अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اتَّقُوا: अल्लाह का भय रखो, उसके आदेशों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो।
- أَحْسَنُوا: अच्छे कर्म करने वाले, नेकी करने वाले।
- حَسَنَةٌ: भलाई, अच्छा बदला, इनाम।
- أَرْضُ اللَّهِ وَاسِعَةٌ: अल्लाह की धरती विस्तृत है (यानी हिजरत की गुंजाइश है)।
- يُوَفَّى: पूरा-पूरा दिया जाएगा।
- الصَّابِرُونَ: सब्र करने वाले, धैर्य रखने वाले।
- بِغَيْرِ حِسَابٍ: बिना किसी हिसाब के, बिना किसी माप-तौल के, असीमित।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप मेरे उन बंदों से कह दीजिए जो ईमान लाए हैं कि अपने रब का भय रखो, उसकी आज्ञाओं का पालन करो और उसके द्वारा मना की गई चीज़ों से बचो। यही ईमान की पहचान है कि बंदा अपने रब के सामने अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास रखे।
जिन लोगों ने इस दुनिया में नेकी की, अच्छे कर्म किए, अल्लाह की इबादत की और उसकी राह में भलाई के काम किए, उनके लिए दुनिया में भी भलाई है — जैसे स्वास्थ्य, रिज़्क़ में बरकत, मदद और कामयाबी — और आख़िरत में भी उनके लिए सबसे बड़ी भलाई है, और वह है जन्नत। यह अल्लाह का वादा है जो कभी नहीं टूटता।
और अगर किसी जगह पर ईमान वालों को अपने दीन पर अमल करने में रुकावट आए, या उन पर ज़ुल्म हो, तो याद रखें कि अल्लाह की धरती बहुत विस्तृत है। हिजरत करो, किसी दूसरी जगह चले जाओ जहाँ तुम अपने रब की इबादत कर सको और अपने दीन पर स्थिर रह सको। अल्लाह की ज़मीन उसके बंदों के लिए तंग नहीं है, और जो अल्लाह की राह में अपना घर-बार छोड़कर निकलता है, उसे अल्लाह कभी अकेला नहीं छोड़ता।
फिर अल्लाह तआला सब्र करने वालों का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि जिन लोगों ने अपने ईमान पर सब्र किया, दीन की मुश्किलों पर धैर्य रखा, अल्लाह की इबादत पर जमे रहे और उसकी राह में आने वाली तकलीफ़ों को सहा, उन्हें उनका पूरा-पूरा अज्र मिलेगा — बिना किसी हिसाब के, बिना किसी माप-तौल के। यानी उनका इनाम इतना अधिक होगा कि उसकी कोई सीमा नहीं होगी, कोई गिनती नहीं होगी। यह अल्लाह की ओर से सब्र करने वालों के लिए एक बहुत बड़ा सम्मान और विशेष उपहार है।
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान का तक़ाज़ा है तक़्वा, नेकी का इनाम अल्लाह के यहाँ ज़रूर मिलता है, और मुश्किलों में सब्र करने वालों के लिए अल्लाह के पास ऐसा अज्र है जिसका कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने रब से डरें, नेकी पर जमे रहें, और हर हाल में सब्र करें — क्योंकि अल्लाह का इनाम सब्र करने वालों के लिए ही है।
📜 आयत 8-12 — अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 10
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे ईमानदार बन्दों…सूरा आयत 10/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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