Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَانِتٌ (क़ानित): अल्लाह का आज्ञाकारी, उसकी इबादत में लीन रहने वाला।
- آنَاءَ اللَّيْلِ (आना-अल-लैल): रात के घंटे, रात की सभी अवधियाँ।
- يَحْذَرُ (यहज़रु): डरता है, भयभीत होता है।
- يَرْجُو (यरजू): आशा रखता है, उम्मीद करता है।
- أُولُو الْأَلْبَابِ (उलुल-अल्बाब): बुद्धिमान लोग, सही समझ वाले, खुले दिल वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत एक गहरा सवाल उठाती है और दो तरह के लोगों के बीच तुलना करती है। एक तरफ वह इंसान है जो रात की घड़ियों में उठता है, अल्लाह के सामने सजदे में झुकता है और खड़े होकर उसकी इबादत करता है। उसका दिल आख़िरत के अज़ाब से डरता है, और साथ ही वह अपने रब की रहमत की उम्मीद भी रखता है। वह डर और उम्मीद के बीच जीता है — डर इसलिए कि कहीं उससे कोई कसूर न हो जाए, और उम्मीद इसलिए कि अल्लाह की रहमत असीम है। यही वह बंदा है जो सच्ची इबादत करता है, सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि अपने पूरे वजूद से।
दूसरी तरफ वह काफ़िर या ग़ाफ़िल इंसान है जो अपनी ख्वाहिशों में डूबा हुआ है, अल्लाह को भूला हुआ है, और अपनी ज़िंदगी को बेकार की चीज़ों में गुज़ार रहा है। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "क्या ये दोनों बराबर हो सकते हैं?" — हरगिज़ नहीं!
फिर अल्लाह पैग़ंबर ﷺ से कहलवाता है: "क्या वे लोग जो जानते हैं और वे लोग जो नहीं जानते, बराबर हो सकते हैं?" यह सवाल सिर्फ़ उस वक़्त का नहीं, बल्कि हर ज़माने के लिए है। जो इंसान अपने रब को जानता है, अपने दीन को समझता है, और उस पर अमल करता है — उसकी ज़िंदगी में रोशनी होती है, उसके फ़ैसले सही होते हैं, उसका दिल सुकून पाता है। और जो इन हक़ीक़तों से अनजान है, वह अंधेरों में भटकता रहता है।
आयत के अंत में अल्लाह फ़रमाता है: "नसीहत सिर्फ़ वही लोग हासिल करते हैं जो अक्लमंद हैं।" यानी सिर्फ़ वही लोग इस सच्चाई को समझते हैं जिनके दिल खुले हैं, जिनकी अक्ल सलामत है, और जो अपनी फ़ितरत को ज़िंदा रखते हैं। यह एक पुकार है — कि अपनी अक्ल को जगाओ, अपने दिल को रोशन करो, और उस रास्ते को चुनो जो अल्लाह तक पहुँचाता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि इल्म (ज्ञान) कितनी बड़ी नेमत है। जो इंसान अल्लाह को जान लेता है, उसकी ज़िंदगी बदल जाती है — उसकी नींद में भी इबादत की मिठास होती है, उसके आँसुओं में भी रहमत की बारिश होती है। रात की तन्हाई में जब दुनिया सोती है, वह बंदा अपने रब से बातें करता है, और यही उसकी सबसे बड़ी ताक़त बन जाती है। अल्लाह हमें उन बंदों में शामिल करे जो रात को जागते हैं, सजदे में सिर रखते हैं, और अपने रब की रहमत के तलबगार रहते हैं। आमीन।
📜 आयत 7-11 — सूरा अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 9
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (आख़िर) तू यक़ीनी जहन्नुमियों में होगा क्या जो शख्स रात…सूरा आयत 9/75 — सूरा अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुमर सुनें, सूरा अज़-ज़ुमर अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुमर mp3, सूरा अज़-ज़ुमर pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुमर
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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