अज़-ज़ुमर · 11/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुमर
قُلْ إِنِّي أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ اللَّهَ مُخْلِصًا لَّهُ الدِّينَ ۝١١
Qul inneee umirtu an a`budal laaha mukhlisal lahud deen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मैं इबादत को उसके लिए ख़ास करके खुदा ही की बन्दगी करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُمِرْتُ — मुझे आदेश दिया गया।
  • مُخْلِصًا لَّهُ الدِّينَ — उसी के लिए दीन (इबादत) को ख़ालिस करते हुए, यानी बिना किसी शिर्क के, केवल अल्लाह ही के लिए अपनी इबादत और बंदगी को विशेष करते हुए।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप लोगों से कह दीजिए कि मुझे अल्लाह तआला ने स्पष्ट आदेश दिया है कि मैं उसी की इबादत करूँ, और अपनी पूरी बंदगी, अपनी नमाज़, अपनी दुआ, अपनी क़ुर्बानी, अपना सारा दीन — सब कुछ केवल और केवल उसी के लिए ख़ालिस करूँ। मेरी इबादत में किसी को भी शरीक न करूँ, न किसी बुत को, न किसी इंसान को, न किसी फ़रिश्ते को, न किसी और चीज़ को। यही तौहीद है — यही वह पैग़ाम है जो हर नबी लेकर आया, और यही वह सच्चा दीन है जो अल्लाह को पसंद है।

यह आदेश सिर्फ़ नबी ﷺ के लिए नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो अल्लाह पर ईमान लाता है। जिसने भी इस दीन को क़बूल किया, उस पर भी यही फ़र्ज़ है कि वह अपनी इबादत को अल्लाह के लिए ख़ालिस करे। और यही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाती है, उसके गुनाहों को माफ़ करवाती है, और उसे जन्नत की तरफ़ ले जाती है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! देखिए, अल्लाह तआला ने हमें जो सबसे बड़ी नेमत दी है, वह यह है कि उसने हमें सीधा रास्ता दिखाया और हमें अपनी इबादत का शरफ़ बख़्शा। जब हम अपनी नमाज़ में, अपनी दुआ में, अपनी हर नेकी में सिर्फ़ अल्लाह को याद करते हैं और सिर्फ़ उसी से मदद माँगते हैं, तो हमारा दिल एक अजीब सुकून और इत्मीनान से भर जाता है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की परेशानियों से निकालकर आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।

अल्लाह ने हम पर कोई ऐसी चीज़ लाज़िम नहीं की जो हमारे लिए भारी हो। उसने सिर्फ़ यह चाहा कि हम उसे पहचानें, उसी की इबादत करें, और उसी से उम्मीद रखें। यही तो सबसे आसान और सबसे सीधा रास्ता है। जो इंसान इस रास्ते पर चल पड़ता है, अल्लाह उसकी हर मुश्किल आसान कर देता है, उसके दिल को रौशन कर देता है, और उसे वह इज़्ज़त देता है जो किसी और से नहीं मिल सकती।

तो आइए, हम सब अपने दिलों को साफ़ करें, अपनी नीयतों को दुरुस्त करें, और अपनी हर इबादत को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस करें। यही वह चाबी है जो जन्नत के दरवाज़े खोलती है। अल्लाह हम सबको इस तौहीद पर साबित-क़दम रखे। आमीन।



📜 आयत 9-13 — सूरा अज़-ज़ुमर

9أَمَّنْ هُوَ قَانِتٌ آنَاءَ اللَّيْلِ سَاجِدًا وَقَائِمًا يَحْذَرُ الْآخِرَةَ وَيَرْجُو رَحْمَةَ رَبِّهِ ۗ قُلْ هَلْ يَسْتَوِي الَّذِينَ يَعْلَمُونَ وَالَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ ۗ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُولُو الْأَلْبَابِ
(आख़िर) तू यक़ीनी जहन्नुमियों में होगा क्या जो शख्स रात के अवक़ात में सजदा करके और खड़े-खड़े (खुदा की) इबादत करता हो और आख़ेरत से डरता हो अपने परवरदिगार की रहमत का उम्मीदवार हो (नाशुक्रे) काफिर के बराबर हो सकता है (ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि भला कहीं जानने वाले और न जाननेवाले लोग बराबर हो सकते हैं (मगर) नसीहत इबरतें तो बस अक्लमन्द ही लोग मानते हैं
10قُلْ يَا عِبَادِ الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا رَبَّكُمْ ۚ لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةٌ ۗ وَأَرْضُ اللَّهِ وَاسِعَةٌ ۗ إِنَّمَا يُوَفَّى الصَّابِرُونَ أَجْرَهُم بِغَيْرِ حِسَابٍ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे ईमानदार बन्दों अपने परवरदिगार (ही) से डरते रहो (क्योंकि) जिन लोगों ने इस दुनिया में नेकी की उन्हीं के लिए (आख़ेरत में) भलाई है और खुदा की ज़मीन तो कुशादा है (जहाँ इबादत न कर सको उसे छोड़ दो) सब्र करने वालों ही की तो उनका भरपूर बेहिसाब बदला दिया जाएगा
11قُلْ إِنِّي أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ اللَّهَ مُخْلِصًا لَّهُ الدِّينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मैं इबादत को उसके लिए ख़ास करके खुदा ही की बन्दगी करो
12وَأُمِرْتُ لِأَنْ أَكُونَ أَوَّلَ الْمُسْلِمِينَ
और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मैं सबसे पहल मुसलमान हूँ
13قُلْ إِنِّي أَخَافُ إِنْ عَصَيْتُ رَبِّي عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर मैं अपने परवरदिगार की नाफरमानी करूँ तो मैं एक बड़ी (सख्त) दिन (क़यामत) के अज़ाब से डरता हूँ
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अनुवाद — अज़-ज़ुमर 11

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Friday, October 2, 2026

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