश का एलान हुआ और यह एलान इंसान की अज़मत और शरफ़ को बयान करता है।
यहाँ अल्लाह तआला ने अपने नबी को हिदायत दी कि वे क़ौम को वह वाक़िया सुनाएँ जब फ़रिश्तों को आदम के सिजदे का हुक्म दिया गया। यह सिजदा इबादत का नहीं था, बल्कि ताज़ीम और इज़्ज़त का था, क्योंकि इबादत सिर्फ़ अल्लाह के लिए है। यह वाक़िया इंसान की तकरीम (सम्मान) और अज़मत को ज़ाहिर करता है कि अल्लाह ने इंसान को इतनी बड़ी इज़्ज़त अता की कि फ़रिश्तों को उसके आगे सर झुकाने का हुक्म दिया।
इस आयत में इंसान की पैदाइश की शुरुआत मिट्टी से बताई गई है, जो हमारी कमज़ोर और आजिज़ हालत की निशानी है। हम मिट्टी से पैदा हुए, फिर अल्लाह ने हमें इंसानियत का शरफ़ अता किया और हमें अशरफ़ुल मख़लूक़ात बनाया। यह हमारे लिए बड़ी नेमत है कि अल्लाह ने हमें इस क़ाबिल बनाया कि हम उसकी इबादत करें और उसके दीन को समझें।
इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि हम अपनी पैदाइश के मक़सद को समझें। हमें याद रखना चाहिए कि हमारा रब हमें देख रहा है और हमारी हर हरकत का हिसाब होगा। जिस तरह अल्लाह ने आदम को मिट्टी से बनाकर इज़्ज़त दी, उसी तरह हमें भी अपने अमल से उस इज़्ज़त को क़ायम रखना है। हमें अपने रब के हुक्मों का पालन करना चाहिए और उसकी इबादत में कोई कमी नहीं छोड़नी चाहिए।
यह वाक़िया हमें यह भी सिखाता है कि अल्लाह की इबादत में किसी को शरीक नहीं करना चाहिए। फ़रिश्तों को सिजदे का हुक्म सिर्फ़ ताज़ीम के लिए था, लेकिन इबादत सिर्फ़ अल्लाह की है। हमें अपनी ज़िंदगी में भी यही रवैया अपनाना चाहिए कि हम किसी इंसान को इबादत के क़ाबिल न समझें, बल्कि सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करें और उसके रसूल की सुन्नत पर चलें। यही हमारी कामयाबी की राह है।
📜 आयत 69-73 — सूरा साद
अनुवाद — साद 71
सूरा साद आयत 71 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (वह बहस ये थी कि) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों…सूरा आयत 71/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 69–73. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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