अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أُمِرْتُ — मुझे आदेश दिया गया।
- أَوَّلَ الْمُسْلِمِينَ — सबसे पहले आज्ञाकारी (इस्लाम लाने वालों में अग्रणी)।
व्याख्या:
अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को आदेश दिया कि वे लोगों से स्पष्ट रूप से कहें: "मुझे आदेश दिया गया है कि मैं सबसे पहले आज्ञाकारी बनूँ।" यानी, मैं सबसे पहले अपने रब के सामने सिर झुकाऊँ, उसकी एकता (तौहीद) को स्वीकार करूँ, और उसकी इबादत में किसी को साझी न बनाऊँ। यह आदेश केवल नबी ﷺ के लिए नहीं था, बल्कि उनकी उम्मत के लिए भी था कि वे भी इस्लाम में अग्रणी बनें और दूसरों के लिए नमूना बनें।
इस आयत में दो आदेशों का उल्लेख है: पहला, इबादत को अल्लाह के लिए खालिस करना (सिर्फ उसी की इबादत करना), और दूसरा, इस्लाम में सबसे आगे होने का। यानी, मुसलमान को चाहिए कि वह न केवल खुद को इस्लाम पर स्थापित करे, बल्कि दूसरों को भी इस ओर बुलाए और अच्छे कर्मों में प्रतिस्पर्धा करे।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में सबसे पहले और सबसे आगे होने का मतलब है — अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण, उसकी आज्ञाओं का पालन, और उसकी राह में दूसरों के लिए मार्गदर्शक बनना। जब हम इस्लाम में अग्रणी बनते हैं, तो हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालते हैं और समाज में अच्छाई का प्रसार करते हैं।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि नबी ﷺ ने सबसे पहले इस्लाम कबूल किया और अपनी उम्मत के लिए राह दिखाई। हमें भी चाहिए कि हम अपने जीवन में इस्लाम को सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण स्थान दें, और दूसरों को भी इस ओर बुलाएँ। यही सच्ची सफलता है — अल्लाह की रज़ा और उसकी जन्नत।
इस आयत से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम अपने ईमान में सच्चे हों, अपनी इबादत को खालिस करें, और इस्लाम की राह में सबसे आगे रहने का प्रयास करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा।
📜 आयत 10-14 — अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 12
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मैं…सूरा आयत 12/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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