अन-निसा · 31/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
إِن تَجْتَنِبُوا كَبَائِرَ مَا تُنْهَوْنَ عَنْهُ نُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَنُدْخِلْكُم مُّدْخَلًا كَرِيمًا ۝٣١
In tajtaniboo kabaaa`ira maa tunhawna `anhu nukaffir `ankum saiyiaatikum wa nudkhilkum mudkhalan kareemaa
📖 हिंदी अर्थ
जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेंगे और तुमको बहुत अच्छी इज्ज़त की जगह पहुंचा देंगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कबाइर (كبائر): बड़े गुनाह, वे पाप जिन पर शरिया में स्पष्ट दंड या आग का वादा किया गया हो।
  • नुकफ्फिर (نكفّر): हम माफ कर देंगे, ढक देंगे और मिटा देंगे।
  • सय्यिआत (سيئات): छोटे गुनाह, बुराइयाँ।
  • मुद्खलन करीमन (مدخلاً كريماً): सम्मानजनक प्रवेश का स्थान, अर्थात जन्नत।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! यदि तुम उन बड़े गुनाहों से बचते रहो, जिनसे अल्लाह ने तुम्हें रोका है—जैसे अल्लाह के साथ साझीदार बनाना (शिर्क), माता-पिता की अवज्ञा करना, किसी की जान नाहक़ लेना, सूद (ब्याज) खाना, और इसी प्रकार के अन्य गंभीर पाप—तो अल्लाह तुमसे वादा करता है कि वह तुम्हारे छोटे गुनाहों को माफ कर देगा और उन्हें मिटा देगा। यह अल्लाह का विशेष अनुग्रह है कि बड़े पापों से बचने पर छोटी गलतियाँ क्षमा कर दी जाती हैं। इसके अलावा, वह तुम्हें एक सम्मानजनक और प्रतिष्ठित स्थान में प्रवेश दिलाएगा, जो जन्नत है—जहाँ स्थायी सुख, शांति और अल्लाह की रहमत का वास है। यह अल्लाह की ओर से एक बड़ा पुरस्कार और करम है, जो उसके डरने वाले और आज्ञाकारी बंदों के लिए तैयार किया गया है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का रास्ता कठिन नहीं है—वह हमसे केवल बड़े गुनाहों से बचने का आग्रह करता है, और बदले में छोटी गलतियों को माफ करने का वादा करता है। यह अल्लाह की असीम दया और उदारता का प्रमाण है।
  2. इस आयत से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि अगर हमने कोई छोटी गलती कर भी दी है, तो निराश न हों; बल्कि बड़े पापों से दूर रहने की कोशिश जारी रखें, क्योंकि अल्लाह की क्षमा का द्वार हमेशा खुला है।
  3. यह हमें बताती है कि इस्लाम में आत्म-सुधार का मार्ग सरल है—पूर्णता की माँग नहीं, बल्कि ईमानदारी और निरंतर प्रयास की आवश्यकता है। यह बात हृदय में आशा और उत्साह पैदा करती है।
  4. अंत में, जन्नत का वादा हमें याद दिलाता है कि इस दुनिया की कठिनाइयाँ अस्थायी हैं; सच्ची सफलता उस सम्मानजनक स्थान में है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है। यह हमें धैर्य और संयम के साथ जीने की ताकत देता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 29-33 — अन-निसा

29يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَأْكُلُوا أَمْوَالَكُم بَيْنَكُم بِالْبَاطِلِ إِلَّا أَن تَكُونَ تِجَارَةً عَن تَرَاضٍ مِّنكُمْ ۚ وَلَا تَقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا
ए ईमानवालों आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खा जाया करो लेकिन (हॉ) तुम लोगों की बाहमी रज़ामन्दी से तिजारत हो (और उसमें एक दूसरे का माल हो तो मुज़ाएक़ा नहीं) और अपना गला आप घूंट के अपनी जान न दो (क्योंकि) ख़ुदा तो ज़रूर तुम्हारे हाल पर मेहरबान है
30وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ عُدْوَانًا وَظُلْمًا فَسَوْفَ نُصْلِيهِ نَارًا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرًا
और जो शख्स जोरो ज़ुल्म से नाहक़ ऐसा करेगा (ख़ुदकुशी करेगा) तो (याद रहे कि) हम बहुत जल्द उसको जहन्नुम की आग में झोंक देंगे यह ख़ुदा के लिये आसान है
31إِن تَجْتَنِبُوا كَبَائِرَ مَا تُنْهَوْنَ عَنْهُ نُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَنُدْخِلْكُم مُّدْخَلًا كَرِيمًا
जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेंगे और तुमको बहुत अच्छी इज्ज़त की जगह पहुंचा देंगे
32وَلَا تَتَمَنَّوْا مَا فَضَّلَ اللَّهُ بِهِ بَعْضَكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۚ لِّلرِّجَالِ نَصِيبٌ مِّمَّا اكْتَسَبُوا ۖ وَلِلنِّسَاءِ نَصِيبٌ مِّمَّا اكْتَسَبْنَ ۚ وَاسْأَلُوا اللَّهَ مِن فَضْلِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمًا
और ख़ुदा ने जो तुममें से एक दूसरे पर तरजीह दी है उसकी हवस न करो (क्योंकि फ़ज़ीलत तो आमाल से है) मर्दो को अपने किए का हिस्सा है और औरतों को अपने किए का हिस्सा और ये और बात है कि तुम ख़ुदा से उसके फज़ल व करम की ख्वाहिश करो ख़ुदा तो हर चीज़े से वाक़िफ़ है
33وَلِكُلٍّ جَعَلْنَا مَوَالِيَ مِمَّا تَرَكَ الْوَالِدَانِ وَالْأَقْرَبُونَ ۚ وَالَّذِينَ عَقَدَتْ أَيْمَانُكُمْ فَآتُوهُمْ نَصِيبَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدًا
और मां बाप (या) और क़राबतदार (ग़रज़) तो शख्स जो तरका छोड़ जाए हमने हर एक का (वाली) वारिस मुक़र्रर कर दिया है और जिन लोगों से तुमने मुस्तहकम (पक्का) एहद किया है उनका मुक़र्रर हिस्सा भी तुम दे दो बेशक ख़ुदा तो हर चीज़ पर गवाह है
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अनुवाद — अन-निसा 31

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Tuesday, August 18, 2026

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